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Heart Disease: सामने आई युवाओं में बढ़ते हार्ट अटैक की बड़ी वजह, ज्यादातर लोगों का इसपर नहीं जाता ध्यान

Sat, 15 Mar 2025 01:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

हार्ट अटैक के बढ़ते जोखिमों के लिए मुख्यरूप से हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को प्रमुख माना जाता रहा है। लाइफस्टाइल-आहार और कई प्रकार की पर्यावरणीय स्थितियां इन जोखिम कारकों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।  एक हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने बताया कि बढ़ता प्रदूषण, विशेषकर ओजोन का स्तर युवा आबादी में हार्ट अटैक और हृदय से संबंधित स्वास्थ्य जटिलातओं को बढ़ाता जा रहा है।
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युवाओं में बढ़ते हृदय रोगों के मामले - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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हृदय स्वास्थ्य की समस्याएं वैश्विक स्तर पर बढ़ती जा रही हैं। कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। आंकड़ों से पता चलता है कि हर साल लाखों लोगों की हार्ट अटैक और हृदय से संबंधित कई अन्य समस्याओं के कारण मौत हो जाती है।

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साल 2023 में हृदय रोग वैश्विक स्तर पर मृत्यु का प्रमुख कारण बना रहेगा, जिसमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक सहित कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (सी.वी.डी.) से अनुमानित 17.9 मिलियन (1.79 करोड़) लोगों की मौतें हो गई। अध्ययनकर्ताओं ने चेताया है कि हृदय रोगों से मौत का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है, अगर हम सभी सावधान न हुए तो भविष्य इसके कारण ये आंकड़े और भी बढ़ सकते हैं।

हार्ट अटैक के बढ़ते जोखिमों के लिए मुख्यरूप से हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को प्रमुख माना जाता रहा है। लाइफस्टाइल-आहार और कई प्रकार की पर्यावरणीय स्थितियां इन जोखिम कारकों को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। एक हालिया अध्ययन में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि बढ़ता प्रदूषण, विशेषकर पर्यावरण में बढ़ता ओजोन का स्तर भी युवा आबादी में हार्ट अटैक और हृदय से संबंधित स्वास्थ्य जटिलातओं का बड़ा कारण हो सकता है।

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प्रदूषण का हृदय स्वास्थ्य पर असर - फोटो : Freepik.com
बढ़ते ओजोन के साथ हृदय की बढ़ रही हैं समस्याएं

जियोहेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार मौसम में बदलाव और बढ़ते ओजोन के स्तर के कारण हृदय से संबंधित समस्याओं का जोखिम पिछले एक दशक में काफी तेजी से बढ़ा है। 

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि जलवायु परिवर्तन और वैश्विक आबादी की उम्र बढ़ने के कारण भविष्य में हृदय संबंधी बीमारियों में और वृद्धि हो सकती है। ओजोन एक गैस है, जो फोटोकैमिकल स्मॉग का मुख्य घटक है। ओजोन प्रदूषण तब उत्पन्न होता है, जब अन्य प्रदूषक सूर्य के प्रकाश के संपर्क में आकर रासायनिक प्रतिक्रिया करते हैं।


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हृदय स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
अध्ययन में क्या पता चला?

अमेरिकी लोगों पर ये अध्ययन किया गया। इसमें 18 से 55 वर्ष की आयु के 2,322 मरीजों को शामिल किया गया जिनको पहले हार्ट अटैक हो चुका था। इनमें लगभग 70 फीसदी महिलाएं भी शामिल थीं। ये जानने के लिए कि ओजोन का क्या वास्तव में हार्ट पर असर होता है? शोधकर्ताओं ने मरीजों के घर के आसपास के ओजोन और पीएम 2.5 (2.5 माइक्रोमीटर या उससे छोटे सूक्ष्म कण) के स्तर की जांच की। 

शोध में पाया गया कि ओजोन के उच्च स्तर में रहने वाले लोगों में कुछ ही दिनों के भीतर हार्ट अटैक के जोखिम काफी बढ़ जाते हैं।

हृदय रोगों के कारण होने वाली गंभीर स्थितियां - फोटो : Freepik.com
हृदय की गंभीर समस्याओं का जोखिम

इसी तरह यूरोपियन सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी की एक रिपोर्ट कहती है कि जो लोग प्रदूषित वातावरण, विशेषतौर पर ओजोन के संपर्क में अधिक रहते हैं उनमें न सिर्फ हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है साथ ही उनके आईसीयू में भर्ती होने की घटनाएं भी अधिक देखी जाती रही हैं। 

चीन के शीआन जियाओटोंग विश्वविद्यालय में किए गए इस अध्ययन के लेखक प्रोफेसर शाओवेई वू कहते हैं, तीन साल के इस अध्ययन के दौरान देखा गया कि हृदय रोगों के कारण भर्ती होने वाले लोगों के अनुपात में वृद्धि के लिए ओजोन जिम्मेदार था। ऐसा माना जाता है कि जलवायु परिवर्तन, ओजोन के कारण हमारे संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता जा रहा है। ये आने वाले वर्षों में हृदय संबंधित बीमारियों के खतरे को और भी बढ़ाने वाली हो सकती है।


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हार्ट से संबंधित बीमारियों का बढ़ता जोखिम - फोटो : Freepik.com
प्रदूषण के कारण बढ़ती समस्याएं

हृदय रोगों के विशेषज्ञ कहते हैं, प्रदूषण का हृदय स्वास्थ्य पर अल्पकालिक और दीर्घकालिक दोनों तरह के दुष्प्रभाव हो सकते है। हवा में मौजूद सूक्ष्म कण पीएम 2.5, फेफड़ों और रक्तप्रवाह में चले जाते हैं। इससे न सिर्फ इंफ्लामेशन का खतरा होता है साथ ही गंभीर स्थितियों में इसके कारण हृदय रोग, हार्ट अटैक, स्ट्रोक, फेफड़ों की समस्याएं विकसित हो सकती हैं।

किसी भी प्रकार के सूक्ष्म कणों जैसे नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड के संपर्क के कारण समय के साथ क्रोनिक बीमारियों के बढ़ने का खतरा रहता है। 


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स्रोत और संदर्भ
Ozone exposure and cardiovascular disease: A narrative review of epidemiology evidence and underlying mechanisms


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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