कार्बन डाई ऑक्साइड और बढ़ता प्रदूषण
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वातावरण में बढ़ता कार्बन डाइऑक्साइड
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इंसान ऐसे माहौल में विकसित हुए जिसमें कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) की मात्रा लगभग 200-300 पार्ट्स प्रति मिलियन (ppm) थी। समय के साथ यह आंकड़ा 420 ppm से ऊपर पहुंच गया है, ये हमारी प्रजाति के इतिहास में किसी भी समय से ज्यादा है।
हम जानते हैं कि कार्बन डाइऑक्साइड की अतिरिक्त मात्रा जलवायु परिवर्तन में योगदान दे रही है, पर क्या आप जानते हैं कि यह हमारे शरीर की केमिस्ट्री को भी बदल रहा है?
अध्ययन में क्या पता चला?
इस खतरनाक ट्रेंड को समझने के लिए विशेषज्ञों की टीम ने दुनिया के सबसे बड़े स्वास्थ्य डेटासेट में से पिछले दो दशकों की जानकारी का अध्ययन किया। इसके आधार पर जो बाते समझ आई हैं वो काफी डराने वाली हो सकती हैं।
- शोधकर्ताओं ने यूएस नेशनल हेल्थ एंड न्यूट्रिशन एग्जामिनेशन सर्व (NHANES) के ब्लड केमिस्ट्री डेटा का विश्लेषण किया।
- इस सर्वे में 1999 से 2020 के बीच हर दो साल में लगभग 7,000 अमेरिकियों के सैंपल लिए गए थे।
- शोधकर्ताओं ने इसमें तीन मार्करों- कार्बन डाइऑक्साइड, कैल्शियम और फॉस्फोरस पर गौर किया।
- इसमें पाया गया कि CO₂ मुख्य रूप से खून में बाइकार्बोनेट (HCO₃-) के रूप में मौजूद रहता है। जब CO₂ खून में प्रवेश करता है, तो यह बाइकार्बोनेट में बदल जाता है।
- यह प्रक्रिया लाल रक्त कोशिकाओं के अंदर होती है,और इससे हाइड्रोजन आयन भी बनते हैं।
खून में बढ़ता CO₂ का स्तर
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खून के एसिडिक होने का खतरा
जब थोड़े समय के लिए CO₂ का स्तर बढ़ जाता है, तो इससे खून ज्यादा एसिडिक हो सकता है और खून में बाइकार्बोनेट का स्तर थोड़ा बढ़ जाता है।
अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो किडनी पेशाब के जरिए निकलने वाले बाइकार्बोनेट की मात्रा को कम कर देती है और ज्यादा बाइकार्बोनेट बनाती हैं। इसका कुल असर यह होता है कि खून में बाइकार्बोनेट का स्तर बढ़ जाता है, जिससे लगातार बनी रहने वाली एसिडिक स्थिति से का मुकाबला किया जा सके।
सेहत पर होने वाले दुष्प्रभाव
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सेहत पर क्या हो सकता है इसका असर
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस अध्ययन का यह मतलब ये नहीं है कि जब वातावरण में CO₂ का स्तर एक निश्चित सीमा तक पहुंच जाएगा, तो लोग अचानक बीमार पड़ने लगेंगे। हालांकि डेटा से जो संकेत मिल रहा है, वह ध्यान देने लायक है।
CO₂ का बढ़ता स्तर ब्लड केमिस्ट्री में धीरे-धीरे बदलाव ला रही है। हमें वातावरण की बनावट पर भी पारंपरिक जलवायु संकेतकों के साथ-साथ नजर रखी जानी चाहिए। यह लंबे समय में लोगों की सेहत पर असर डालने वाला एक संभावित कारक हो सकता है।
हाइपरकार्बिया का असर
खून में कार्बन डाइऑक्साइड की मात्रा बढ़ने को हाइपरकैपनिया या हाइपरकार्बिया कहते हैं। इसकी वजह से रेस्पिरेटरी एसिडोसिस हो जाता है, जिससे खून बहुत ज्यादा एसिडिक हो जाता है। इसके लक्षणों में तेज सिरदर्द, सांस लेने में दिक्कत, चक्कर आने, भ्रम, पैनिक अटैक जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।
- गंभीर मामलों में अगर इलाज न किया जाए तो मरीज कोमा में भी जा सकता है या उसकी मौत भी हो सकती है।
- CO2 की मात्रा बढ़ने से दिमाग की नसें फैल (सेरेब्रल वैसोडाइलेशन) जाती हैं, जिससे दिमाग में खून का दबाव बढ़ जाता है। इसकी वजह से तेज सिरदर्द और चक्कर आने लगते हैं।
- CO2 का लेवल ज्यादा होने पर चक्कर आना, भ्रम, सुस्ती और डिप्रेशन जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
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स्रोत:
Rising CO₂ levels are reflected in human blood. Scientists don’t know what it means
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