कार्यस्थल का तनाव, सामाजिक अलगाव, अकेलापन और संवेदनहीनता ये चार शब्द आज दुनिया की एक ऐसी महामारी की पहचान हैं, जो न तो संक्रामक हैं और न ही दिखती हैं, लेकिन हर साल लाखों जिंदगियां निगल जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के ताजा अनुमानों के अनुसार दुनिया में एक अरब से अधिक लोग मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं और हर साल 7 लाख से अधिक लोग आत्महत्या करते हैं। मानसिक स्वास्थ्य अब केवल चिकित्सा का विषय नहीं रहा बल्कि एक वैश्विक संकट बन गया है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य कोई विशेषाधिकार नहीं, बल्कि मौलिक अधिकार है। इसके बावजूद अधिकांश समाजों में मानसिक बीमारियों को लेकर अब भी भ्रम, कलंक और शर्म का माहौल है। लोग बोलने से डरते हैं, सहायता लेने से हिचकते हैं और यही हिचक कई बार जीवन की आखिरी सीमा तक पहुंचा देती है। हर साल 7,27,000 से अधिक आत्महत्याएं होती हैं। 2030 तक आत्महत्याओं में 33% कमी का लक्ष्य रखा गया था, पर अब तक केवल 12% ही प्रगति हुई। दुनिया की 60% आबादी कार्यरत है यानी कार्यस्थल मानसिक स्वास्थ्य पर सबसे बड़ा प्रभाव डालने वाला क्षेत्र बन चुका है।
बीमारी कमजोरी नहीं, मानवीय स्थिति
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक स्वास्थ्य की दिशा में बात करना ही पहला उपचार है। समाज को यह समझना होगा कि यह बीमारी किसी की कमजोरी नहीं, बल्कि एक मानवीय स्थिति है।
- बोलिए, छिपाइए नहीं: मानसिक स्वास्थ्य पर वैसे ही चर्चा कीजिए जैसे किसी अन्य बीमारी पर करते हैं।
- सुनिए और सहारा दीजिए: किसी की बात सुनना ही कई बार उपचार का पहला कदम होता है।
- कार्यस्थलों पर मानसिक सुरक्षा नीति बने: जैसे फिजिकल सेफ्टी के नियम हैं, वैसे ही साइकोलॉजिकल सेफ्टी के नियम भी हों।
- बुजुर्गों के लिए सामाजिक सहायता केंद्र: ताकि वे अकेलेपन और उपेक्षा से बाहर निकल सकें।
- सरकारी निवेश बढ़े: मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं, प्रशिक्षित विशेषज्ञों और हॉटलाइन सुविधाओं के लिए समुचित बजट आवश्यक है।
मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत को मुख्यधारा में लाएं : मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर शुक्रवार को अपने संदेश में ऐसा माहौल बनाने पर जोर दिया, जहां मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत अधिक से अधिक मुख्यधारा में आए। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा, मानसिक स्वास्थ्य हमारे समग्र कल्याण का एक मूलभूत हिस्सा है। तेज गति से भागती दुनिया में यह दिन दूसरों के प्रति करुणा दिखाने और उसे बढ़ाने के महत्व को बताता है। पीएम ने लिखा, आइए हम सामूहिक रूप से ऐसा माहौल बनाने के लिए काम करें, जहां मानसिक स्वास्थ्य पर बातचीत ज्यादा से ज्यादा मुख्यधारा में आए। इस क्षेत्र में काम करने वाले और दूसरों को स्वस्थ होने और खुशी पाने में मदद करने वाले सभी लोगों को बधाई।