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बड़ी कामयाबी: अब इस जानलेवा ब्रेन कैंसर को हराना हुआ आसान, वैज्ञानिकों ने खोज निकाला कारगर इलाज

Mon, 28 Jul 2025 01:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हर साल ग्लियोब्लास्टोमा कैंसर के कारण दुनियाभर में दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है। रूसी वैज्ञानिकों ने एक कारगर डिवाइस तैयार किया है जिसकी मदद से ट्यूमर के रोगियों का उपचार काफी आसान और प्रभावी हो सकता है।
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ब्रेन कैंसर का इलाज - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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ब्रेन ट्यूमर एक गंभीर और जानलेवा समस्या है जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। ग्लियोब्लास्टोमा (Glioblastoma) एक गंभीर प्रकार का ब्रेन ट्यूमर है जो मस्तिष्क या रीढ़ की हड्डी में शुरू होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ (एनआईएच) की रिपोर्ट के मुताबिक हर साल इस प्रकार के ट्यूमर के कारण दुनियाभर में दो लाख से अधिक लोगों की मौत हो जाती है।

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ग्लियोब्लास्टोमाएक बहुत ही आक्रामक और तेजी से बढ़ने वाला ब्रेन ट्यूमर है जो मस्तिष्क में ग्लियाल कोशिकाओं से उत्पन्न होता है। यह वयस्कों में सबसे आम घातक ब्रेन ट्यूमर माना जाता है। इसका अब तक कोई उपचार भी उपलब्ध नहीं है। जिन लोगों में इस कैंसर का निदान किया जाता है उन्हें कैंसर से बचाने और लक्षणों को कम करने के लिए उपचार दिया जाता है।

अब इस घातक रोग का विशेषज्ञों की टीम ने उपचार ढूंढ लिया है। रूसी वैज्ञानिकों ने एक कारगर डिवाइस तैयार किया है जिसकी मदद से ट्यूमर के रोगियों का उपचार किया जा सकता है। वैज्ञानिकों की टीम ने एक माइक्रोफ्लुइडिक प्लेटफॉर्म बनाया है जो मस्तिष्क में रक्त प्रवाह की नकल करता है और ग्लियोब्लास्टोमा के उपचार की प्रभावशीलता में उल्लेखनीय सुधार कर सकता है।

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ब्रेन में ट्यूमर और इससे कैंसर का खतरा - फोटो : Adobe Stock Photos
ट्यूमर के इलाज के लिए वैज्ञानिकों ने बनाई कारगर डिवाइस

इंस्टीट्यूट ऑफ बायोनिक टेक्नोलॉजीज एंड इंजीनियरिंग के वैज्ञानिकों द्वारा तैयार किया गया ये उपकरण कोशिकाओं को जीवित रहने में सक्षम बनाता है। 

अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि इस प्लेटफॉर्म को रेड लाइट के संपर्क में लाने से कैंसर कोशिकाओं में आयन चैनल सक्रिय हो जाते हैं, जिससे आमतौर पर इस्तेमाल की जाने वाली कीमोथेरेपी दवाओं का अवशोषण बढ़ जाता है। इस शोध का नेतृत्व करने वाले एसोसिएट प्रोफेसर अलेक्जेंडर मार्कोव कहते हैं, यह प्रक्रिया दवा को कैंसर कोशिकाओं में अधिक प्रभावी ढंग से प्रवेश करने में मदद करती है।

मस्तिष्क से संबंधित गंभीर समस्याओं का खतरा - फोटो : Adobe stock photos
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

प्रोफेसर मार्कोव कहते हैं, आयन चैनल पंप की तरह काम करते हैं। रेड लाइट उनकी गतिविधि को बढ़ाता है, जिससे दवा से अधिकतम लाभ प्राप्त हो सकता है और कैंसर कोशिकाओं को मारना भी आसान हो सकता है। प्रयोगशाला परीक्षणों में पाया गया है कि इस डिवाइस की मदद से 95-98% तक ग्लियोब्लास्टोमा कोशिकाओं को नष्ट करने में मदद मिली। ये परिणाम सामान्य उपचार की तुलना में पांच गुना तक अधिक प्रभावी साबित हो सकता है। 

विशेषज्ञों ने कहा, हम इस तकनीक का इस्तेमाल भविष्य में अन्य प्रकार के कैंसर के लिए भी करना चाहते हैं, हालांकि इसके लिए अभी अध्ययन किया जाना बाकी है। 

ग्लियोब्लास्टोमा रोगियों को क्या दिक्कतें होती हैं?

ग्लियोब्लास्टोमा कैंसर तेजी से बढ़ता है और स्वस्थ ऊतकों पर आक्रमण करके उन्हें नष्ट करने लगता है। इस प्रकार के ब्रेन ट्यूमर और कैंसर के लक्षणों में आमतौर पर रोगी को गंभीर प्रकार का सिरदर्द, मतली-उल्टी, धुंधला दिखाई देने, बोलने में परेशानी, छूने पर अनुभूति न होना और दौरे पड़ने जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
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ब्रेन ट्यूमर का इलाज होगा आसान - फोटो : Freepik.com
किन लोगों को इस कैंसर का खतरा अधिक होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की टीम बताती है कि ग्लियोब्लास्टोमा का ट्यूमर या कैंसर वृद्ध लोगों में अधिक देखा जाता है पर ये किसी भी उम्र में हो सकता है। जो लोग रेडिएशन के संपर्क में अधिक रहते हैं उन्हें इस प्रकार के ब्रेन ट्यूमर का खतरा अधिक होता है। इसके अलावा कुछ लोगों में इसका वंशानुगत खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है।

इन जोखिम कारकों से बचाव करके कैंसर और इसके खतरे से को कम किया जा सकता है। फिलहाल शोधकर्ताओं को ग्लियोब्लास्टोमा को रोकने के लिए कोई प्रभावी तरीका ज्ञात नहीं है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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