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आंखों के इन संकेतों के गलती से भी न करें नजरअंदाज, वर्ना...

Sun, 30 Dec 2018 12:23 PM IST
मोना नारंग ऊर्जा डेस्क, अमर उजाला
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rubbing eyes
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बसूरत नजारे हों या जाने-अनजाने खतरे, आंखों के बिना हमारी जिंदगी का हर पहलु बेरंग है। अक्सर आम लोग शरीर की तमाम समस्याओं को नजरअंदाज करते हैं। आंखें आमतौर पर इस लापरवाही का सबसे ज्यादा शिकार बनती हैं। यहां उन संकेतों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें कतई भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए, भले ही यह कुछ पल के लिए दिखें, लेकिन अगर आंखों के साथ कुछ ऐसा हो तो जोखिम न लें।
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सर्दी में रखें खास ख्याल
सर्दी में अक्सर कम पानी पीते हैं और हवा में नमी कम होती है। सर्दी से राहत देने वाले हीटर हमारे आस-पास की नमी को और खत्म कर देते हैं। सर्दियों में आंखों को स्वस्थ रखने के लिए इन उपायों पर गौर करें।

नमी बनाए रखें : सर्दी में आंखों को शुष्क हाेने से बचाने के लिए दवा की दुकान पर मिलने वाली कोई भी आर्टिफिशियल टीयर ड्रॉप काम में ले सकते हैं।
चश्मे का इस्तेमाल करें : लैपटॉप, मोबाइल जैसे उपकरण पर काम करते वक्त ब्लू लाइट फिल्टर वाले लेंस काम में लें, इसके अलावा बाहर निकलें तो यूवी प्रोटेक्शन देने में सक्षम धूप के चश्मे का इस्तेमाल करें।
सीधी हवा से बचाएं : काम की जगह हो या घर। एयरकंडीशनर, पंखे या हीटर से निकलने वाली हवा को सीधे आंखों में लगने से रोकें। इसकी सीधी हवा का आंखों पर गंभीर असर हो सकता है।

आंखों में सूखापन आने लगता है

book reading
सूखी आंखों से पढ़ना मुमकिन नहीं
स्मार्टफोन, लॅपटॉप व टीवी जैसे इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले से निकलने वाले विकिरण की वजह से आंखों में सूखापन आने लगता है। यह धीरे-धीरे बीमारी में तब्दील हो जाता है और इसका असर यह होता है कि हमें पढ़ने में भारी दिक्कत हाेती है। जॉन्स हॉपकिंस विल्मर आई इंस्टीट्यूट, बाल्टीमोर, यूएसए में इस समस्या पर किए गए अध्ययन में पाया गया कि सीडीईडी यानी क्रॉनिक ड्राई आई डिजीज से पीड़ित लोग सामान्य लोगों की तुलना में पढ़ने में धीमे हो जाते हैं। अध्ययन में पाया गया कि सीडीईडी से पीड़ित व्यक्ति की पढ़ने की गति 10 फीसदी तक धीमी हो जाती है और 30 मिनट से ज्यादा पढ़ना मुश्किल हो जाता है। गंभीर रूप से शुष्क आंख वाले लोग, सामान्य लोगों की तुलना में प्रति मिनट 32 शब्द कम पढ़ पाते हैं। सामान्य लोग 272 शब्द प्रति मिनट की दर से पढ़ते हैं।

नजरअंदाज न करें
-आंखों का लाल होना और आंखों में दर्द होना।
-आंशिक तौर पर या पूरी तरह से एक या दोनों आंखों से अचानक दिखना बंद होना।
-दोहरी दृष्टि
-अांख के किसी हिस्से में धब्बा बनने से आंशिक दृष्टि हीनता (ब्लाइंडस्पॉट),
-रोशनी के चारों ओर प्रभामंडल दिखना या दृष्टि क्षेत्र में विकृति आना
-आंख के दृष्टि क्षेत्र में एक छाया या पर्दे जैसा महसूस होना
-पढ़ने में और रात में देखने में दिक्कत हाे
-चीजें स्पष्ट न दिखें
-रंगों में फर्क करना मुश्किल लगे
-दूर या नजदीक रखी चीजें धुंधली दिखें
-आंखों से लगातार पानी बहे और खुजली हो तो बिना देर किए आंखों को अच्छे विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाएं।
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एक्सपर्ट कहते हैं
इन दिनों हवा में अलाव, पराली और चूल्हे जलने की वजह से धुआं काफी होता है, जो आंखों को काफी नुकसान पहुंचाता है। इससे बचने के लिए चश्मे का इस्तेमाल करें। इसके अलावा  आखों में जलन और खुजली हो रही है, तो दिन में दो-तीन बार साफ पानी से धोएं। शुरुआत में कोई भी आर्टिफिशियल टीयर ड्रॉप इस्तेमाल कर सकते हैं। लेकिन अगर खुजली और जलन ठीक न हो, तो तुरंत चिकित्सक को दिखाएं।

बच्चे की आखों का ध्यान रखें : बच्चे कई बार अपनी समस्याओं के बारे में साफ तौर पर नहीं बता पाते हैं। अगर बच्चे के पढ़ाई-लिखाई के प्रदर्शन में अचानक कमी आए, तो इसे नजरंदाज न करें। यह आंखों की दिक्कत की वजह से भी हो सकता है। बच्चों की आंखों की समस्या काे नजअंदाज करने के गंभीर नतीजे हो सकते हैं। बच्चों का दृष्टि दोष कब एनब्लायोपिया (चश्मा लगाने के बाद भी धुंधला दिखना) जैसी गंभीर बीमारी बन जाए पता नहीं चलता। इसलिए बच्चों की आंखों की भी नियमित तौर पर जांच कराएं।

उम्र के पड़ावों पर रखें ख्याल : 30 की उम्र के बाद आंखों की नियमित जांच जरूर कराएं। 40 की उम्र के बाद आंखों का इंट्राओकुलर प्रेशर टेस्ट जरूर कराएं। इससे ग्लुकोमा और कैटरेक्ट जैसी समस्याओं का समय रहते पता चल सकता है।

-डॉ. संजय तेवतिया, वरिष्ठ चिकित्सक
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