गायों में बर्ड फ्लू का संक्रमण
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गाय, इंसानों सहित कई जानवरों में देखा गया संक्रमण
पिछले कुछ महीनों के रिपोर्ट उठाकर देखें तो पता चलता है कि वायरस के अलग-अलग वैरिएंट के कारण गाय, इंसानों और कुछ अन्य जानवरों में संक्रमण देखा गया था। अप्रैल 2024 में पहली बार
गाय और गायों से इंसानों में बर्ड फ्लू संक्रमण के मामले देखे गए थे।
H5N1 को शोधकर्ता कई प्रकार से घातक मान रहे हैं, इसकी मृत्युदर भी अधिक मानी जाती रही है। कुछ विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से इस वायरस का प्रकोप देखा जा रहा है ऐसे में इसके कारण संभावित महामारी का खतरा है। अगर महामारी आती है तो निश्चित ही ये कोरोना से कहीं ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
एच5एन1 का बढ़ता संक्रमण
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वायरस के एक नए वैरिएंट को लेकर चिंता
वायरस के नए वैरिएंट की प्रकृति को लेकर चिंता जताते हुए कहा गया कि जिस तरह से इस वायरस का प्रसार है, ऐसे में इसके जानवरों तथा उनके साथ काम करने वाले लोगों में संक्रमण को नियंत्रित करना कठिन हो सकता है। चूंकि ये वायरस मवेशियों-कच्चे दूध में भी पाया गया है ऐसे में आशंका है कि इसके कारण गंभीर खतरे उत्पन्न हो सकते हैं।
यूएस स्थित सेंट ज्यूड चिल्ड्रेंस रिसर्च हॉस्पिटल के इन्फ्लूएंजा विशेषज्ञ रिचर्ड वेबी ने कहा, हमें हमेशा यही लगता था कि पक्षी से गाय में संक्रमण एक बहुत ही दुर्लभ घटना है। अब ये इंसानों को भी प्रभावित करता हुआ देखा जा रहा है। अब हम जान गए हैं कि संक्रमण की टेस्टिंग करना और परीक्षण जारी रखना वास्तव में क्यों महत्वपूर्ण है? यह बड़ा सवाल बना हुआ है कि क्या हम एक नई महामारी की तरफ बढ़ रहे हैं?
संक्रमण से बचाव के लिए वैक्सीन
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वैक्सीन बनाने पर काम रह रहे हैं भारतीय वैज्ञानिक
दुनियाभर में बढ़ती इस संक्रामक बीमारी से बचाव को लेकर भारतीय विशेषज्ञों ने तैयारी भी शुरू कर दी है। भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के विशेषज्ञों की टीम बर्ड फ्लू वायरस के खिलाफ एक स्वदेशी वैक्सीन विकसित करने पर काम कर रही है। भारत की स्वास्थ्य अनुसंधान की शीर्ष एजेंसी के अनुसार, पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी में वायरस के स्ट्रेन उपलब्ध हैं। अब आईसीएमआर इस वैक्सीन को बनाने के लिए अन्य कंपनियों के साथ सहयोग करने पर विचार कर रही है।
संक्रमण से बचाव के लिए टीकाकरण
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इंसानों के लिए घातक हो सकता है संक्रमण
आईसीएमआर ने कहा, इंसानों में एच5एन1 संक्रमण के कारण मृत्यु दर बहुत अधिक है, 50% से अधिक लोगों की संक्रमण से मौत हो सकती है। हालांकि इंसानों में मामले काफी दुर्लभ हैं और आमतौर पर संक्रमित पक्षियों के सीधे संपर्क में आने से होते हैं। इसके लक्षण बुखार और सांस लेने में तकलीफ से लेकर कई अंगों के फेलियर तक हो सकते हैं।
अब तक इस खतरनाक संक्रमण से बचाव को लेकर कोई मान्यता प्राप्त वैक्सीन या लक्षित उपचार उपलब्ध नहीं है। संक्रमण के बढ़ते मामलों और संभावित महामारी के जोखिमों ने लोगों की चिंता और वैक्सीन की आवश्यकता दोनों को बढ़ा दिया है।
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स्रोत और संदर्भ
Second type of bird flu detected in US dairy cows
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