पार्किंसन रोगियों के लगातारा कांपते रहते हैं हाथ
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बढ़ रहे हैं पार्किंसन रोगी
चीन स्थित कैपिटल मेडिकल यूनिवर्सिटी सहित कुछ अन्य शोधकर्ताओं ने हाल ही में चिंता जताई है कि साल 2021 की तुलना में 2050 में पार्किंसन रोगियों की संख्या में 112 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके कारण साल 2050 तक ढाई करोड़ से अधिक लोगों के इस रोग की चपेट में आने का डर है। जैसे-जैसे आपकी उम्र बढ़ती जाती है इस रोग का खतरा भी बढ़ता जाता है।
ब्रिटिश मेडिकल जर्नल में प्रकाशित इस अध्ययन की रिपोर्ट बताती है कि अकेले दक्षिण एशिया में दो दशकों में अनुमानित रोगियों की संख्या 68 लाख हो सकती है। पार्किंसंस रोग भारत में भी बड़ी संख्या में लोगों को प्रभावित करती है। आंकड़ों के मुताबिक भारत में प्रति एक लाख लोगों में इसके 15 से 43 मरीज हो सकते हैं।
किन्हें इसका खतरा अधिक होता है?
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि पुरुषों में इस बीमारी का जोखिम महिलाओं की तुलना में अधिक देखा जाता रहा है। पुरुषों और महिलाओं में पार्किंसन अनुपात 2021 में 1.46 था, जो 2050 तक 1.64 हो सकता है। आमतौर पर, यह 50 वर्ष या उससे अधिक उम्र में शुरू होता है। कुछ मामलों में देखा गया है कि पार्किंसंस रोग कम उम्र के वयस्कों में भी हो रहा है, लेकिन ऐसे मामले अब भी दुर्लभ हैं।
जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये बीमारी रही हो उनमें आनुवांशिक तौर पर भी इसका जोखिम अधिक हो सकता है। इसके अलावा अगर आप ऐसे काम करते हैं जिनमें विषाक्त पदार्थों, कीटनाशकों और रसायनों के लगातार संपर्क में रहना होता है तो इसके कारण भी पार्किंसंस रोग का जोखिम बढ़ सकता है।
मस्तिष्क में होने वाली समस्याएं
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इस बीमारी के बारे में जानिए
पार्किंसन बीमारी तंत्रिका तंत्र यानी नर्वस सिस्टम से जुड़ी बीमारी है। यह मस्तिष्क के उस हिस्से को प्रभावित करती है जहां से पूरे शरीर की गतिविधि नियंत्रित होती है। इस वजह से शरीर के अंगों में कंपकंपी और मांसपेशियों में जकड़न और रफ्तार धीमी हो जाती है। इसके साथ ही मरीज को सोचने, संतुलन बनाए रखने यानी चलने, खड़े होने, बात करने और बैठने में भी परेशानी होती है। हाथ व पैर के लगातार हिलते रहने के लिए खाना खाना भी कठिन हो सकता है।
शोधकर्ताओं ने ग्लोबल बर्डन ऑफ डिजीज स्टडी 2021 के डाटा का विश्लेषण किया। उन्होंने 2022 से 2050 के बीच 195 देशों और क्षेत्रों में इस बीमारी के बढ़ने के कारणों की जांच की। उन्होंने पाया कि बुजुर्ग आबादी का बढ़ना 90 फीसदी पार्किंसन के नए मामलों की मुख्य वजह हो सकता है।
हाथों के कांपते रहना सबसे आम समस्या
पार्किंसंस रोग के लक्षण हर किसी में अलग-अलग हो सकते हैं। शुरुआती लक्षण हल्के हो सकते हैं, और हो सकता है कि आपको उन पर ध्यान भी न जाए।
इसमें कंपन होते रहना बहुत आम है और ये आमतौर पर हाथों या उंगलियों में शुरू होता है। कभी-कभी ये पैर या जबड़े में भी हो सकता है। इतना ही नहीं जब आप आराम कर रहे हों तब भी आपका हाथ हिलता रह सकता है। इसके अलावा कुछ लोगों को बोलने में भी दिक्कत होने लगती है।
पार्किंसंस से बचाव कैसे करें?
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अब भी नहीं है इसका कोई इलाज
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, पार्किंसंस रोग को ठीक नहीं किया जा सकता है, इसका कोई विशिष्ट उपचार भी नहीं है। कुछ दवाएं लक्षणों को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं। कुछ लोगों को सर्जरी करवानी पड़ सकती है।
जीवनशैली में कुछ बदलाव आपके पार्किंसंस रोग के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। फाइबर से भरपूर खाद्य पदार्थ खाने और खूब सारे तरल पदार्थ पीने से कब्ज को रोकने में मदद मिल सकती है, जोकि इस रोग में होने वाली एक आम समस्या है। इसके अलावा व्यायाम करने से आपकी मांसपेशियों की ताकत, चलने की क्षमता, लचीलापन और संतुलन बेहतर हो सकता है।
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स्रोत और संदर्भ
Projections for prevalence of Parkinson’s disease and its driving factors in 195 countries and territories to 2050: modelling study of Global Burden of Disease Study 2021
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