बच्चों में एडीएचडी की समस्या
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भारत में एडीएचडी के मामले
एडीएचडी एक ऐसी स्थिति है जो जिसमें मरीज के लिए किसी एक काम पर ध्यान लगाने, काम को जारी रखने और अपने व्यवहार को नियंत्रित करने में कठिनाई हो सकती है। मरीजों का ध्यान भटकता रहता है, चीजें भूल जाती और दिए गए निर्देशों का पालन करने में परेशानी हो सकती हैं।
भारत भी एडीएचडी की समस्या से परेशान देखा जा रहा है।
- आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में 1.6% से 17.9% बच्चों में अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर के मामलों का पता चला है।
- हाल की क्लिनिकल रिपोर्टों में कोरोना महामारी के बाद इसके लक्षणों की पहचान में तेजी से बढ़ोतरी देखी गई है।
- अलग-अलग राज्यों में किए गए अध्ययनों से पता चलता है कि महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में इसकी दर 1.5%, तो कर्नाटक जैसे इलाकों में 14% से ज्यादा है।
ब्रिटेन में अनुमान है कि करीब 25 लाख लोगों को एडीएचडी हो सकता है, लेकिन ज्यादातर का अभी तक आधिकारिक रूप से निदान नहीं हुआ है। दूसरी ओर, जांच के लिए लाखों रेफरल लंबित हैं। इस बीच कुछ अध्ययनों में चिंता जताई जा रही है कि एडीएचडी की दवाओं के इस्तेमाल के साथ इनके संभावित दुष्प्रभावों पर भी नजर रखी जानी चाहिए। खासतौर पर उन लोगों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है जिनमें पहले से कोई हृदय संबंधी बीमारी है।
अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर
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स्टिमुलेंट दवाएं लेने वाले के बढ़ रहे आंकड़े
ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने बताया कि सिर्फ एक साल की बात करें तो एडीएचडी में इस्तेमाल होने वाली स्टिमुलेंट दवाएं लेने वाले मरीजों की संख्या करीब 40 प्रतिशत बढ़ी है। ये दवाएं दिमाग की सक्रियता और ध्यान केंद्रित करने की क्षमता को कंट्रोल करती हैं।
- जनवरी से जून के बीच कुल 24 लाख एडीएचडी प्रिस्क्रिप्शन दिए गए।
- इस रफ्तार को देखते हुए ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस यानी एनएचएस पिछले साल के रिकॉर्ड 42 लाख प्रिस्क्रिप्शन से भी आगे निकल सकती है।
विशेषज्ञ इस तेज बढ़ोतरी को लेकर भी कुछ सवाल भी उठा रहे हैं। उनका कहना है कि इसकी एक वजह ‘मेडिकलाइजेशन ऑफ डिस्ट्रेस’ भी हो सकती है। आसान भाषा में इसका मतलब है कि सामान्य तनाव, परेशानी या रोजमर्रा की मुश्किलों को भी बीमारी मानकर इलाज की जरूरत समझी जाने लगना।
विशेषज्ञों को चिंता है कि पहले जिन व्यवहारों को सामान्य माना जाता था, उन्हें अब कई बार ऐसी समस्या के रूप में देखा जा रहा है जिसके लिए मेडिकल इलाज जरूरी है।
जागरूकता बढ़ी पर चिंता भी
एडीएचडी को लेकर दुनियाभर में जागरूकता बढ़ रही है, इसके लिए सोशल मीडिया पर इन्फ्लुएंसर्स के अपने अनुभव खुलकर साझा करने को बड़ा योगदान वाला माना जा रहा है। इससे लोगों को इस समस्या के बारे में ज्यादा जानकारी मिल रही है और कई लोग अपने लक्षणों को पहचानकर जांच के लिए आगे आ रहे हैं।
एडीएचडी के लिए काम करने वाले समूह इसे सकारात्मक बदलाव मानते हैं। लेकिन दूसरी तरफ सरकारी अधिकारियों ने इलाज की मांग में इतनी तेज बढ़ोतरी को लेकर चिंता भी जताई है।
एनएचएस की रिपोर्ट में एडीएचडी की दवाओं पर होने वाले खर्च की जानकारी भी सामने आई है। एडीएचडी की दवाओं पर एनएचएस का खर्च करीब 12 प्रतिशत बढ़कर 5.6 करोड़ पाउंड हो गया। पिछली तिमाही में यह खर्च करीब 5 करोड़ पाउंड था।
एडीएचडी की दवाओं को लेकर सावधानी जरूरी
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दवाओं के साइड-इफेक्ट्स को लेकर अलर्ट
एडीएचडी की दवाओं के बढ़ते इस्तेमाल के बीच इनके संभावित गंभीर दुष्प्रभावों को लेकर भी चिंता सामने आई है। खासतौर पर इसका हार्ट हेल्थ पर गंभीर असर सामने आया है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एडीएचडी की दवा शुरू करने वाले कुछ मरीजों में पहले से मौजूद हृदय संबंधी समस्या भी हो सकती है। कुछ मामलों में एडीएचडी की स्टिमुलेंट दवाएं ऐसी समस्या वाले लोगों में गंभीर जटिलताओं का खतरा बढ़ा सकती हैं।
- ऐसे ही एक मामल में लंदन में 28 वर्षीय जैकब वुडरसन की मौत भी हो गई थी।
- एडीएचडी का निदान होने के करीब छह महीने बाद उनकी दवा की खुराक बढ़ाई गई थी। इसके कुछ समय बाद उनकी अचानक मौत हो गई। उन्हें सडन एरिदमिक डेथ सिंड्रोम हुआ था।
- आसान भाषा में समझें तो भले ही आप दिखने में स्वस्थ हो पर दिल की धड़कन में अचानक जानलेवा गड़बड़ी हो सकती है जो कार्डियक अरेस्ट और मौत का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है।
- जांच में पाया गया कि संभवत: दवा की डोज बढ़ाए जाने के कारण उनके दिल पर असर हुआ और मौत हो गई।
विशेषज्ञ कहते हैं, निश्चित ही ये अच्छे संकेत हैं कि लोग अब एडीएचडी के बारे में जान रहे हैं और डॉक्टरी मदद ले रहे हैं। पर साथ ही साथ इसके इलाज के समय डॉक्टरों को भी सावधानी बरतनी चाहिए। कुछ दवाएं गंभीर साइड-इफेक्ट्स का कारण बन सकती हैं, जिससे पहले से ही दिल की बीमारी के शिकार लोगों को खतरा हो सकता है।
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स्रोत:
ADHD: Drug prescribing in NHS continues to rise in England
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