मेंटल हेल्थ की समस्याएं
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भारतीयों में मेंटल हेल्थ की समस्या
'द अमाहा मेंटल हेल्थ रिपोर्ट 2026: अंडरस्टैंडिंग द जर्नी टू केयर इन इंडिया' नाम की इस रिपोर्ट के लिए 13,825 लोगों के डेटा का विश्लेषण किया गया। मेंटल हेल्थ को लेकर सामने आई इस रिपोर्ट के मुताबिक भारत में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना कर रहे आधे से ज्यादा लोग पेशेवर मदद लेने में एक साल से अधिक समय लगा देते हैं। इस दौरान कई लोगों की स्थिति इतनी गंभीर हो जाती है कि उनके मन में खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार तक आने लगते हैं।
- 56.2 प्रतिशत लोगों ने मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से इलाज लेने से पहले खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आने की बात कही।
- छात्रों में यह आंकड़ा 71.7 प्रतिशत और बेरोजगार लोगों में 64.7 प्रतिशत था।
- नौकरी करने वाले लोगों में 53.2 प्रतिशत ने ऐसे विचार आने की बात बताई।
मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं में डॉक्टरी मदद
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मानसिक परेशानी के बावजूद मदद नहीं लेते लोग
रिपोर्ट में सामने आया कि 53 प्रतिशत लोग मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियों का सामना करने के बावजूद औसतन एक साल से ज्यादा समय तक डॉक्टर के पास नहीं जाते। इनमें से केवल 11.3 प्रतिशत लोगों ने ही परेशानी शुरू होने के एक महीने के भीतर इलाज या विशेषज्ञ की सलाह ली।
- इससे पता चलता है कि भारतीयों में मानसिक स्वास्थ्य की समस्या महसूस होने और उसके लिए मदद लेने के बीच काफी लंबा अंतर हो सकता है। समय पर सहायता नहीं मिलने से लक्षणों के बढ़ने और इसके समय पर ठीक न होने की दिक्कत हो सकती है।
- इलाज शुरू करने से पहले 56 प्रतिशत लोगों ने खुद को नुकसान पहुंचाने के विचार आने की बात बताई।
- खुद को नुकसान पहुंचाने के विचारों को मेंटल हेल्थ की गंभीर समस्या के लक्षण के रूप में जाना जाता है, इससे आत्महत्या का खतरा बढ़ सकता है।
- रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 15.4 प्रतिशत लोगों ने पेशेवर मदद लेने से पहले स्ट्रेस-एंग्जाइटी को कम करने के लिए शराब या अन्य नुकसानदायक नशीले पदार्थों का इस्तेमाल किया था।
- 18 से 54 वर्ष आयु वाले पुरुषों ने महिलाओं की तुलना में ऐसे पदार्थों के इस्तेमाल की बात अधिक बताई।
स्ट्रेस-डिप्रेशन की समस्याओं का खतरा
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कई मानसिक परेशानियों का बोझ
रिपोर्ट के अनुसार, 94.9 प्रतिशत लोगों में एक ही समय में मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी दो या उससे अधिक परेशानियां होने की बात भी देखी गई। औसतन हर व्यक्ति ने करीब पांच तरह की समस्याओं का जिक्र किया। सबसे कुछ दिक्कतें बहुत आम थीं।
- 72.1 प्रतिशत लोगों ने एंग्जायटी की शिकायत की।इसमें किसी बात को लेकर जरूरत से ज्यादा चिंता, बेचैनी या लगातार आशंकित रहने की दिक्कत होती है।
- 67.5 प्रतिशत लोगों ने स्ट्रेस की शिकायत की। इसमें काम, पढ़ाई, रिश्तों या दूसरी परिस्थितियों के कारण मानसिक दबाव महसूस होता रहता है।
- 58.3 प्रतिशत लोगों ने अक्सर उदासी या मन खराब रहने की समस्या के बारे में बताया।
- 55.6 प्रतिशत लोगों ने रिश्तों और आपसी संबंधों में परेशानी, जबकि 54.1 प्रतिशत लोगों मूड में बार-बार बदलाव की समस्या के बारे में बताया।
खुद से मानसिक समस्याओं को सुलझाने की कोशिश
मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी परेशानियां होने पर करीब 55 प्रतिशत लोगों ने पहले दोस्तों या परिवार के सदस्यों से बात की थी। वहीं, 44.6 प्रतिशत लोगों ने खुद से अपनी परेशानी संभालने के तरीके अपनाए। इनमें 32.9 प्रतिशत लोग पहले भी थेरेपी यानी मनोवैज्ञानिक या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से बातचीत के जरिए मदद लेने की प्रक्रिया आजमा चुके थे। वहीं, 19.4 प्रतिशत लोगों को पहले दवाएं लिखी जा चुकी थीं।
इससे पता चलता है कि कई लोग पेशेवर मदद तक पहुंचने से पहले अपने स्तर पर या अपने करीबियों की मदद से समस्या सुलझाने की कोशिश करते हैं। हालांकि, लगातार परेशानी होने पर विशेषज्ञ से सलाह लेना जरूरी हो सकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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