अरब यात्री इब्न बतूता ने भारत में चखा समोसा
प्रसिद्ध सूफी संत अमीर खुसरो ने भी अपनी रचनाओं में समोसे को लेकर दिल्ली के सुल्तान के प्यार का जिक्र किया है। अरब यात्री इब्न बतूता ने भी सबसे पहले समोसा भारत में ही चखा और इसके स्वाद से मुरीद होकर अपनी यात्रा संस्मरण में समोसे का जिक्र ही कर डाला।
इब्न बतूता 14वीं शताब्दी में भारत आए और उन्होंने मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार में समोसे का स्वाद चखा। उन्होंने इस पकवान का जिक्र समबुश्क नाम से किया। उन्होंने लिखा कि कैसे कीमा के साथ बादाम, पिस्ता और अखरोट वाला समोसा उन्हें परोसा गया। अमीर खुसरो ने तो एक कहावत ही कह डाली- समोसा क्यों नहीं खाया? जूता क्यों न पहना। अंग्रेज जब भारत आए तो उन्होंने भी इस पकवान का स्वाद यहीं चखा। हालांकि ऐसा नहीं है कि समोसा सिर्फ भारत में ही बनता है लेकिन पाकिस्तान को छोड़कर, भारत की तरह समोसा शायद ही विश्व के किसी दूसरे देश में बनता हो। पुर्तगाल, ब्राजील और मोजाम्बिक में 'समोसा' पेस्ट्री की तरह बनता है।
ईरान से भारत आने वाला समोसा 20वीं शताब्दी तक कई तरह से बदल चुका है। अब आपको बाजार में कई तरह के समोसे मिल जाएंगे। पहले अरब में बनने वाले समोसे में मांस, प्याज, पालक और पनीर पड़ता है। भारत में भी यह इसी रूप में आया लेकिन कालांतर में भारत में समोसे के भीतर आलू और मटर भरा जाने लगा। और इसके बाद समोसा इसी रूप में गांव, कस्बों और शहरों में प्रसिद्ध हो गया। समोसा कैसे तिकोना हुआ, इस बात का जिक्र कहीं नहीं मिलता है।