ऑफिस में काम करना आसान नहीं है। तरह-तरह के लोगों से आपका वास्ता पड़ता है।
कुछ लोग अगर दोस्ती करने लायक मिलते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी मिलते हैं जो अक्सर आपके गुस्से का सबब बनते हैं।
गुस्सा आने पर आपका दिल चाहता है जितनी शिद्दत से आप चीख चिल्ला कर अपना गुस्सा निकाल सकते हैं निकाल लें। लेकिन अफसोस आप ऐसा भी नहीं कर सकते। क्योंकि ये ऑफिस की तहजीब के खिलाफ है। यहां तो आपको शांत और संयमित रहना पड़ता है।
हां बहुत गुस्सा आने पर झुंझला कर लोगों को जवाब दे सकते हैं। लेकिन वो भी एक हद तक। आपको अपने क्रोध पर काबू रखना ही पड़ता। अगर ऐसा नहीं करेंगे तो हो सकता है आपको नौकरी से हाथ ही धोना पड़ जाए।
ब्रिटिश मनोचिकित्सक लूसी बेरेसफोर्ड कहती हैं कि हमारे साथ काम करने वाले करीब 83 फीसद कर्मचारी ऑफिस में गुस्से का शिकार होते हैं।
कुछ लोग अगर दोस्ती करने लायक मिलते हैं तो कुछ लोग ऐसे भी मिलते हैं जो अक्सर आपके गुस्से का सबब बनते हैं।
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कुछ इसी तरह के आंकड़े अन्य रिसर्च में भी पाए गए हैं। अपना गुस्सा निकालने के लिए जब किसी पर वश नहीं चलता तो ऑफिस के कंप्यूटर, प्रिंटर या अपने से कमजोर कर्मचारियों पर अपनी नाराजगी निकालने लगते हैं।
ये समस्या किसी एक देश की नहीं है। बल्कि कमोबेश हर देश में लोग इस परेशानी से जूझते हैं। इसीलिए ऐसे तरीके तलाशे जा रहे हैं जिनके जरिये आप अपना गुस्सा भी बाहर निकाल सकते हैं और नौकरी में भी बने रह सकते हैं।
इसी साल मार्च महीने में ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न में एड हंटर नाम के शख्स ने 'द ब्रेक रूम' नाम से एक हॉल बनाया। लोग यहां आकर लोग अपना गुस्सा निकाल सकते हैं।
लेकिन इसके लिए आपको अपनी जेब हल्की करनी होगी। यहां बेस बॉल बैट लेकर आप चीजों के साथ तोड़-फोड़ कर सकते हैं और अपनी नाराजगी खत्म कर सकते हैं।
हमें बचपन से ये सिखाया जाता है कि चीजें नहीं तोड़नी चाहिए क्योंकि उनके टूटने के बाद फिर से खरीदना पड़ेगा। पैसे बेवजह खर्च होंगे। लेकिन इस 'रेज रूम' में या गुस्से वाले कमरे में आकर आप बेधड़क कोई भी चीज तोड़ सकते हैं। जिसके पैसे आपने दिये हैं। आपका गुस्सा भी निकल जाएगा और मजेदार खेल भी हो जाएगा।
गुस्सा निकालने वाले कमरों में वक्त बिताने के लिए ग्राहकों को कई तरह के पैकेज भी दिये जाते हैं
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जुलाई 2015 में स्टीपन श्यू नाम के एक शख्स ने कनाडा के टोरंटो में बैटल स्पोर्टस नाम से एक रेज रूम खोला था। स्टीफन कहते हैं कि गुस्सा निकालने के लिए लोगों को दफ्तर का सामान तोड़ने में काफी मजा आता है। जैसे प्रिंटर या कंप्यूटर क्योंकि ये दफ्तर की नुमाइंदगी करते हैं। इसी का फायदा उठाने के लिए स्टीफन ने बैटल स्पोर्ट्स नाम से कंपनी खोली है।
ये रेज रूम धीरे-धीरे सारी दुनिया में बढ़ते जा रहे हैं। हंगरी की राजधानी बुडापेस्ट में रेज रूम खुला है। वहीं, अमरीका के टेक्सस और डलास शहरों में भी ये गु़स्सा निकालने वाली जगहें बनाई जैसे ह्यूस्टन में ''टैंट्रम एलएलसी'' या जैक्सनविल का स्मैश शैक।
लेकिन यहां आने वाले ग्राहकों को एक डिस्कलेमर साइन करना पड़ता है। साथ ही चेहरे पर एक नकाब और हाथों में दस्ताने पहनने पड़ते हैं। ये सब ग्राहकों की हिफाजत के लिए ही किया गया है।
ऐसे गुस्सा निकालने वाले कमरों में वक्त बिताने के लिए ग्राहकों को कई तरह के पैकेज भी दिये जाते हैं। जैसे 10 से 45 मिनट अगर रेज रूम में बिताने हैं तो उसके लिए आपको 20 डॉलर से लेकर 100 डॉलर तक खर्च करने होंगे। बहुत से लोग लंबे वक्त के लिए बुकिंग भी करते हैं। साथ ही वो उस सामान की बुकिंग भी करते हैं जिसे पर वो अपना गुस्सा निकालना चाहते हैं।
ऑस्ट्रेलिया में काम का दबाव यहां कंपनी के मालिक और कर्मचारी दोनों के लिए ही फिक्र की बात बन गई है। 2013 में सेफवर्क ऑस्ट्रेलिया नाम की एक संस्था ने एक सर्वे किया था। जिसके मुताबिक, कर्मचारियों के गुस्से की वजह से ऑस्ट्रेलिया को करीब दस अरब ऑस्ट्रेलियन डॉलर का नुक़सान उठाना पड़ता है।
बैटल स्पोर्ट्स के स्टीफन श्यू का कहना है लोगों को प्रिंटर पर गुस्सा निकालना शायद ज़्यादा पसंद हैं। तभी तो उनके बैटल रूम में हफ्ते भर में करीब 15 प्रिंटर इसका शिकार होते हैं। स्टीफन के मुताबिक उनके सत्तर फीसद ग्राहक महिलाएं होती हैं।
गुस्से में कुछ भी नहीं करना ज्यादा बेहतर तरीका है
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बैटल स्पोर्टस रेज रूम में आने वालों की संख्या अच्छी खासी है। यहां किसी खास उम्र के लोग ही नहीं आते हैं बल्कि 19 साल के बच्चों से लेकर 50 साल से ज़्यादा की उम्र के लोग भी आते हैं। ब्रेक रूम में जो ग्राहक आते हैं उनमें ज्यादातर पेशेवर लोग हैं।
यूं तो ऐसे रेज रूम की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है। पर कुछ मनोवैज्ञानिक इसे सही नहीं मानते। अमरीका की ओहायो यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर ब्रैड जे बुशमैन का कहना है चीजों पर गुस्सा निकालना, कोई अच्छी बात नहीं है।
बल्कि गुस्से में कुछ भी नहीं करना ज्यादा बेहतर तरीका है। जब आपको गुस्सा आता है तो आपका ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है, दिल की धड़कन बढ़ जाती है। और जब चीजों को तोड़कर गुस्सा निकालते हैं तो गुस्सा उससे कम नहीं होता बल्कि बढ़ जाता है। गुस्से की आदत बनी रहती है। जिस बात की वजह से गुस्सा आया होता है वो बात आपके जेहन से नहीं निकलती।
गुस्से पर काबू पाने का बेहतर तरीका ये है कि जब भी गुस्सा आए तो खुद को ऐसे काम में व्यस्त कर लें जिससे आपको खुशी मिले। एक से दस तक गिनती गिनकर, या गहरी सांस लेकर भी नाराजगी को नियंत्रित किया जा सकता है।
आप कोई मजाकिया फिल्म या कार्टून देख सकते हैं। जिससे आपका मूड बदलेगा। आप अपना पसंदीदा संगीत भी सुन सकते हैं। गुस्सा आने पर आप कोई पहेली हल करने का काम भी शुरू कर सकते हैं। इससे ध्यान बंटेगा। जिस वजह से गुस्सा आ रहा हो, उसके बारे में नए नजरिए से सोचने की कोशिश भी आप कर सकते हैं।
स्टीफन श्यू का भी यही कहना है। रेज रूम आपके गुस्से को निकालने का एक तरीका हो सकता है लेकिन ये स्थाई इलाज नहीं है। ये सिर्फ एक विकल्प है।