जो बुजुर्ग गुलाब, नींबू, पेंट के थिनर की महक को आसानी से पहचान सकते हैं, वे डिमेंशिया के खतरे से बाहर हैं। यूसी सैन फ्रांसिस्को के एक नए अध्ययन में यह बात सामने आई है। इस अध्ययन में 1800 प्रतिभागियों को शामिल किया गया। जिनकी उम्र 70 या उससे अधिक थी।
इन पर दस वर्षों तक अध्ययन किया गया। स्टडी में शामिल किए गए ये सभी प्रतिभागी डिमेंशिया (भूलने की बीमारी) से मुक्त थे। लेकिन अध्ययन के दौरान इनमें से 328 प्रतिभागियों (18 प्रतिशत) को डिमेंशिया ने अपनी चपेट में ले लिया।
दस वर्षों तक हुआ टेस्ट
‘द जर्नल ऑफ अल्जाइमर एसोसिएशन’ में प्रकाशित ‘अल्जाइमर एंड डिमेंशिया’ अध्ययन से पता चला है कि जिन लोगों का संवेदी स्तर अच्छा रहा उनमें डिमेंशिया या अल्जाइमर का खतरा काफी कम था। स्टडी में शामिल किए गए प्रतिभागियों के बुद्धिमत्ता की जांच की गई। स्टडी के अंत में 328 प्रतिभागियों में डिमेंशिया बीमारी का पता चला। इन मरीजों की सूंघने की शक्ति का परीक्षण किया गया। जिन प्रतिभागियों की सूंघने की क्षमता में 10 से 19 फीसदी की कमी आई वे डिमेंशिया की चपेट में आ सकते थे।
क्या है डिमेंशिया
डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित के दिमाग को नुकसान पहुंच सकता है और क्योंकि हमारे शरीर को हमारा मस्तिष्क ही नियंत्रित करता है। डिमेंशिया से ग्रस्त होने के बाद व्यक्ति अपने नियमित काम ठीक से नहीं कर पाता। उसकी याददाश्त भी कमजोर हो जाती है।