एक अध्ययन के अनुसार 50 फीसदी से अधिक मरीज अपने डॉक्टरों को ईमानदारी से सारी परेशानियों की जानकारी नहीं देते हैं। अगर आप भी ऐसा करती हैं, तो इस आदत को बदल दें।
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शर्म, संकोच और डर। इन्हीं वजहों से ज्यादातर लोग डॉक्टर के पास जाकर झूठ बोलते हैं। वे अपने मर्ज की सही जानकारी डॉक्टर को नहीं देते हैं। दरअसल, डॉक्टर के सामने लोग यह समझ लेते हैं कि झूठ बोलने से डॉक्टर की डांट, कड़वी दवाइयों या फिर इंजेक्शन से बच जाएंगे। यह खुलासा हाल के एक अध्ययन से हुआ है। इस अध्ययन के अनुसार, 50 फीसदी मरीज डॉक्टर को ईमानदारी से अपनी परेशानियों के बारे में नहीं बताते हैं। नतीजतन, बीमारी कुछ और होती है और इलाज बेअसर हो जाता है। ऐसा करते हुए शायद वे भूल जाते हैं कि जानकारी छुपाकर वे अपने शरीर के साथ ही बेईमानी कर रहे हैं। इसका सीधा असर डायग्नोसिस और प्रिसक्रिप्शन पर पड़ता है। विशेषज्ञों का मानना है कि मरीज के झूठ बोलने से अच्छा है कि वे अपने डॉक्टर को हर समस्या साफ-साफ बताएं।
बिना डॉक्टर की सलाह के बाहरी दवा लेना जानलेवा साबित हो सकता है। झूठ बोलकर मरीज खुद का नुकसान कर लेते हैं। मरीजों को अपनी बीमारी का पूरा इतिहास डॉक्टर को खुलकर बताना चाहिए। बीमारी के बारे में समय से बताने से ज्यादा राहत मिलती है। उनके झूठ बोलने या छुपाने से बीमारी की स्थिति के बारे में पता नहीं चल पाता। इलाज में कोताही और समय पर दवाई नहीं लेने से इसका खामियाजा मरीज को ही भुगतना पड़ता है। डॉक्टर जब भी मरीज को दोबारा बुलाएं, तो उसे जाना चाहिए। चूंकि कई बार जरूरत के मुताबिक दवाओं की डोज कम करनी होती है, इसलिए समय से फॉलोअप जरूरी है। यदि किसी ब्रांड की दवा शरीर को फायदा पहुंचा रही हो, तो उसे नहीं बदलना चाहिए।
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कौन-सी जानकारी छुपाते हैं मरीज
ज्यादातर मरीज विटामिन टेबलेट, ड्रिंक करने, स्मोकिंग, बाहरी दवाओं, घरेलू उपचार के बारे में जानकारी नहीं देते। खाने-पीने, यौनाचार से होने बीमारियों के बारे में, व्यायाम के बारे में डॉक्टरों के सामने झूठ बोलकर बचने की कोशिश आपके लिए जोखिम भरी हो सकताी है। बिना डॉक्टरी परामर्श के यदि आप बाहर से कफ सिरप, हर्बल गोलियां ले रहे हैं और ये सारी जानकारी डॉक्टर से छुपा रहे हैं तो आप अपनी सेहत के लिए ही जोखिम मोल ले रहे हैं। चूंकि एंटासिड्स, मल्टीविटामिन, दर्द निवारक दवाएं जरूरत से ज्यादा लेने पर हृदय, किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचता है। कई बार डॉक्टर के पूछने पर भी लोग किसी प्रकार के धूम्रपान की लत की जानकारी नहीं देते हैं। लेकिन सच तो यह है कि अधिक स्मोकिंग कैंसर और हृदय रोग का कारण बन सकती हैै। दिन में पांच बार भी सिगरेट पीने पर खून का थक्का जमने और स्ट्रोक का खतरा रहता है। इसके अलावा तनाव दूर करने वाली दवा का सेवन करने पर रक्तचाप और ज्यादा हो जाता है।
डॉक्टर के सामने झूठ बोलने या बीमारी के लक्षण छुपाने के पीछे कई कारण हैं। हम पहले ही सोच लेते हैं कि खान-पान में अनियमितता, स्मोकिंग और शराब पीने की लत, यौन संबंधी रोग, बुरी आदतें, बच्चे को खुद दूध न पिलाने जैसी बात डॉक्टर के सामने करने पर फटकार लगेगी। कई बार शर्मिंदगी की वजह से डॉक्टर के सामने मरीज झूठ बोलते हैं। यहां तक कि डॉक्टर द्वारा दी गई दवाइयों का कोर्स पूरा करने की झूठी जानकारी भी लोग उसे दे देते हैं, जिसकी एक वजह डांट पड़ना भी है। कई लोग भूलवश भी बीमारी के लक्षणों के बारे में डॉक्टर को सही जानकारी नहीं दे पाते और पूरी बात कहे बगैर प्रिसक्रिप्शन लेकर घर चले आते हैं। कुछ लोग पूरी जानकारी देना फालतू समझते हैं। उन्हें यह भी भय होता है कि ज्यादा जांच से कैंसर और ब्रेन ट्यूमर जैसी गंभीर बीमारी सामने आ सकती है।
आजकल तो लोग इंटरनेट से जानकारी लेकर खुद से भी दवाइयां लेने लगते हैं, जिसकी जानकारी डॉक्टर को नहीं दी जाती। लेकिन यह जरूर ध्यान रखें कि ऐसा झूठ जान के लिए घातक साबित हो सकता है। इसलिए डॉक्टर को सब कुछ सही-सही बताना बहुत जरूरी है। इसलिए डॉक्टर से मिलने के पहले संक्षिप्त नोट बना लें। समय से विशेषज्ञ से मिलकर दिल खोल कर अपनी परेशानी बताएं। चिकित्सक की सलाह के मुताबिक दवाओं का कोर्स पूरा करें। डॉक्टर आपकी बीमारी को गोपनीय रखते हैं, इसलिए किसी भी तकलीफ के बारे में खुलकर कहें। यदि उपचार महंगा लग रहा है, तो उसका विकल्प तलाशें। इंटरनेट की जानकारी पर ज्यादा भरोसा न करें।