डयबिटीज और हृदय रोगों का संबंध
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पहले डायबिटीज और हृदय रोगों का कनेक्शन जान लीजिए
डॉक्टर बताते हैं, डायबिटीज केवल ब्लड शुगर बढ़ने से जुड़ी बीमारी नहीं है, बल्कि ये पूरे शरीर को प्रभावित करती है, खासकर दिल को। कई शोध बताते हैं कि डायबिटीज से ग्रसित लोगों में दिल की बीमारियों का खतरा सामान्य लोगों के मुकाबले 2 से 4 गुना ज्यादा होता है। ये सिर्फ हार्ट अटैक या स्ट्रोक तक सीमित नहीं है, बल्कि ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल और रक्त नलिकाओं से जुड़ी समस्याएं भी इसमें शामिल हैं। पर सवाल है, ऐसा क्यों होता है?
इसका जवाब छिपा है हमारे शरीर के अंदर चल रही सूक्ष्म लेकिन महत्वपूर्ण प्रक्रियाओं में। इसे इन दो प्वाइंट्स में समझिए।
- असल में जब शरीर में शुगर ज्यादा समय तक बढ़ा रहता है, तो ये रक्त धमनियों की दीवारों को नुकसान पहुंचाने लगता है। इससे धमनियां सख्त और संकरी हो जाती हैं, जो दिल तक ऑक्सीजन की सप्लाई को रोकती हैं।
- इसके अलावा टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। इससे धमनियों में प्लाक जमने लगता है, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकता है।
महिलाओं में हृदय रोगों का जोखिम
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अब अध्ययन की बात
इन्हीं जोखिमों के बारे में
लीसेस्टर इंग्लैंड के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित महिलाओं में हृदय से संबंधित गंभीर समस्याओं का खतरा पुरुषों की तुलना में लगभग दोगुना होता है। यह शोध लिंग आधारित हृदय रोगों के जोखिमों कोरोनरी माइक्रोवैस्कुलर डिसफंक्शन (सीएमडी) पर सबसे विस्तृत जांचों में से एक है।
सीएमडी हृदय की सबसे छोटी वाहिकाओं में रक्त प्रवाह में बाधा के कारण होने वाली प्रारंभिक और साइलेंट स्थिति है जिससे हार्ट डैमेज होने का खतरा बढ़ने लगता है।
हृदय से संबंधित समस्याएं
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अध्ययन में क्या पता चला?
उन्नत स्तर के एमआरआई स्कैन और चार अध्ययनों से प्राप्त आंकड़ों का उपयोग करते हुए, शोधकर्ताओं ने पाया कि टाइप-2 डायबिटीज से पीड़ित 46% महिलाओं में सीएमडी के लक्षण थे, जबकि पुरुषों में यह केवल 26% था।
यूनिवर्सिटी ऑफ लीसेस्टर में इस अध्ययन के प्रमुख शोधकर्ता गेरी मैककैन कहते हैं, इस अध्ययन में हमने पाया कि डायबिटीज की शिकार महिलाों में हृदय रोग के संकेत अधिक हो सकते हैं, कई स्थितियों में ये नियमित जांचों में पता भी नहीं चल पाता है।
इस अध्ययन को उल्लेखनीय बनाने वाली बात यह है कि सभी प्रतिभागियों में पहले से कोई लक्षण नहीं थे, यानी उन्हें कोई हृदय संबंधी समस्या नहीं थी, सीने में दर्द नहीं था और न ही सांस लेने में तकलीफ थी। फिर भी स्कैन कुछ और ही कहानी बयां कर रहे थे।
अध्ययन में यह भी पाया गया कि सीएमडी के कारक लिंग के आधार पर अलग-अलग होते हैं। महिलाओं में, सीएमडी का सबसे ज्यादा संबंध उनके शारीरिक वजन से था, जबकि पुरुषों में उच्च रक्तचाप को प्रमुख कारक पाया गया है।
हार्ट डिजीज और इसके मामले
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क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता?
अध्ययनकर्ता बताते हैं, रिपोर्ट से स्पष्ट होता है कि हमें हृदय संबंधी जोखिमों के आकलन के तरीके पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है। इन निष्कर्षों के भविष्य की रोकथाम रणनीतियों के लिए महत्वपूर्ण निहितार्थ हैं। महिलाओं के लिए वजन कम करने और पुरुषों के लिए रक्तचाप नियंत्रण जैसे उपाय हृदय रोगों के खतरे को कम करने में मददगार हो सकते हैं। जिन लोगों को पहले से डायबिटीज की दिक्कत है उन लोगों को और भी सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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स्रोत
New Leicester study reveals hidden heart risks in women with Type 2 Diabetes
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