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गांधी जयंती 2018: महात्मा गांधी की सेहत का राज थीं ये 6 चीजें, पढ़ें और आप भी रहें फिट

Tue, 02 Oct 2018 11:27 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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महात्मा गांधी
आज राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की 150वीं जयंती है। इस खास मौके पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है।वैसे तो बापू के बारे में हर व्यक्ति ने बहुत कुछ पढ़ा और सुना होगा। बावजूद इसके कई ऐसी बातें हैं जिनसे आप अब तक अनजान होंगे।इन्हीं चीजों में एक है बापू की सेहत से जुड़े कई अहम सवाल। देश का कोई भी व्यक्ति यह जानना चाहता होगा कि बापू उम्र के उस दौर में भी खुद को इतना फिट कैसे बनाए रखते थे।गांधी जयंती के मौके पर जानते हैं आखिर बापू की सेहत के पीछे का राज क्या था। बापू का मानना था कि अंहिसा सिर्फ मानवता की रक्षा के लिए जरूरी नहीं है। बल्कि इससे उम्र भी लंबी होती है। इसके पीछे का तथ्य यह है कि शांत स्वभाव के व्यक्ति को हाइपरटेंशन और दिल की बीमारी नहीं होती है।
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समय से सोना और उठना
जल्दी सोना और जल्दी उठना महात्मा गांधी की आदत में शुमार था। यूं तो बापू चार से पांच घंटे ही सोया करते थे लेकिन उठते वो हमेशा सूर्य उदय से पहले ही थे। आज के दौर में भी युवाओं को अच्छी सेहत बनाए रखने के लिए बापू की यह आदत अपनानी चाहिए। 

 
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व्रत रखने से सेहत में आता है सुधार
महात्मा गांधी मानते थे कि अच्छी सेहत के लिए व्रत रखना चाहिए। आयुर्वेद के अनुसार भी व्यक्ति को हफ्ते में एक बार व्रत जरूर रखना चाहिए। ऐसा करने से पेट साफ रहने के साथ शरीर की चर्बी भी कम होती है। 
 

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शराब-तंबाकू से दूरी
महात्मा गांधी शराब और तंबाकू दोनों ही चीजों से दूरी बनाए रखने की सलाह देते थे। तंबाकू फेफड़ों का कैंसर, दिल की बीमारी,  हाई ब्लड प्रेशर जैसी बीमारियों का कारण बन सकता है। इतना ही नहीं इसकी वजह से शरीर के शुगर लेवल में भी बढ़ोतरी हो सकती है। 

 
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योग और ध्यान
महात्मा गांधी नियमित तौर पर योग और ध्यान किया करते थे। मेडिटेशन करने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में सहायता मिलती है। 
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महात्मा गांधी
सकारात्मक सोच
महात्मा गांधी का मानना था कि जैसी हमारी सोच होगी उसका वैसा ही असर हमारी सेहत पर भी पड़ेगा। बापू कहते थे कि सकारात्मक सोच सिर्फ हमारी सोच ही ठीक नहीं रखती बल्कि काम करने की क्षमता को भी बढ़ती है।

 
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पैदल चलें
महात्मा गांधी की ऊर्जा और ताकत के पीछे उनके पैदल चलने की आदत शामिल थी। पैदल चलने से न सिर्फ आपकी ऊर्जा की क्षमता में वृद्धि होती है बल्कि इससे व्यक्ति के शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ती है।  
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