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Diabetes Risk: शरीर में चुपके से बढ़ती है डायबिटीज की बीमारी, ये तीन टेस्ट बनेंगे आपकी 'सेहत का कवच'

Mon, 29 Dec 2025 07:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कुछ जरूरी जांचों से शुगर की समस्या को समय रहते पकड़ा जा सकता है। 
  • अगर माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों में किसी को हाई शुगर की समस्या रही हो ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह ही जाती है।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज यानी ब्लड शुगर बढ़े रहने की समस्या सभी उम्र के लोगों में आम होती जा रही है। लाइफस्टाइल में गड़बड़ी के कारण होने वाली ये समस्या अब 20 से कम आयु वालों को भी अपना शिकार बनाती जा रही है। जिन लोगों के परिवार में जैसे माता-पिता या करीबी रिश्तेदारों में किसी को हाई शुगर की समस्या रही हो ऐसे लोगों को अपनी सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की सलाह ही जाती है। 

डायबिटीज को लेकर चिंता की बात यह है कि शुरुआती स्थिति में इसके लक्षण इतने हल्के होते हैं, कि लोग समय पर बीमारी की पहचान नहीं कर पाते। अगर ब्लड शुगर लंबे समय तक सामान्य से अधिक बना रहता है तो इसके कारण धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाने लगता है।

डॉक्टर कहते हैं, अगर समय रहते शुगर को नियंत्रित करने के उपाय कर लिए जाएं, तो यह कई गंभीर जटिलताओं से बचाव हो सकता है। पर इसके लिए जरूरी है कि आपको अपनी बीमारी के बारे में पता हो। डॉक्टर कहते हैं, अगर समय रहते कुछ जांच करा लिए जाएं तो इससे बहुत आसानी से स्पष्ट हो सकता है कि आपको डायबिटीज है या नहीं? या फिर इसका खतरा तो नहीं है?
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हाई ब्लड शुगर की बढ़ती समस्या - फोटो : Freepik
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

अमर उजाला से बातचीत में एंडोक्राइनोलॉजिस्ट डॉ वसीम गौहरी कहते हैं, समय पर डायबिटीज की पहचान मौजूदा समय में बहुत जरूरी है क्योंकि ये बीमारी भारतीय आबादी में तेज रफ्तार से बढ़ती जा रही है। डायबिटीज का समय पर इलाज शुरू करने के लिए कुछ जरूरी टेस्ट सभी लोगों को करा लेने चाहिए। अगर आपको डायबिटीज का शक है या परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की दिक्कत रही है तो समय रहते अपनी जांच जरूर कराएं। 

कुछ जरूरी जांचों से शुगर की समस्या को समय रहते पकड़ा जा सकता है। फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट, पोस्ट प्रांडियल ब्लड शुगर टेस्ट और HbA1c टेस्ट से शरीर में शुगर की स्थिति का सही आकलन होता है।


(ये भी पढ़िए- डरा रहे हैं डायबिटीज के आंकड़े, भारत में हर दूसरे व्यक्ति का शुगर लेवल ठीक नहीं)
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डायबिटीज की जांच - फोटो : Adobe Stock
फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट

फास्टिंग ब्लड शुगर टेस्ट शरीर में खाली पेट शुगर के स्तर को मापने में मदद करती है। इस जांच के लिए कम से कम 8 से 10 घंटे तक कुछ भी खाना-पीना नहीं चाहिए। सामान्य ब्लड टेस्ट से यह समझने में मदद मिलती है कि शरीर बिना भोजन के शुगर को कितनी अच्छी तरह नियंत्रित कर पा रहा है।

सामान्य व्यक्ति में फास्टिंग ब्लड शुगर 70-100 mg/dL तक होना चाहिए। अगर ये अक्सर 130 से ऊपर रहता है तो डायबिटीज की आशंका हो सकती है। 

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हाई ब्लड शुगर हो सकता है खतरनाक - फोटो : Adobe Stock
पोस्ट प्रांडियल ब्लड शुगर टेस्ट

पोस्ट प्रांडियल ब्लड शुगर टेस्ट भोजन करने के लगभग 2 घंटे बाद किया जाता है। इस टेस्ट से पता चलता है कि खाना खाने के बाद शरीर शुगर को कैसे मैनेज कर रहा है। सामान्य स्थिति में पोस्ट प्रांडियल ब्लड शुगर 140 mg/dL से कम होना चाहिए। 180 या उससे अधिक की रीडिंग होने पर डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। 
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शुगर की जांच - फोटो : Freepik.com
HbA1c टेस्ट

HbA1c टेस्ट पिछले 2 से 3 महीनों की औसत ब्लड शुगर की जानकारी देता है। डायबिटीज के मरीजों को हर 3 महीने के अंतराल पर ये टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। इस टेस्ट का सामान्य स्तर 5.7 प्रतिशत से कम होना चाहिए। 6.5 प्रतिशत या उससे अधिक होने पर डायबिटीज की पुष्टि होती है। 

ग्लूकोमीटर और शुगर के अन्य जांच की तुलना में इस टेस्ट को अधिक विश्वसनीय माना जाता है। इसके लिए फास्टिंग की जरूरत भी नहीं होती और यह रोजाना होने वाले उतार-चढ़ाव से प्रभावित नहीं होता। यह टेस्ट डायबिटीज के कारण होने वाली जटिलताओं के जोखिम को समझने में बेहद उपयोगी साबित होता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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