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Kerala: केरल में फैली लिवर फेल करने वाली संक्रामक बीमारी, वैक्सीनेशन नहीं हुआ है तो आप भी हो जाइए सावधान

Tue, 06 Jan 2026 07:00 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • केरल में हाल के दिनों में हेपेटाइटिस ए संक्रमण के मामलों में तेजी देखी जा रही है। यह एक वायरल बीमारी है जो सीधे लिवर पर असर डालती है और समय पर इलाज न मिलने पर लिवर फेल होने का खतरा भी बढ़ा सकती है।
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लिवर को अटैक करने वाला संक्रमण - फोटो : Freepik.com
दक्षिणी राज्य केरल इन दिनों लिवर को अटैक करने वाली संक्रामक बीमारी की चपेट में है। खबरों के मुताबिक यहां हेपेटाइटिस-ए के मामलों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिसंबर के आखिरी हफ्ते तक यहां हेपेटाइटिस-ए के करीब 31,536 मामले रिपोर्ट किए गए, वहीं 82 लोगों की इससे मौत हो गई। न्यूज रिपोर्ट्स के मुताबिक, ज्यादातर मामले भूमिगत जल स्रोतों में बड़े पैमाने पर बढ़े प्रदूषण, साफ-सफाई में कमी और खराब पब्लिक हेल्थ की वजह से हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को हेपेटाइटिस-ए से बचाव के लिए वैक्सीन लगवाने की सलाह दी है। दो डोज वाली वैक्सीन लंबे समय तक संक्रमण के खिलाफ सुरक्षात्मक मानी जाती है। इसके अलावा संक्रमण से बचाव के लिए उबालकर पानी पीने, अच्छी तरह से खाना पकाने और सुरक्षित संभोग के तरीकों को अपनाने की सलाह दी है, जिससे हेपेटाइटिस-ए के जोखिमों से बचाव किया जा सके।

गौरतलब है कि हेपेटाइटिस-ए एक वायरल लिवर इन्फेक्शन है जो दूषित खाने, पानी या करीबी संपर्क से फैलता है। इसपर गंभीरता से ध्यान न दिया जाए तो लिवर फेल होने तक का खतरा हो सकता है।
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हेपेटाइटिस का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
हेपेटाइटिस ए संक्रमण का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, हेपेटाइटिस ए वायरस के कारण होने वाला ये संक्रमण लिवर में सूजन (इंफ्लेमेशन) का खतरा बढ़ा देता है। इस संक्रमण के कारण थकान और मतली जैसे लक्षण होते हैं। संक्रमितों में पीलिया की समस्या का भी जोखम रहता है। वैसे तो ये संक्रमण कुछ हफ्तों में ठीक हो जाता है, हालांकि गंभीर मामलों में इसके कारण लिवर फेलियर का भी खतरा हो सकता है जिसको लेकर सभी लोगों को सावधान रहने की सलाह दी जाती है।

केरल से प्राप्त हो रही जानकारियों के मुताबिक पहले ये इन्फेक्शन बचपन में ज्यादा होते थे, हालांकि अब ज्यादातक मामले किशोरों और युवाओं में देखे जा रहे हैं। 
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हेपेटाइटिस ए के कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
हेपेटाइटिस ए के बारे में जानिए

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, हेपेटाइटिस-ए दुनियाभर में हर साल लगभग 1.4 मिलियन (14 लाख से अधिक) लोगों को प्रभावित करता है। भारत जैसे विकासशील देशों में, जहां विशेषतौर पर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ-सफाई की कमी है, वहां इसका संक्रमण अधिक पाया जाता है।

हेपेटाइटिस-ए आमतौर पर साफ-सफाई की कमी, दूषित खाना-पानी और संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने से फैलता है।

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लिवर को प्रभावित करने वाली समस्या - फोटो : Adobe Stock
कैसे फैलता है इसका खतरा?

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक अस्पताल में गैस्ट्रोइंटस्टाइनल विभाग के डॉक्टर भूषण आनंद बताते हैं पांच चीजें हैं जो इस संक्रामक रोग को बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिससे बचाव करते रहना जरूरी है।

दूषित पानी पीने, ठीक से न पके भोजन (खासकर स्ट्रीट फूड), संक्रमित व्यक्ति के साथ बर्तन या टॉयलेट साझा करने, बिना हाथ धोए खाना खाने से और जिन स्थानों पर इस संक्रमण के मामले बढ़ रहे हैं वहां हेपेटाइटिस ए का खतरा अधिक रहता है। इन पांचों स्थितियों को ध्यान में रखते हुए इससे बचाव करते रहना चाहिए।
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वैक्सीन देती है संक्रमण से सुरक्षा - फोटो : Adobe Stock
बचाव के लिए क्या करें?

हेपेटाइटिस-ए  से बचे रहने के लिए वैक्सीनेशन एक बेहतर तरीका है। इसके अलावा शुद्ध, उबला हुआ पानी पीना चाहिए। भोजन से पहले और शौच के बाद हाथ धोना और सड़क किनारे का खाना खाने से बचना बहुत आवश्यक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस संक्रमण के लक्षणों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। शुरुआत में ये आम फूड पॉइजनिंग जैसा लगता है, लेकिन अगर समय पर ध्यान न दिया जाए, तो यह आपके लिवर को स्थाई नुकसान पहुंचा सकता है।




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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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