कोरोना के मामले और इसका खतरा
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वैज्ञानिकों ने कहा- लगातार घट रही है एंटीबॉडी
हाल ही में एक रिपोर्ट में चाइनीज यूनिवर्सिटी ऑफ हांगकांग में श्वसन चिकित्सा के प्रोफेसर डेविड हुई शू-चियोंग ने बताया है कि वैश्विक आबादी में एंटीबॉडी के स्तर में गिरावट के कारण हर छह से नौ महीने में कोरोना का प्रकोप देखा जाता रहा है, ये आगे भी जारी रह सकता है। इससे बचाव को लेकर हमें पहले से अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
बार-बार फैलते संक्रमण के जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ ने सभी उच्च जोखिम वाले लोगों को सालाना कोविड वैक्सीनेशन कराने की सलाह दी है जिससे कि शरीर को रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत किया जा सके।
कोरोना से बचा सकते हैं टीके
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नए वैरिएंट्स के खिलाफ कितने प्रभावी हैं टीके
दुनिया के कई देशों में जारी कोरोना के संक्रमण को लेकर विशेषज्ञों की टीम ने एक अध्ययन किया। जिसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि XFG वैरिएंट जिसे स्ट्राटस नाम से भी जाना जाता है, इसमें दो स्पाइक म्यूटेशन हैं। ये कोरोना को लक्षित करने वाले एंटीबॉडीज से बचने में मदद करते हैं। इन म्यूटेशंस में से एक इसे एंटीबॉडी के व्यापक को चकमा देने में भी मदद कर रही है, जिससे प्रतिरक्षा प्रणाली के लिए इसे बेअसर करना और संक्रमण फैलाना आसान हो जाता है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि ये वैरिएंट्स भले ही अति संक्रामकता वाले नजर आते हैं पर जिन लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है, उन्हें कोरोना से ज्यादा खतरा नहीं होना चाहिए।
वैक्सीनेशन की प्रभाविकता पर अध्ययन
इस विषय को समझने के लिए शोधकर्ताओं की टीम ने वैक्सीनेशन करा चुके और फिर पहले से संक्रमित लोगों के ब्लड सैंपल लेकर एंटीबॉडी प्रभावशीलता की जांच की। टीम ने पाया कि XFG वैरिएंट के खिलाफ एंटीबॉडी प्रभावशीलता में लगभग 2 गुना, जबकि NB.1.8.1 के खिलाफ लगभग 1.6 गुना कमी देखी गई।
हालांकि वैज्ञानिकों ने बताया कि जिन लोगों का पहले से टीकाकरण हो चुका है, विशेष रूप से अपडेट किए गए बूस्टर शॉट्स ले चुके हैं उनमें बीमारी होने और संक्रमण के गंभीर रूप लेने का खतरा कम हो सकता है।
कोरोना और इसके वैरिएंट्स
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डब्ल्यूएचओ ने इन 6 वैरिएंट्स को माना है खतरनाक
डब्ल्यूएचओ ने एक अपडेटस में 23 मई 2025 तक कोरोना के 6 वैरिएंट्स को वैरिएंट ऑफ मॉनिटरिंग वर्गीकृत किया था।
ये 6 वैरिएंट्स KP.3, KP.3.1.1, LB.1, XEC, LP.8.1और NB.1.8.1 हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों की टीम ने इन वैरिएंट्स में कुछ अतिरिक्त म्यूटेशंस देखे हैं जो इसकी संक्रामकता का तेजी से बढ़ाने वाले हो सकते हैं। वैज्ञानिकों ने पाया है कि ये वैरिएंट किसी आबादी में तेजी से संक्रमण बढ़ाने का कारण बन सकते हैं जिसे लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
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