शोध में पाया गया कि ग्रामीण भारत के उन लोगों में जो कम पढ़े-लिखे हैं और जिनकी घरेलू संपत्ति कम है, उनमें डायबिटीज का प्रसार ज्यादा था। जबकि महिलाओं की स्थिति बेहतर पाई गई और अनुमान है कि इसकी वजह प्रसवपूर्व देखभाल के दौरान गर्भकालीन डायबिटीज के लिए रेगुलर टेस्ट है। सर्वेक्षण में शामिल 729,829 प्रतिभागियों में से 3.3 फीसदी (19,453) डायबिटीज से पीड़ित थे। इनमें से 52.5 फीसदी जानते थे कि उन्हें डायबिटीज था, जबकि 40.5 फीसदी ने इसके लिए उपचार की मांग की थी और केवल 24.8 फीसदी लोग डायबिटीज कंट्रोल कर पाए थे। बाकी 75.2 फीसदी रोगियों की "देखभाल तक पहुंच" नहीं थी, जिसमें एक बड़ी तादाद इसे लेकर जागरुकता के स्तर पर ही पीछे रह गई।