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मुंह का कैंसर (Oral Cancer): दो दशकों में 50 फीसदी तक बढ़ सकते हैं मामले, पुरुषों में खतरा अधिक

सार

ओरल कैंसर, मुंह की एक घातक बीमारी है जो जीभ, अंदरूनी गाल, ऊपरी और निचले जबड़े के हिस्से को प्रभावित करती है। मुंह के कैंसर के शुरुआती चरण दर्द रहित और लक्षणहीन होते हैं, इसलिए उनका निदान करना काफी चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
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ओरल कैंसर के जोखिम कारक - फोटो : iStock
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विस्तार
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विश्व स्वास्थ्य संगठन का अनुमान है कि 2020 से 2040 तक मुंह के कैंसर (ओरल कैंसर) की घटनाएं 50.7% तक बढ़ सकती हैं। ओरल कैविटी कैंसर के अनुमानित मामले 60 लोगों में से एक में हो सकते हैं।

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वाराणसी में, पीबीसीआर के आंकड़ों के अनुसार, ओरल कैविटी पुरुषों में कैंसर का प्रमुख कारण है, जो लगभग 40% कैंसर के लिए जिम्मेदार है, जबकि महिलाओं में यह 6% है। कैंसर के हर तीन में से एक मामला मुंह के कैंसर का हो सकता है। जिले में 48 में से 1 पुरुष को मुंह का कैंसर होने का खतरा है। ग्रामीण क्षेत्रों की तुलना में शहरी क्षेत्रों (प्रति 100,000 जनसंख्या पर 22.4) में कैंसर की घटना दर 38% अधिक है। इस अंतर को जीवनशैली, खान-पान की आदतों और स्वास्थ्य सुविधाओं तक आसान पहुंच के कारण अधिक निदान के लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

मुंह का कैंसर क्या है?

ओरल कैंसर, मुंह की एक घातक बीमारी है जो जीभ, अंदरूनी गाल, ऊपरी और निचले जबड़े के हिस्से को प्रभावित करती है। यह अधिकतर मौखिक म्यूकोसा के कार्सिनोजेनिक पदार्थों के अत्यधिक संपर्क में आने के कारण बनता है।

वाराणसी में इस कैंसर का प्रमुख कारण चबाने वाली तंबाकू (खैनी/सूरती) और सुपारी है। निष्कर्षों से पता चलता है कि जो लोग शराब और तंबाकू दोनों का सेवन करते हैं उनमें मुंह के कैंसर का खतरा उन लोगों की तुलना में 8 गुना अधिक होता है जो दोनों का सेवन नहीं करते हैं। सिगरेट-बीड़ी पीना और सुपारी या पान चबाना भी उतना ही हानिकारक है। कुछ अन्य कारणों में एचपीवी वायरस, खराब फिटिंग वाले डेन्चर शामिल हैं।

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चूंकि मुंह के कैंसर के शुरुआती चरण दर्द रहित और लक्षणहीन होते हैं, इसलिए उनका निदान करना बहुत चुनौतीपूर्ण हो जाता है। सभी संभावित उपचारों को पूरा करने और अंतरराष्ट्रीय दिशानिर्देशों का पालन करने के बाद भी, सफलता (पांच साल तक जीवित रहने) की संभावना कम रहती है। कई कैंसर पीड़ित उच्च स्तर की विकृति और दर्द के कारण मौत का शिकार भी हो जाते हैं। कुछ मरीज जो शुरू में ठीक हो जाते हैं उन्हें बाद की उम्र में कैंसर की पुनरावृत्ति का अनुभव हो सकता है।

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तंबाकू उत्पाद और कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
मुंह के कैंसर के शुरुआती लक्षण क्या हैं?

मुंह के कैंसर आमतौर पर, घाव (शुरुआती लक्षण) सफेद घाव (ल्यूकोप्लाकिया) या लाल घाव (एरिथ्रोप्लाकिया), मुंह में जलन (लाइकेन प्लेनस), मुंह खोलने में परेशानी (ओरल सबम्यूकस फाइब्रोसिस) और ठीक न होने वाले अल्सर पैदा कर सकता है। एक बार कैंसर के घातक होने पर मुंह, चेहरे के हिस्से में अनियमित वृद्धि/घाव/ठीक न होने वाले अल्सर को स्पष्ट देखा जा सकता है। ये गर्दन के लिम्फ नोड्स में भी सूजन का भी कारण बन सकती है।

मौखिक कैंसर का निदान आमतौर पर परीक्षण (विजुअल एग्जामिनेशन)द्वारा किया जाता है, यह मौखिक कैंसर के निदान का एक बहुत ही लागत प्रभावी तरीका है। क्लीनिकल निदान की पुष्टि करने के लिए डॉक्टर बायोप्सी करते है, जिसमें लोकल एनेस्थीसिया देकर मुंह के प्रभावित क्षेत्र का एक छोटा सा टुकड़ा लेना और माइक्रोस्कोप से इसकी जांच करना शामिल है। यदि कैंसर के निदान की पुष्टि हो जाती है तो रोगी को सीटी स्कैन, एमआरआई या पीईटी स्कैन जैसी आगे की जांच की आवश्यकता हो सकती है।

कैंसर का इलाज

सर्जरी प्रमुख उपचार है जिसके बाद उन्नत मामलों में रेडिएशन और कीमोथेरेपी जैसे सहायक उपचार आते हैं।

आदत में सुधार, कैंसर के रोकथाम, शीघ्र निदान की कुंजी है। किसी भी सफेद या लाल धब्बे या दर्द रहित अल्सर के लिए ऑन्कोलॉजिस्ट से सलाह लेनी चाहिए। इलाज पूरी तरह से निदान के समय पर निर्भर करता है। मुंह के कैंसर का यदि शीघ्र निदान हो जाए तो इसे ठीक किया जा सकता है। 

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(डॉ. मनीष तिवारी कार्किनोस हेल्थकेयर में कंसलटेंट, हेड एंड नेक ऑन्कोसर्जन और माइक्रोवास्कुलर रिकंस्ट्रक्टिव सर्जन हैं। उनकी रुचि मुंह के कैंसर का शीघ्र पता लगाने और प्रबंधन में है)

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।
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