कोविड वैक्सीन को लेकर नई गाइडलाइन
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) ने अपनी नई गाइडलाइंस में सभी लोगों के लिए कोविड-19 के टीके लगाने की सिफारिश पर रोक लगा दी है। टीका सलाहकार विशेषज्ञों के एक समूह ने हालिया गाइडलाइंस में कहा है कि अब सभी लोगों के लिए कोविड-19 के टीके जरूर नहीं हैं, ये लोगों के ऊपर निर्भर करता है कि वह टीके लगवाना चाहते हैं या नहीं।
सीडीसी ने कहा हमने सलाहकारों की सिफारिश को स्वीकार कर लिया है, जिसमें कहा गया है कि अब वार्षिक टीके सभी लोगों के लिए जरूरी नहीं हैं।
अमेरिकी स्वास्थ्य अधिकारियों ने संक्रामक रोग विशेषज्ञों की सिफारिशों के आधार पर 6 महीने और उससे ज्यादा उम्र के सभी लोगों के लिए सालाना कोविड-19 बूस्टर की सिफारिश की थी। इसका उद्देश्य कोरोनावायरस में लगातार हो रहे म्यूटेशन के खिलाफ लोगों की इम्युनिटी को मजबूत करना था।
कोरोना की सालाना वैक्सीन
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सभी लोगों को सालाना वैक्सीन की जरूरत नहीं
गौरतलब है कि जैसे-जैसे कोविड-19 महामारी कम हुई, विशेषज्ञों ने हर साल टीके की सिफारिशों को 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लोगों तक सीमित कर दिया था, जिनके अस्पताल में भर्ती होने या मृत्यु का खतरा अधिक हो सकता है। अब सालाना टीकाकरण को पूरी तरह से लोगों पर छोड़ दिया गया है।
सोमवार (6 अक्तूबर) को एक बयान में, स्वास्थ्य एवं मानव सेवा उप सचिव जिम ओ'नील ने कहते हैं, यह कहना कि कोरोना अब पूरी तरह से खत्म हो गया है, ये सही नहीं है हालांकि अब सभी लोगों को इसकी सालाना जरूरत भी नजर नहीं आती है। उच्च जोखिम समूह वालो लोग अपने डॉक्टर की सलाह पर टीकाकरण करा सकते हैं।
'कोविड के टीके उतने प्रभावी नहीं जितना माना जा रहा था'
इससे पहले हाल ही में वैज्ञानिकों की टीम ने एक अध्ययन में खुलासा किया था कि कोविड के टीके असल में उतने प्रभावी नहीं हैं, जितना कि दावा किया जा रहा था। 50 प्रतिशत टीकों का असर तेजी से कम होता देखा गया है।
अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि जापानी वैज्ञानिकों के नए शोध से संकेत मिलता है कि फाइजर और मॉडर्ना द्वारा बनाए गए एमआरएनए टीकों ने बेशक गंभीर बीमारियों को रोका, लेकिन प्रतिरक्षा सुरक्षा में उम्मीद से कहीं ज्यादा तेजी से गिरावट आई है।
कोविड वैक्सीन और कैंसर का लिंक
- फोटो : Adobe Stock Images
खतरनाक साइड इफेक्ट्स को लेकर भी होती रही है चर्चा
इससे इतर कोविड वैक्सीन्स को लेकर लंबे समय से सवाल भी खड़े होते रहे हैं। पहले कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि वैक्सीन लगवाने वाले लोगों में हृदय से संबंधित समस्याओं का जोखिम अधिक हो सकता है, हालांकि वैज्ञानिकों की एक अन्य टीम ने इन दावों को खारिज भी किया था।
एक हालिया रिपोर्ट में कोरियन वैज्ञानिकों ने अलर्ट किया है कि कोविड वैक्सीन कैंसर के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि वैक्सीन के प्रभावों पर लंबी अवधि की निगरानी जरूरी है। यह खतरा 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में सबसे ज्यादा देखा जा रहा है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने यह स्पष्ट नहीं किया है कि टीकों ने इस जोखिम को क्यों बढ़ाया होगा?
पूरी रिपोर्ट यहां पढ़ सकते हैं।
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स्रोत
CDC Immunization Schedule Adopts Individual-Based Decision-Making for COVID-19 and Standalone Vaccination for Chickenpox in Toddlers
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