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क्या उम्रदराज महिलाओं के लिए नार्मल प्रेग्नेंसी से बेहतर है आईवीएफ?

Tue, 11 Sep 2018 09:31 AM IST
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महिला जिसने जीवन के सारे सुखों को जी लिया हो उसके बाद भी एक अहसास ऐसा होता है जिससे अगर वह महरूम रह जाये तो जीवन सूना सा लगता है, यह अनमोल अनुभव है मातृत्व। करियर की अंधी दौड, देरी से शादी, शारीरिक विकार या देरी से फैमिली प्लानिंग से महिलाओं का एक बड़ा वर्ग संतान प्राप्ति से दूर रहा जाता है। ज्यादातर महिलाओं में यह गलत फहमी होती है कि वे किसी भी उम्र में नेचुरली माँ बन सकती है। महिला की प्रजनन क्षमता से उम्र का बड़ा संबंध है। 35 वर्ष की उम्र के बाद महिला के प्राकृतिक गर्भधारण की संभावनाएं कम होती जाती है क्योंकि इस उम्र के बाद से अंडों की क्वालिटी और संख्या में कमी होने लगती है और अगर गर्भधारण हो भी जाये तो गर्भपात होने का डर रहता है। काफी प्रयासों के बाद भी गर्भधारण नहीं होना या गर्भपात हो जाने से महिला तनाव में रहने लगती है जिससे परिवार में दूरियां बढ़ने लगती हैं। वे महिलाएं जो उम्रदराज हैं और संतान चाहती हैं उनके नेचुरल प्रेगनेंसी की तुलना में आईवीएफ अधिक लाभदायक है।

आंकडों पर ध्यान दें तो 40 से 44 उम्र की महिलाओं की गर्भधारण की क्षमता काफी कम होकर 10 प्रतिशत से भी कम रह जाती है। इस उम्र तक महिला के माहवारी अनियमित या बंद हो जाती है जिसके बाद प्रेगनेंसी मुश्किल होती है। ऐसी स्थिति में महिला के लिए आईवीएफ ट्रीटमेंट के बारे में जानना और अपनाना बेहद जरूरी है क्योंकि यह एकमात्र उपाय है जो उसकी जिंदगी में खुशियों को जन्म दे सकता है।

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क्या अंतर है प्राकृतिक प्रेगनेंसी और आईवीएफ प्रक्रिया में -

आईवीएफ यानि इन विट्रो फर्टिलाईजेशन इसे टेस्ट ट्यूब बेबी नाम से भी जाना जाता है। यह तकनीक उन कपल्स के लिए वरदान साबित हो रही है, जो किसी करण से प्राकृतिक रूप से माता- पिता बनने में असमर्थ हैं या प्रेगनेंसी के बाद गर्भपात हो जाता है। इंदिरा आईवीएफ के दिल्ली के पटेल नगर सेंटर में चीफ इनफर्टिलिटी एंड आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉ. अरविन्द वैद बताते है सामान्य गर्भधारण में महिला के अण्डाशय से एक परिपक्व अंडा फूट कर बाहर फैलोपियन ट्यूब में आता है इस दौरान संभोग होने से पुरूष के वीर्य में मौजूद शुक्राणुओं में से एक शुक्राणु अंडे में प्रवेश कर जाता हैं, जिससे निषेचन की प्रक्रिया पूरी हो जाती है यानि भ्रूण बन जाता है। दो-तीन दिन तक यहीं पर भ्रूण का विकास होता है इसके बाद भ्रूण गर्भाशय की लाईनिंग पर चिपक जाता है और जन्म तक भ्रूण के विकसित होने की प्रोसेस यहीं पर होती है ।

उम्र अधिक होने या किसी कारण से महिला में इस सामान्य प्रक्रिया से प्रेगनेंसी नहीं हो पा रही है तो उसे आईवीएफ तकनीक का सहारा लेना चाहिए। आईवीएफ में महिला की फैलोपियन ट्यूब में होने वाली गर्भधारण को प्रारम्भिक प्रक्रिया को लेब में किया जाता है। महिला को दवाइयां और इंजेक्शन देकर उसके शरीर में सामान्य से अधिक अंडे बनाये जाते हैं, अंडे की संख्या और क्वालिटी पर नजर रखी जाती है ताकि अच्छी क्वालिटी के अण्डों का निर्माण किया जा सके। इन अण्डों को पतली सुई की मदद से शरीर से बाहर निकाल लिया जाता है इसमें महिला को कुछ समय के लिए बेहोश किया जाता है फिर पति के शुक्राणुओं से लेब में अण्डों को निषेचित किया जाता है। आईवीएफ में एक से अधिक अण्डे निषेचन के लिए रखे जाते हैं ताकि सफलता की संभावना अधिक रहे। आईवीएफ प्रक्रिया के तहत बने भ्रूणों का चयन कर अच्छे भ्रूण को महिला के गभाशय में इंजेक्ट किया जाता है। इस प्रकार फैलोपियन ट्यूब का काम लेब में किया जाता है । आईवीएफ एक सुरक्षित प्रक्रिया है जिसका लाभ लाखों निःसंतान दम्पतियों को मिल रहा

है

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अधिक उम्र में आईवीएफ क्यों बेहतर –

इंदिरा आईवीएफ के गाजियाबाद सेंटर में गाइनकोलॉजिस्ट एंड आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर पूजा सिंह का कहना है कि अधिक उम्र में आईवीएफ इसलिए बेहतर है क्योंकि किसी भी महिला में जन्म के समय ही उसके शरीर में अण्डों की संख्या निर्धारित होती है, उम्र के साथ धीरे-धीरे अण्डों की संख्या कम होती जाती है। सामान्यतया 20 से 30 वर्ष की आयु गर्भधारण के लिए सबसे अच्छी मानी जाती है क्योंकि इस आयु वर्ग में अण्डों की संख्या और गुणवत्ता उत्तम होती है। इसके बाद अण्डों में खराबी आना शुरू हो जाती है और नेचुरली गर्भधारण में समस्या आती है। अधिक उम्र में गर्भधारण हो भी जाये तो गर्भपात या फिर भ्रूण में विकार या फिर जन्म के बाद बच्चे में किसी तरह की शारीरिक समस्या होने का खतरा रहता है लेकिन अधिक उम्र में भी सुरक्षित तरीके से संतान की इच्छा को पूरा करने के लिए आईवीएफ बेहतरीन जरिया है।


 

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माहवारी बंद होने के बाद क्या करें -
इंदिरा आईवीएफ के मेरठ सेंटर में गाइनकोलॉजिस्ट एंड आईवीएफ स्पेशलिस्ट डॉक्टर तुषिता जैन बताती है जिन महिलाओं की माहवारी बंद हो गयी है उनके प्राकृतिक तरीके से गर्भधारण की संभावनाएं खत्म हो जाती है लेकिन आईवीएफ तकनीक से बंद माहवारी में भी मातृत्व को प्राप्त किया जा सकता है। बंद महावारी को दवाईयों के जरिये वापस शुरू किया जाता है और डोनर एग/ आईवीएफ का सहारा लिया जा सकता है।

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एग फ्रिजिंग - जो महिलाएं शादी के कुछ वर्षों बाद संतान चाहती हैं वे अधिक उम्र में भी अपने अण्डों से माँ बन सकती हैं । कम उम्र में महिला अपने अण्डों को फ्रीज करवा सकती हैं। क्योंकि उस समय अण्डों की क्वालिटी अच्छी होती है और बाद में जब चाहें तब आईवीएफ तकनीक से गर्भधारण कर सकती है। एग फ्रिजिंग में अण्डों को वर्षों तक सुरक्षित रखा जा सकता है।

प्राकृतिक रूप प्रेगनेंसी नहीं होने के साथ अधिक उम्र और नसबंदी के बाद संतान चाहने वाली महिलाओं के लिए भी आईवीएफ तकनीक कारगर है। यह सुरक्षित होने के साथ सरल है और इसकी सफलता दर भी अधिक है।

निःसंतानता से जुड़ा आपका कोई भी सवाल है तो इन्दिरा आईवीएफ कि वेबसाइट विजिट करे www.indiraivf.com, अपनी समस्या लिखें या एक्सपर्ट डॉ. से बात करने के लिए कॉल करें - 07229944449

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