भूमिजा और लिविंग विदाउट मेडिसिन की ओर से महिला स्वास्थ्य से जुड़े अहम मुद्दों पर चल रहे वेबिनार में मंगलवार को पॉलिसिस्टिक ओवरी सिन्ड्रोम के बारे में जानकारी दी गई। 10 मार्च से शुरू हुआ यह आयोजन 15 मार्च तक होगा, जिसमें मोटापा, गठिया (ऑर्थराइटिस), ऑस्टोपोरोसिस, प्रि-मैनोपॉज और मैनोपॉज, हाइपोथाइराइड के अलावा कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों के बारे में चर्चा होगी।
आयुर्वेद, होम्योपैथी और प्राकृतिक चिकित्सा (नैचुरोपैथी) के क्षेत्र की अनुभवी महिला चिकित्सक रोज रात आठ बजे इन स्वास्थ्य मुद्दों पर लाइव बात कर रही हैं। आने वाले दिनों में हैल्थ फूड पर काम करने वाली महिला उद्यमी भी अपने अनुभव साझा करेंगी।
मंगलवार को होम्योपैथी चिकित्सक और नैचुरोपैथी की जानकार डॉ नैया मुकाती ने पीरियड्स से जुड़ी बीमारी पॉलिसिस्टिक ओवरी डिजीज (पीसीओडी) या पॉलिसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (पीसीओएस) के बारे में बताया।
उन्होंने बताया कि 100 में से 3 महिलाएं भी इस बीमारी का नाम नहीं सुनी होती हैं। उन्होंने कहा कि यह कोई बीमारी नहीं है, बल्कि यह एक हार्मोनल डिसऑर्डर है जो कि अंडाशय के बाहरी किनारों पर छोटे-छोटे सिस्ट के बढ़ने का कारण बनता है। इससे मादा हार्मोन एंडोर्फिन के कामकाज को बाधित करता है और अंडाशय चक्र असामान्य हो जाता है।
पीरियड्स के शुरू होने से पहले या बाद में महिलाओं के शरीर में कई तरह के हार्मोनल बदलाव होते हैं जो कई बार इस बीमारी का रूप ले लेते हैं। इसमें महिलाएं कई बार 2 से 3 महीने तक पीरियड्स नहीं हो पाती हैं। पीसीओडी चेहरे पर मुंहासे का भी कारण बनता है और मुंहासे से पीड़ित 18 प्रतिशत महिलाओं में गंभीर डिप्रेशन और 44 प्रतिशत महिलाओं में उत्कुंठा, व्याकुलता (एंग्जाइटी) देखी गई है। पीसीओडी का उपचार न होने से महिला का आत्मविश्वास टूट जाता है और उनका अपने प्रति आदर (सेल्फ रेस्पेक्ट) कम हो जाता है।
उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव में पीसीओडी जैसी समस्या बढ़ने लगती है। इसके अलावा महिलाओं का धूम्रपान करना, अल्कोहल का अत्यधिक सेवन आदि पीसीओडी होने का खतरा बनाए रखता है। उन्होंने इसके बारे में कई सावधानियों और उपायों के बारे में भी बताया।
ऐसे ही महिला स्वास्थ्य से जुड़े अन्य जरूरी विषयों पर वेबिनार में भाग लेने के लिए आप भी पंजीकरण करा सकते हैं।