लिवर कैंसर के दुनियाभर में बढ़ते मामले
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लिवर कैंसर मौत के प्रमुख कारणों में से एक
हांगकांग कैंसर इंस्टीट्यूट, चीन स्थित फुदान यूनिवर्सिटी के अलावा अमेरिका और यूरोप के अन्य संस्थानों के शोधकर्ताओं ने यह रिपोर्ट तैयार की है। टीम ने पाया कि मेटाबॉलिक समस्याओं ने लिवर कैंसर के जोखिमों को 35 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। इसका मु्ख्य कारण लिवर में अतिरिक्त वसा का जमाव होना है।
जर्नल ऑफ हेपेटोलॉजी में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, 46 देशों में कैंसर से होने वाली मौतों के शीर्ष तीन प्रकारों में से लिवर कैंसर एक है। इसका जोखिम साल-दर-साल बढ़ता ही जा रहा है।
लिवर से संबंधित गंभीर दिक्कतें
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लिवर कैंसर की रोकथामे पर क्या बोले विशेषज्ञ?
हांगकांग स्थित चाइनीज यूनिवर्सिटी में क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी विभाग के प्रोफेसर और इस अध्ययन के प्रमुख लेखक स्टीफन चैन ने कहा कि निष्कर्षों से पता चलता है कि वायरल हेपेटाइटिस, शराब और मोटापे जैसे जोखिम कारकों को रोकने के लिए अगर वैश्विक स्तर पर प्रयास शुरू कर दिए जाएं तो ये लिवर कैंसर को रोकने और जीवन बचाने का एक बड़ा अवसर प्रस्तुत कर सकते हैं। हालांकि गंभीर बात ये है कि ये तीनों ही जोखिम कारक काफी तेजी से बढ़ते जा रहे हैं जो गंभीर चिंता का विषय है।
लेखकों ने कहा कि फैटी लिवर की स्थिति के बढ़ते जोखिम के बारे में जागरूकता बढ़ाने की आवश्यकता है। विशेष रूप से अमेरिका, यूरोप और एशिया में मधुमेह और मोटापे से ग्रस्त लोगों पर ध्यान देने की आवश्यकता है क्योंकि ऐसे लोगों में भविष्य में खतरा अधिक हो सकता है।
अल्कोहल के कारण लिवर की बीमारियों का खतरा
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लिवर कैंसर के मामले और बढ़ने की आशंका
विशेषज्ञों ने कहा, बढ़ती आबादी और बढ़ते जोखिम कारकों चलते आने वाले वर्षों में वैश्विक स्तर पर लिवर कैंसर के मामलों में और वृद्धि होने की आशंका है। अध्ययनों से अनुमान लगाया गया है कि 2040 तक ऐसे मामलों में लगभग 55 प्रतिशत की वृद्धि हो सकती है।
रिपोर्ट में विशेषज्ञों ने कहा, "हमने अनुमान लगाया है कि कम से कम 60 प्रतिशत लिवर कैंसर को रोका जा सकता है, अगर समय रहते इसके जोखिम कारकों पर ध्यान देकर उन्हें नियंत्रित कर लिया जाए। हेपेटाइटिस बी-सी वायरस, मेटाबॉलिज्म की समस्या की रोकथाम और अल्कोहल जैसी आदतों पर खुद से रोक लगाने की आवश्यकता है।
हेपेटाइटिस डी और इससे कैंसर का जोखिम
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हेपेटाइटिस बी-डी तक सभी खतरनाक
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, क्रॉनिक हेपेटाइटिस बी और सी संक्रमण की स्थिति लिवर कैंसर के जोखिम को काफी बढ़ा सकती है। ये वायरस लिवर में दीर्घकालिक सूजन और क्षति पैदा कर सकते हैं, जिससे सिरोसिस और हेपेटोसेलुलर कार्सिनोमा हो सकता है, जो लिवर कैंसर का सबसे आम प्रकार है। इसके अतिरिक्त, हेपेटाइटिस डी संक्रमण के कारण भी लिवर कैंसर का खतरा बढ़ता हुआ देखा गया है।
हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन की अंतर्राष्ट्रीय कैंसर अनुसंधान एजेंसी (WHO-IARC) ने हेपेटाइटिस डी को घातक और कैंसरकारी घोषित किया है। "हर 30 सेकंड में हेपेटाइटिस से संबंधित गंभीर लिवर रोग या लिवर कैंसर के कारण एक व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है
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स्रोत
The Lancet Commission on addressing the global hepatocellular carcinoma burden: comprehensive strategies from prevention to treatment
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