कैरेबियन सागर में पाए जाने वाले विषैले समुद्री घोंघों में मिलने वाले जहर में कारगर दर्द निवारक दवा के गुण पाए गए हैं। पीएनएएस में प्रकाशित शोध के मुताबिक इन घोंघों में पाया जाने वाला जहर 'आरजी1ए' उनके शिकार को मारने व उसे लकवाग्रस्त करने सक्षम है। यह दर्द को कम करने में भी सहायक सिद्ध हो सकता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि आने वाले समय में इसकी मदद से नशीली दवाओं के आदी लोगों का इलाज संभव हो सकता है।
अमेरिका के उटा विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने एक ऐसे तत्व की खोज की है जिससे दर्द को दूर करने के लिए नशीली दवाओं का सेवन नहीं करना पड़ेगा। चूहों पर किए शोध में सामने आया है कि इस तत्व का असर लंबे समय तक रहता है और इससे शरीर पर भी दुष्प्रभाव नहीं पड़ता।
शोधकर्ता दवा के प्रभाव व सुरक्षित इस्तेमाल को लेकर प्री-क्लिनिकल टेस्ट के अगले चरण में इस पर शोध जारी रखेंगे। मौजूदा समय में नशीली दवाओं का संकट महामारी के स्तर तक पहुंच चुका है। अमेरिका के बीमारी नियंत्रण व रोकथाम केंद्र (सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रेवेंशन) के मुताबिक अमेरिका में प्रत्येक दिन नशीली दवाओं के भारी मात्रा में सेवन 91 लोगों की मौत होती है। चिकित्सा के क्षेत्र में लंबे वक्त से दर्द निवारण के लिए नशीली दवाओं पर निर्भरता को खत्म करने के लिए वैकल्पिक उपचार की आवश्यकता महसूस की जा रही थी।