मेघालय में एचआईवी का खतरा
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मेघालय में बढ़ती चिंता
एचआईवी की रोकथाम से संबंधित जानकारियों के बारे में जानने से पहले मेघालय की स्थिति पर एक नजर डाल लेते हैं।
- स्वास्थ्य मंत्री डब्ल्यू शिला ने बताया कि अभी राज्य में एचआईवी से पीड़ित 10,293 लोग एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी ले रहे हैं।
- मंत्री ने कहा कि पिछले दस वर्षों में इस बीमारी से 749 मौतें हुईं।
- स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, एचआईवी और एड्स रोकथाम और नियंत्रण एक्ट के तहत गोपनीयता के नियम और सामाजिक कलंक बड़ी चुनौतियां हैं।
- एचआईवी स्टेटस को गोपनीय रखना होगा, बिना सहमति के टेस्ट नहीं किए जा सकते और हम लोगों को दवाएं लेने के लिए मजबूर भी नहीं कर सकते।
- सबसे बढ़कर, कलंक की भावना एक बड़ी भूमिका निभा रहा है जिसके कारण लोग टेस्टिंग के लिए आगे आने से डर रहे हैं।"
स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, सभी लोगों को ये जानना होगा कि एचआवी लाइलाज नहीं है, ये मौत की सजा जैसी नहीं है। इसे पूरी तरह से ठीक तो नहीं किया जा सकता है हालांकि इलाज के जरिए लोगों की क्वालिटी ऑफ लाइफ बेहतर की जा सकती है।
एचआईवी रोगियों के लिए असरदार दवा
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एचआईवी के लिए सिंगल डोज दवा
दुनियाभर में बढ़ते एचआईवी के जोखिमों और चुनौतियों के बीच रोगियों के लिए अच्छी खबर है। विशेषज्ञों की टीम ने एक कारगर और रोजाना ली जाने वाली दवा के बारे में जानकारी दी है जो इसके इलाज में काफी मददगार हो सकती है।
- इस टैबलेट में एचआईवी के इलाज की दो मौजूदा दवाएं, बिक्टेग्राविर और लेनाकापाविर (BIC/LEN) दोनों शामिल हैं।
- इस दवा के फेज-3 क्लिनिकल ट्रायल के बेहतर नतीजे देखे गए हैं।
द लैंसेंट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार इस ट्रायल में, जिसमें 15 देशों के 550 से ज्यादा एचआईवी संक्रमितों को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया है कि नया सिंगल-पिल एचआईवी वायरस को दबाने में बहुत असरदार था। जिन लोगों ने यह आसान तरीका अपनाया, उनमें से लगभग 96% लोगों में वायरल लोड कम पाया गया।
परीक्षण में देखे गए बेहतर परिणाम
इस नई दवा के ट्रायल में शामिल ज्यादातर लोग इलाज के तौर पर हर दिन दो से 11 गोलियां ले रहे थे। लगभग 40% लोगों को दिन में एक से ज्यादा बार इस तरह का एंटीरेट्रोवायरल उपचार लेना पड़ रहा था। कई लोगों को एचआईवी के साथ दूसरी स्वास्थ्य समस्याएं जैसे कार्डियोवैस्कुलर रोग या किडनी की बीमारी थी, जिसके कारण उन्हें रोजाना कई सारी दवाएं लेना पड़ रहा था।
अध्ययन में पाया गया है कि ये दवा, सिर्फ एक टैबलेट लेनी होती है जिससे न सिर्फ रोगियों को कई सारी दवाएं लेने को मजबूर होना पड़ता है साथ ही इसके कोई महत्वपूर्ण साइड-इफेक्ट्स भी नोटिस नहीं किए गए हैं।
- अध्ययन में शामिल प्रतिभागियों ने बताया कि ये नई दवा लेना ज्यादा आसान और सुविधाजनक था।
- शोधकर्ताओं का कहना है कि यह एचआईवी के साथ जी रहे बुजुर्गों, एचआवी ट्रीटमेंट के लिए पहले से रेजिस्टेंस डेवलप हो चुके लोगों, या जो एचआईवी दवा के साथ-साथ उम्र से जुड़ी हेल्थ प्रॉब्लम को मैनेज करने के लिए अतिरिक्त दवाएं ले रहे हैं, उनके लिए यह खास तौर पर फायदेमंद हो सकता है।
एचआईवी इंजेक्शन- लेनाकापेविर के बारे में जानिए
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लेनाकापेविर इंजेक्शन को लेकर जानकारी
एचआईवी की इस नई दवा के अलावा दूसरा बड़ा अपडेट जिम्बाब्वे से सामने आ रहा है। जिम्बाब्वे पहला ऐसा देश बन गया है जिसने एचआईवी के इलाज के लिए प्रभावी इंजेक्शन लेनाकापेविर दवा देना शुरू कर दिया है।
- लेनाकापेविर एचआईवी के लिए साल में दो बार लगने वाली पहली इंजेक्टेबल प्री-एक्सपोजर प्रोफिलैक्सिस (PrEP) है।
- ये रोजाना इलाज के लिए ली जाने वाली गोलियों का बहुत असरदार, लंबे समय तक असर करने वाला विकल्प है।
- विशेषज्ञों का कहना है कि साल में सिर्फ दो डोज काफी असरदार हो सकती है। इसकी प्रभावशीलता दर लगभग 99% देखी गई है।
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स्रोत
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