एक शोध के अनुसार, यदि बच्चों को उम्र के शुरुआती दौर से ही धूम्रपान या नशीली दवाओं के सेवन के प्रति आगाह किया जाए और उसके दुष्प्रभाव के बारे में बताया जाए, तो किशोर उम्र में बच्चे इन चीजों के प्रति आकर्षित नहीं होते हैं।
मांट्रियल में किए गए एक शोध में यह बात सामने आई है कि यदि आत्म-नियंत्रण और असामाजिक व्यवहार के प्रति सचेत करने वाले कार्यक्रम बच्चों के पाठ्यक्रम में शामिल हों, तो इससे उनके बेहतर विकास में काफी मदद मिल सकती है। ऐसे कार्यक्रमों से उन्हें नशीली चीजों के दुष्प्रभाव की जानकारी भी काफी जल्दी मिल जाएगी।