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इर्रेगुलर पीरियड्स से जुड़े वो Facts जो हर महिला को जरूर जानने चाहिए

Wed, 19 Dec 2018 04:19 PM IST
kapil sharma लाइफस्टाइल डेस्क , अमर उजाला
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अनियमित मासिक धर्म या इर्रेगुलर पीरियड्स की समस्या अब तेजी से बढ़ रही है। महिलाओं को इससे जुड़े हर पहलू को करीब से जानना चाहिए, क्योंकि यह उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर डालता है।सबसे पहले तो ये जान लीजिए कि आखिर अनियमित मासिक धर्म या इर्रेगुलर पीरियड्स होता क्या है। आमतौर पर महिलाओं में मासिक धर्म/पीरियड्स 14 से 48-50 साल की उम्र के बीच होता है।यह चक्र महीने में एक बार होता है और तीन से पांच दिन तक रहता है।किशोरियों में जल्दी या फिर देर से मासिक धर्म की समस्या भी बढ़ रही है। डॉक्टर्स इसे ओलिगोमेनोरिया कहते हैं। एक स्वस्थ महिला के पीरियड्स की अवधि 21 से 35 दिन के बीच होती है।

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अनियमित परियड्स से जुड़े खास फैक्ट्स:
20 से 40 वर्ष की उम्र के बीच महिलाओं में अनियमित पीरियड्स की समस्या ज्यादा देखने को मिलती है। इसके पीछे हार्मोनल असंतुलन, जीवनशैली में परिवर्तन और दवाइयों का कुप्रभाव जैसे कारण जिम्मेदार हो सकते हैं। डॉक्टर्स के मुताबिक, यदि अनियमित पीरियड्स की समस्या 40 साल की आयु सीमा के बाद हो रही है तो इसके पीछे कारण होता है प्रीमेनोपॉज।अधिक तनाव की वजह से भी मासिक धर्म प्रभावित होता है।

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वो तीन हार्मोंस जिनसे होती है अनियमित माहवारी की समस्या:
महिलाओं के शरीर में एस्ट्रोजन, प्रोजेस्टेरोन और टेस्टोस्टेरोन नाम के तीन हार्मोन मौजूद होते हैं। इन हार्मोंस का संतुलन बिगड़ने पर पीरियड्स में परेशानी शुरू होने लगती है। महीने या फिर इससे ज्यादा समय तक बीमार रहने या थाइरॉयड की वजह से भी महिलाओं में मासिक धर्म में बदलाव होने की संभावना बढ़ जाती है।

पीरियड्स न आने का मतलब सिर्फ प्रेग्नेंट होना नहीं:
पीरियड्स न होने को लेकर सामान्य तौर पर मान्यता है गर्भावस्था। मतलब यदि किसी महिला को पीरियड्स नहीं होते हैं तो इसका मतलब यह माना जाता है कि वह प्रेग्नेंट है।अधिकतर मामलों में ऐसा होता है, लेकिन सिर्फ यही एक कारण हो ऐसा भी नहीं है।यह शरीर में अन्य महत्वपूर्ण बदलावों का भी एक संकेत हो सकता है। जैसे- ज्यादा तनाव, जीवनशैली में बदलाव, खराब आहार आदि। मतलब माहवारी का न होना, देर से होना या बेहद कम समय के लिए होना, यह अनियमित पीरियड्स की पहचान है। 

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अनियमित माहवारी में गर्भाधारण:
अनियमित माहवारी की वजह से गर्भधारण में भी समस्या आती है, लेकिन यह असंभव नहीं है। इसके लिए कई उपाय हैं। अनियमित माहवारी में महिलाओं को अपने अंडोत्सर्जन के लिए ज्यादा सर्तक रहना चाहिए। वे संतुलित खानपान और अच्छे इलाज से ऐसा कर सकती हैं।ऐसी स्थिति में जंक से फूड से बचना चाहिए। मोटापा अधिक होने के कारण भी समस्या बढ़ जाती है। महिलाओं में इस्ट्रोजन नामक हार्मोन ज्यादा बनने की संभावना बढ़ जाती है। इस स्थिति में लिपिड लेवल भी बढ़ा हुआ होता है, जिसकी वजह से ब्लड वैसल्स में फैट सेल्स भी बढ़ जाते हैं और ब्लड की नलियों में चिपक कर उन्हें संकीर्ण बना देते हैं। ये सेल्स ब्लड सप्लाई करने वाली नलियों को ब्लॉक भी देते हैं, इसलिए मोटापे पर नियंत्रण रखें।  

अनियमित माहवारी के लक्षण:
पीरियड्स में अनियमितता बढ़ने के कारण महिलाओं के यूटेरस में दर्द होता है। स्तन, पेट, हाथ-पैर और कमर में दर्द भी रहता है। ज्यादा थकान महसूस करना और भूख कम लगना भी इसका एक लक्षण है। कब्ज या दस्त की समस्या भी इस तकलीफ में हो जाती है। इसके अलावा यूटेरस में ब्लड क्लॉट्स का बनना भी मासिक धर्म की अनियमितता का लक्षण है।
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भूलकर भी मासिक चक्र से न करें छेड़छाड़ :
पीरियड्स को हिंदी में मासिक धर्म भी कहा जाता है।मासिक धर्मचक्र शब्द का भी इस्तेमाल भारत में काफी प्रचलित है।जैसा कि नाम से ही पता चल रहा है कि पीरियड्स एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसका निश्चित समय पर आना बेहद जरूरी है। कई बार स्वास्थ्य संबंधी कारणों, जीवनशैली से ये अनियमित हो जाते हैं।ऐसे में कई उपाय हैं, जिनका प्रयोग किया जाना चाहिए, लेकिन इससे भी ज्यादा चिंता की बात यह है कि कई महिलाएं धर्मचक्र यानी पीरियड्स के समय से छेड़छाड़ करती हैं। यह बेहद हानिकारक होता है।महिलाएं धार्मिक कार्य, धार्मिक स्थानों की यात्रा या अन्य वजहों से मासिक धर्म को टालने का प्रयास करती हैं।मसलन पीरियड्स को आगे बढ़ाने के लिए गर्भनिरोध गोलियों का सेवन आदि, इससे बचना चाहिए।  
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