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Contraceptive Pills: गर्भनिरोधक गोलियां कैसे रोकती हैं प्रेग्नेंसी, क्या इनका इस्तेमाल वास्तव में खतरनाक है?

Sun, 05 Jul 2026 08:29 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

करोड़ों महिलाएं अनचाही गर्भावस्था से बचने के लिए गर्भनिरोधक गोलियां लेती हैं, पर क्या आप जानते हैं कि यह शरीर में काम कैसे करती है और क्या लंबे समय तक इसका इस्तेमाल हर महिला के लिए सुरक्षित होता है?
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गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल - फोटो : Amarujala.com/AI
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विस्तार
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अनचाहे गर्भ को रोकने के लिए दुनियाभर में लंबे समय से गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इन दवाओं का ओवर-द-काउंटर सबसे ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है। पर क्या ये गोलियां शरीर के लिए सुरक्षित हैं? ये सवाल इसलिए उठ रहा है क्योंकि कई रिपोर्ट्स में अलर्ट किया जा रहा है कि इनका लंबे समय तक इस्तेमाल न केवल भविष्य में मां बनने की क्षमता खत्म कर देती है साथ ही ट्यूमर और कैंसर का कारण भी बन सकती है। क्या वास्तव में ये छोटी सी गोलियां इतनी नुकसानदायक हैं?

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मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अधिकांश स्वस्थ महिलाओं के लिए डॉक्टर की सलाह के अनुसार सही प्रकार और सही खुराक में ली गई गर्भनिरोधक गोलियां सुरक्षित और प्रभावी मानी जाती हैं। हालांकि, इनमें मौजूद एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टिन जैसे हार्मोन शरीर की प्राकृतिक हार्मोनल प्रणाली को प्रभावित करते हैं, इसलिए अगर बार-बार इनका इस्तेमाल बिना डॉक्टरी सलाह के किया जाता है तो इसके कई तरह के नुकसान हो सकते हैं। 

आइए जान लेते हैं कि ये गोलियां शरीर में काम कैसे करती हैं और इनसे क्या-क्या खतरे हो सकते हैं?

गर्भनिरोधक गोलियों का शरीर पर असर - फोटो : Adobe Stock Images
पहले जान लीजिए शरीर में कैसे काम करती हैं ये गोलियां?

गर्भनिरोधक गोलियां सिंथेटिक हार्मोन का इस्तेमाल करके प्रेग्नेंसी को रोकती हैं। सिंथेटिक (कृत्रिम) हार्मोन मानव-निर्मित यौगिक होते हैं जिन्हें प्रयोगशालाओं में रासायनिक रूप से तैयार किया जाता है।
 
  • ये गोलियां ओव्यूलेशन को रोकती हैं, सर्विकल म्यूकस को गाढ़ा करती हैं और गर्भाशय की परत को पतला करती हैं। इन प्राकृतिक प्रक्रियाओं में बदलाव करके, वे ऐसा माहौल बनाती हैं जिसमें स्पर्म अंडे तक नहीं पहुंच पाता और अगर अंडा फर्टिलाइज हो भी जाए, तो वह गर्भाशय में इम्प्लांट नहीं हो पाता।
  • यही वजह है कि ये गर्भधारण रोकने में 99% तक प्रभावी मानी जाती हैं, बशर्ते इन्हें सही तरीके से लिया जाए।
  • पर दिक्कत तब आ जाती है जब इनका बार-बार इस्तेमाल किया जाता है। इससे शरीर का हार्मोनल बैलेंस बिगड़ने लगता है जिसका शरीर पर कई प्रकार से नकारात्मक असर हो सकता है।

प्रजनन क्षमता पर असर - फोटो : Adobe Stock
क्या इसका प्रजनन क्षमता पर भी पड़ता है असर?

अध्ययन की रिपोर्ट से पता चलता है कि गर्भनिरोधक गोलियों का लंबे समय तक नियमित इस्तेमाल करने से प्रजनन क्षमता से जुड़ी कोई स्थायी समस्या या बांझपन नहीं होता है। दवा लेना बंद करने के 1 से 3 महीने के अंदर प्रजनन क्षमता आमतौर पर सामान्य हो जाती है, हालांकि इस दौरान हार्मोन में कुछ अस्थायी बदलाव हो सकते हैं।
 
  • हालांकि इमरजेंसी गर्भनिरोधक गोलियों का नियमित इस्तेमाल मासिक धर्म चक्र में गड़बड़ी पैदा कर सकता है। 
  • इसके अलावा, हार्मोनल गर्भनिरोधक कभी-कभी उन छिपी हुई समस्याओं जैसे पीसीओएस का पता नहीं चलने देतीं जो गोलियां बंद करने के बाद प्रजनन क्षमता पर असर डाल सकती हैं।
  • गर्भनिरोधक गोलियां लंबे समय में ऐसे हार्मोल बदलाव कर सकती हैं, जिसके कारण भविष्य में गर्भधारण करने में कठिनाई हो सकती है।

ब्रेन में ट्यूमर का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
ब्रेन ट्यूमर का जोखिम

अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि  गर्भनिरोधक दवाओं और इंजेक्शन का इस्तेमाल करने वाली महिलाओं में मेनिन्जियोमा नाम के ब्रेन ट्यूमर का खतरा सामान्य महिलाओं की तुलना में अधिक देखा गया है।  यह ट्यूमर ज्यादातर मामलों में कैंसर नहीं होता, लेकिन अगर समय रहते इसका पता न चले तो गंभीर जोखिमों का कारण जरूर बन सकता है।
 
  • डेनिश मेडिसिन्स एजेंसी के वैज्ञानिकों का कहना है कि अब तक माना जाता था कि यह खतरा सिर्फ ज्यादा डोज वाली हार्मोन दवाओं और डेपो इंजेक्शन से जुड़ा है, लेकिन नई रिसर्च बताती है कि कुछ सामान्य गर्भनिरोधक दवाओं में इस्तेमाल होने वाले प्रोजेस्टोजेन हार्मोन से भी यह जोखिम जुड़ा हो सकता है।
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गर्भनिरोधक गोलियों का असर - फोटो : Freepik.com
इन खतरों को भी जान लीजिए
 
  • हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियों का सबसे गंभीर जोखिम वेनस थ्रोम्बोएम्बोलिज्म  यानी नसों में खून का थक्का बनने का है। इन गोलियों में मौजूद एस्ट्रोजन रक्त के जमने वाले कारकों की मात्रा बढ़ा सकता है, जिससे कुछ महिलाओं में थक्का बनने की संभावना सामान्य से अधिक हो जाती है। हालांकि यह जोखिम हर महिला में समान नहीं होता। 
  • लंबे समय तक एस्ट्रोजन युक्त गर्भनिरोधक गोलियां लेने से कुछ महिलाओं में ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है। इसका कारण हार्मोन का शरीर की रक्त वाहिकाओं और किडनी पर प्रभाव माना जाता है। यदि पहले से हाई बीपी है और फिर भी बिना सलाह के गोली ली जाती है, तो हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ सकता है।
  • हार्मोनल गर्भनिरोधक गोलियों को कुछ महिलाओं में गॉलब्लैडर स्टोन का खतरा बढ़ाने वाला भी पाया गया है। एस्ट्रोजन पित्त में कोलेस्ट्रॉल की मात्रा बढ़ा सकता है, जिससे पथरी बनने की संभावना बढ़ती है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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