कई लोग जब तनाव में रहते हैं, तो वे अपनी सेहत पर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं। कई तो इस कदर डिप्रेस्ड हो जाते हैं कि खाना-पीना तक छोड़ देते हैं। इतना जान लें कि इस दुनिया में दुखी सिर्फ आप ही नहीं, बल्कि आप जैसे कई लोग भी हैं। लेकिन दुख से निपटने का यह तरीका कतई नहीं उचित ठहराया जा सकता है। एम्स के मनोरोग विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर डाॅ. राजेश सागर कहते हैं, ‘देेश में एक हजार में से सात व्यक्ति ऐसे हैं, जो तनाव में आकर नशीली चीजों की ओर उन्मुख होते हैं।
और इनमें अब महिलाएं भी शामिल होती जा रही हैं। नशीली चीजें शारीरिक स्वास्थ्य के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य को भी खराब करती हैं। इसलिए सेहत से खिलवाड़ कभी नहीं करें। इसके लिए चाहे लाख परेशानियां मुंह बाए क्यों न खड़ी हो, आप अपनी जीवनशैली को सेहतमंद बनाने की सोचें, जैसे नियत समय पर सोने आैर जागने के अलावा डाइट एक्सरसाइज और मेडीटेशन को भी जरूर शामिल करें।’
देश में सामाजिक पारिवारिक व्यवस्था तेजी से छिन्न भिन्न होने लगी है। संयुक्त परिवार की जगह एकल परिवार लेता जा रहा है। दादा-दादी या नाना-नानी का साथ अब बीते जमाने की बात होती जा रही है। प्रतिस्पर्धा और ज्यादा पैसे पाने की लालच में रिश्तों की परिभाषाएं बदलती जा रही है। संस्थागत पारिवारिक व्यवस्था प्रश्नों के घेरे में आती जा रही है। अधिक पैकेज के चलते घर छूटते जा रहे हैं।
चौंकाता है सर्वे
एक सर्वे के अनुसार, देश में हर दसवां व्यक्ति किसी न किसी प्रकार के मनोरोग से ग्रसित है। हर 40वें सेकंड में एक व्यक्ति आत्महत्या करते हैं। विश्व स्वास्थ्य का आकड़ा तो और भी चौंकाने वाला है। इस आंकड़े के अनुसार, दुनिया भर की एक चौथाई आबादी किसी-न-किसी मानसिक बीमारी की शिकार है।
इसमें से सिर्फ 40 प्रतिशत लोगों की बीमारी का पता चलता है और इनका इलाज हो पाता है। दुनिया भर में प्रतिवर्ष दस लाख लोग आत्म-हत्या करके अपनी जान गंवा बैठते हैं। मनोचिकित्सक डॉ. समीर मल्होत्रा के अनुसार, इन आत्म-हत्याओं की वजह है डिप्रेशन , जो कि बढ़ते-बढ़ते डिमेंशिया, एंग्जाइटी का कारण बनता है।