जानवरों से इंसानों में फैलाने वाला संक्रमण
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दो नए वायरस को लेकर अलर्ट
यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा के वैज्ञानिकों ने पूरी दुनिया को एक नई महामारी के खतरे को लेकर सावधान किया है। विशेषज्ञों ने कहा, जानवरों से आए दो नए वायरस अभी तक लोगों की नजर में ज्यादा नहीं आए हैं, लेकिन अध्ययनों में इनकी प्रकृति को देखकर लगता है कि ये भविष्य में महामारी और पैनडेमिक का खतरा पैदा कर सकते हैं।
टीम ने कहा, इन्फ्लूएंजा डी वायरस और कैनिन कोरोनावायरस दोनों बड़ी चिंता के रूप में देखे जा रहे हैं। इनको लेकर बेहतर निगरानी, डायग्नोस्टिक्स और इलाज की खोज तेज करने की जरूरत है।
दोनों ही वायरस जानवरों के माध्यम से फैलने वाले माने जा रहे हैं। इंसानों में इसका प्रसार काफी तेजी से होने की आशंका है, जिसको लेकर पूरी दुनिया को पहले से ही सावधान हो जाने की जरूरत है ताकि कोरोनावायरस के संक्रमण जैसा दौर फिर से न आने पाए।
दोनों वायरस इंसानों के लिए हो सकते हैं खतरनाक
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वैज्ञानिकों ने नई महामारी को लेकर किया सावधान
जर्नल इमर्जिंग इन्फेक्शियस डिजीज में प्रकाशित इस रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने अलर्ट किया है कि कोरोनावायरस की ही तरह से ये दोनों वायरस भी इंसानों में श्वसन समस्याओं को बढ़ाने वाली प्रवृत्ति के हो सकते हैं।
फ्लोरिडा यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ पब्लिक हेल्थ एंड हेल्थ प्रोफेशन में एनवायरनमेंटल एंड ग्लोबल हेल्थ डिपार्टमेंट के प्रोफेसर जॉन लेडनिकी कहते हैं, हमारी समीक्षा से पता चलता है कि ये दोनों वायरस इंसानों के लिए सांस की बीमारी का खतरा पैदा करते हैं।
- चूंकि इन वायरस के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं है, इसलिए इससे होने वाले संक्रमण की रोकथाम और इलाज के लिए अभी बहुत कम काम किया गया है।
- अगर ये वायरस एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में आसानी से फैलने की क्षमता विकसित कर लेते हैं, तो ये महामारी फैला सकते हैं।
- ज्यादातर लोगों में इनके प्रति इम्युनिटी नहीं होगी, ऐसे में ये वायरस न सिर्फ तेजी से बढ़ सकते हैं बल्कि गंभीर स्वास्थ्य संकट भी पैदा करने वाले हो सकते हैं।
इन्फ्लूएंजा-डी वायरस का संक्रमण
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इन्फ्लूएंजा-डी वायरस के बारे में जान लीजिए
इन्फ्लूएंजा-डी वायरस को सुअरों और गायों में संक्रमण से जुड़ा हुआ पाया गया है। लेकिन यह कई अन्य पालतू जानवरों और जंगली जानवरों की प्रजातियों में भी देखा जा चुका है।
- साल 2011 में पहली बार इन्फ्लूएंजा-डी वायरस की खोज की गई थी।
- विशेषज्ञों की आशंका है कि ये बोवाइन रेस्पिरेटरी डिजीज का कारण बन सकता है, जिसके कारण सार्वजनिक स्वास्थ्य को खतरा हो सकता है।
- सुअरों और गायों के अलावा हिरण, जिराफ और कंगारू जैसे जंगली जानवरों में भी इस वायरस की पुष्टि की गई है।
- चीन में हाल ही में इन्फ्लूएंजा-डी वायरस के एक स्ट्रेन को इंसान से इंसान में फैलने की क्षमता वाला भी पाया गया है।
फ्लोरिडा में मवेशी श्रमिकों पर पिछले अध्ययनों में पाया गया कि 97% लोगों में इन्फ्लूएंजा-डी वायरस के एंटीबॉडी थे, जिससे पता चलता है कि श्रमिकों को पहले ये संक्रमण हो चुका होगा। अब तक, ये संक्रमण सबक्लिनिकल माने जाते हैं, जिसका मतलब है कि इससे बीमारी के लक्षण पैदा नहीं हुए। हालांकि अब वैज्ञानिकों का कहना है कि इन्फ्लूएंजा-डी वायरस में तेजी से विकसित होने वाले वायरस के लक्षण हैं और ये गंभीर रोग भी पैदा कर सकता है।
श्वसन संक्रमण और इसका जोखिम
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कैनिन कोरोनावायरस और इसका खतरा
इसी तरह कैनिन कोरोनावायरस या CCoV कुत्तों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल बीमारी पैदा करने वाला माना जाता है। हालांकि यह SARS-CoV-2 वायरस जैसा नहीं है, जो COVID-19 का कारण बनता है। इंसानों में कैनिन कोरोनावायरस संक्रमण के मामले हालांकि अभी भी दुर्लभ हैं, लेकिन दक्षिण पूर्व एशिया में इसके जोखिम देखे गए हैं।
यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की टीम ने 2017 में एक व्यक्ति में कैनिन कोरोनावायरस की आशंका जताई थी। यात्रा के बाद में उसे हल्का बुखार और बेचैनी महसूस हुई थी। टीम ने इस स्ट्रेन का नाम HuCCoV_Z19Haiti रखा था।
- यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्सास में ग्रेगरी ग्रे, एम.डी. के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने 2021 में एक नए कैनिन कोरोनावायरस स्ट्रेन, CCoV-HuPn-2018 की खोज की रिपोर्ट दी।
- इस स्ट्रेन को मलेशिया में अस्पताल में भर्ती एक बच्चे में देखा गया था। यह यूनिवर्सिटी ऑफ फ्लोरिडा की टीम द्वारा खोजे गए कैनिन कोरोनावायरस के लगभग समान था।
- CCoV-HuPn-2018 थाईलैंड, वियतनाम और कई अन्य हिस्सों में रहने वालों में श्वसन संबंधी बीमारी फैलाने वाला पाया गया है। हालांकि अभी भी इस वायरस के बारे में विस्तार से समझना बाकी है।
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स्रोत:
Scientists say these two viruses may become the next public health threats
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