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इस उम्र के बाद महिलाओं को कराने चाहिए ये स्वास्थ जांच, कम होता है इन बीमारियों का खतरा

Tue, 09 Apr 2019 04:17 PM IST
पंखुड़ी सिंह लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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इस बात की जानकारी तो सभी को होगी कि कम उम्र में किसी बीमारी से शरीर जल्दी रिकवरी कर लेता है लेकिन बढ़ती उम्र में अगर स्वास्थ पर ध्यान नहीं दिया गया तो समस्या सिर्फ बढ़ती है और हल निकालना मुश्किल हो जाता है। ऐसे में, खासकर महिलाओं को खुद के स्वास्थ और शरीर पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होती है क्योंकि बढ़ती उम्र में उन्हें कई गंभीर बीमारियों का सामना करना पड़ता है। आज हम आपको बताएंगे की एक उम्र के बाद खुद के स्वास्थ की पूरी जानकारी रखने के लिए महिलाओं को कौन से टेस्ट कराने चाहिए। 

 
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आमतौर पर सभी को अक्सर अपना वजन लेते रहना चाहिए क्योंकि बहुत ज्यादा वजन आगे चलकर कई बीमारियों का कारण बन सकता है। इसके अलावा तेजी से वजन घटना या बढ़ना कई बीमारियों का लक्षण होता है। साथ ही ब्लड प्रेशर भी चेक कराना जरूरी होता है। सिर्फ ब्लड प्रेशर का रोजाना चेकअप करके बहुत सी गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है। लंबे वक्त तक ब्लड प्रेशर हाई रहना ना सिर्फ हृदय रोगी बना सकता है बल्कि कई खतरनाक बीमारियां हो सकती हैं। 



 
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लिपिड प्रोफाइल टेस्ट 
इससे आपके दिल की सेहत का हाल पता चलता है। आमतौर पर टेस्ट रिजल्ट सामान्य आने के बाद हर 2 साल पर और अगर आप मोटापे, दिल से जुड़ी किसी बीमारी या डायबिटीज से ग्रस्त हैं, तो साल में एक बार ये टेस्ट कराने को कहा जाता है। 

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सीबीसी (कंप्लिट ब्लड टेस्ट) 
एनीमिया, इंफेक्शन और कुछ तरह के कैंसर का पता लगाने के लिए ये टेस्ट किया जाता है। ये टेस्ट 20 की उम्र के बाद भारतीय महिलाओं के लिए और भी जरूरी हो जाता है क्योंकि भारत में ज्यादातर महिलाओं में आयरन की कमी देखी गई है।
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थायराइड टेस्ट
ये ब्लड टेस्ट हाइपोथायराइडिज्म और हाइपरथायराइडिज्म का पता लगाने के लिए होता है। अगर रिजल्ट सामान्य आता है, तो साल में एक बार ये टेस्ट कराने को कहा जाता है। थायराइड इंडिया के मुताबिक पुरुषों की तुलना में थायराइड डिसऑर्डर महिलाओं में तीन गुना ज्यादा है। 
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एसटीडी टेस्ट (यौन संचारित संक्रमण)
सेक्सुअली एक्टिव होने के बाद हर महिला को एचआईवी, हेपेटाइटिस बी और सी जैसे यौन संचारित संक्रमण की जांच करानी चाहिए। ये टेस्ट और भी जरूरी हो जाते हैं, अगर आप प्रेग्नेंसी की तैयारी में हैं। 
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पैप स्मीयर टेस्ट
इसके जरिए प्री-कैंसरकारक बदलाव का पता लगाया जा सकता है। ये टेस्ट 21 की उम्र के बाद खासकर सेक्सुअली एक्टिव हर महिला को कराने की सलाह दी जाती है। 
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कैल्शियम और विटामिन डी टेस्ट 
कैल्शियम के टेस्ट में ब्लड टेस्ट के जरिए बोन मेटाबॉलिज्म देखा जाता है। ये टेस्ट महिलाओं के लिए और अहम हो जाता है क्योंकि उन्हें ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा अधिक रहता है। 
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