आकर्षण का एलाइनमेंट : परिवार, दोस्त, सेहत और पेशा ये चार ऐसी चीजें हैं, जहां व्यक्ति को सबसे ज्यादा ध्यान या आकर्षण बनाए रखने की जरूरत होती है। डिजिटल जिंदगी में बहुत ज्यादा उलझ गए हैं, तो इन चारों पर ध्यान केंद्रित करें। खासतौर से मोबाइल पर इन चारों के अलावा और सभी तरह की चीजों से दूर रहें।
व्यस्तता नहीं, खुशी जरूरी : अक्सर लोगों को व्यस्त रहने पर बड़ा फख्र होता है, लेकिन यह बेहद बचकानी बात है। जरूरत से ज्यादा व्यस्त रहना दिखाता है कि जीवन में संतुलन नहीं है। व्यस्त रहना ज्यादा आसान है, बजाय वह करने के जो हमें असल में खुशी देता है। इसमें भी इंटरनेट और सोशल मीडिया व्यस्तता की आग में घी का काम करते हैं।
नोमोजोन : तमाम तरीकों के साथ यह भी एक तरीका है कि घर में कोई ऐसा कोना बनाएं, जहां पूरा परिवार एक साथ बैठे और उस जगह किसी भी तरह का कोई डिजिटल उपकरण न हो। अगर रोज यह करना संभव नहीं, तो कम से कम हफ्ते में एक दिन को नो मोबाइल डे जरूर बनाएं।
नींद से लंबी चैट
औसतन एक आदमी दिन में 200 बार फोन चेक करता है, यानी हर छह मिनट तीस सेकंड में फोन चेक करता है। मोबाइल रखने वाले करीब 70 फीसदी लोग ऐसे हैं, जिन्हें लगता है कि बिना मोबाइल और कंप्यूटर के उनके लिए एक दिन निकालना भी मुश्किल है।मोबाइल रखने वाले चार लोगों में से एक व्यक्ति ऐसा होता है, जो अपनी नींद की अवधि से ज्यादा समय के लिए मोबाइल या दूसरी डिजिटल स्क्रीन्स के संपर्क में रहता है।
16 से 24 वर्ष आयु के 70 फीसदी लोग कॉल कर बात करने के बजाय टेक्स्ट या चैट करना पसंद करते हैं। एक किशोर उम्र का मोबाइलधारक एक माह में औसतन 3400 मैसेज अपने बिस्तर पर लेटे हुए भेजता है।जरूरत से ज्यादा डिजिटल एक्सपोजर हमें थकाता है और हम थकान मिटाने के लिए भी डिजिटल तरीकों से मनोरंजन करते हैं। यह एक ऐसा विषैला चक्र बन जाता है, जिसकी आखिर में हमें लत लग जाती है।
डॉ. तचीकी डेविस
वेल बीइंग विशेषज्ञ, (बर्कले इंस्टीट्यूट ऑफ वेल बीइंग, कैलिफोर्निया)