कोरोना का नया वैरिएंट हो सकता है खतरनाक
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वायरस में म्यूटेशन इसे बना रहा है चिंताजनक
अध्ययनों से पता चलता है कि वायरस में म्यूटेशन होना सामान्य प्रक्रिया है, लेकिन जब किसी वैरिएंट में बड़ी संख्या में बदलाव आते हैं तो वह पहले की तुलना में ज्यादा संक्रामक और इम्युनिटी को चकमा देने वाला हो सकता है। प्रारंभिक डेटा से संकेत मिलता है कि कोरोना के संक्रमण की रफ्तार फिलहाल तो ज्यादा नहीं है लेकिन कुछ लोगों में इससे ज्यादा खतरा हो सकता है।
- सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के अनुसार ये नया वैरिएंट अब तक 23 देशों में और अमेरिका के 25 स्टेट्स के सीवेज के पानी में भी पाया गया है।
- यूनाइटेड किंगडम (यूके) फिलहाल इससे सबसे अधिक प्रभावित माना जा रहा है।
अमेरिका में अभी ये कम स्तर पर फैल रहा है, हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना के शांत होने के बाद से दुनियाभर में टेस्टिंग भी कम कर दी गई थी, इसलिए हो सकता है कि यह जितना अभी पता है उससे कहीं ज्यादा फैला हुआ हो।
कोरोना से किसे ज्यादा खतरा
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किसे इस नए वैरिएंट से खतरा ज्यादा
वैज्ञानिकों का कहना है कि कोरोना की लहर शांत होने के बाद दुनियाभर में वैक्सीनेशन की दर भी काफी कम हो गई थी। इस वजह से ज्यादातर लोगों में आखिरी टीका लगे दो साल से ज्यादा का समय हो गया है। लोगों की वायरस के प्रति इम्युनिटी पहले जैसी नहीं है, ऐसे में जहां इसका प्रसार है वहां सभी आयु वालों में इसका खतरा हो सकता है।
- नया वैरिएंट सिकाडा वैसे तो सभी आयु वर्ग के लोगों को संक्रमित करने वाला हो सकता है, पर ये मुख्य रूप से बच्चों को प्रभावित करता दिख रहा है।
- हालांकि, यह बच्चों या बड़ों में कोई ज्यादा गंभीर बीमारी पैदा नहीं कर रहा है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि वायरस अपना वह पैटर्न तोड़ रहा है जिसमें ये मुख्य रूप से बुजुर्गों के लिए खतरा बना रहता था।
- यह ऐसी चीज है जिसका अध्ययन और जिसे समझना जरूरी है, ताकि इसके खतरों का अंदाजा लगाया जा सके।
कोरोना की वैक्सीन कितनी असरदार?
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क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
लीड्स यूनिवर्सिटी के वायरल ऑन्कोलॉजिस्ट प्रोफेसर स्टीफन ग्रिफिन कहते हैं, बच्चों में बढ़ते खतरे की वजह जॉइंट कमिटी ऑन वैक्सीनेशन एंड इम्यूनाइजेशन (जेसीवीआई) की 'दूरदर्शिता की कमी वाली' सलाह है, जिसमें बच्चों के लिए वैक्सीन को 'वैकल्पिक' रखने की बात कही गई थी।
पिछली लहरों के दौरान दोबारा संक्रमण होने और बच्चों में लॉन्ग कोविड के जोखिमों को ध्यान में नहीं रखा गया था। ऐसे में हमें यह याद रखना चाहिए कि अभी भी बहुत से लोग वैक्सीन से मिलने वाली सुरक्षा से वंचित हैं। ये वायरस पहले से ही वैक्सीन से बनी इम्युनिटी को चकमा देने वाला पाया गया है, ऐसे में खतरा और भी ज्यादा हो सकता है।
वैक्सीन कितनी असरदार?
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, माना जाता है कि मौजूदा वैक्सीन अभी भी कुछ हद तक सुरक्षा दे सकती है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि इस नए वैरिएंट को देखते हुए फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि इससे बेहतर सुरक्षा के लिए हमें वैक्सीन में कोई बदलाव करने की जरूरत है या नहीं?
यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के लेबोरेटरी मेडिसिन विभाग में इन्फेक्शियस डिजीज डायग्नोस्टिक्स डिवीजन के प्रमुख डॉ. एलेक्स ग्रेनिंगर कहते हैं, वायरल विकास के नजरिए से यह बहुत दिलचस्प है। मुझे नहीं लगता कि हमें इसके लिए किसी खास वैक्सीन की जरूरत पड़ेगी। पुरानी वैक्सीन इस नए वैरिएंट के खिलाफ प्रभावी हो सकती है।
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स्रोत:
Early Detection and Surveillance of the SARS-CoV-2 Variant BA.3.2 — Worldwide, November 2024–February 2026
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