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Cancer: क्या चीनी खाना बंद कर दें तो कैंसर से हो सकता है बचाव? आपके मन में भी है ये सवाल तो जान लीजिए जवाब

Sat, 17 Jan 2026 08:12 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कैंसर के लगभग 30-40 प्रतिशत मामले असंतुलित डाइट, तंबाकू, शराब, शारीरिक निष्क्रियता और मोटापे से जुड़े हुए हैं। ज्यादा चीनी, जंक फूड और पैकेज्ड चीजों को खाने से भी क्या कैंसर होता है?
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चीनी खाने से होने वाली बीमारियों का खतरा - फोटो : Amarujala.com
कैंसर के बढ़ते मामले, कम उम्र के लोगों को कैंसर और इससे मौत की खबरें आप अक्सर सुनते रहते होंगे। ये बीमारी समय के साथ डायबिटीज और हृदय रोगों की ही तरह से आम होती जा रही है।

पर सवाल ये है कि आखिर पिछले एक-दो दशकों में ऐसा क्या हुआ कि कैंसर के मामले इतने तेजी से बढ़ गए? पहले जो बीमारी बुजुर्गों की मानी जाती थी, वह अब युवाओं और बच्चों को भी अपना शिकार बनाती जा रही है?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञ इसके लिए जीवनशैली और खान-पान की गड़बड़ियों को प्रमुख कारण मानते हैं। रिपोर्ट्स के अनुसार, कैंसर के लगभग 40 प्रतिशत मामले असंतुलित डाइट, तंबाकू-शराब की आदत, शारीरिक निष्क्रियता और मोटापे से जुड़े हुए हैं। प्रोसेस्ड-जंक फूड और पैकेज्ड चीजों के खाने की आदतें भी इस रोग के खतरे को बढ़ाती जा रही हैं। हालांकि चिंता की बात यह है कि अक्सर लोग इन जोखिमों को नजरअंदाज कर देते हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आखिर खान-पान और लाइफस्टाइल की कौन-सी गलतियां कैंसर के खतरे को बढ़ा रही हैं?

खान-पान और कैंसर के बीच संबंध की बात आते ही दिमाग में बड़ा सवाल आता है कि क्या वाकई ज्यादा चीनी खाना भी कैंसर से जुड़ा हो सकता है?
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चीनी से होने वाली बीमारियों को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com
चीनी खाने से कैंसर होता है?

कई अध्ययन इस बात को लेकर अलर्ट करते रहे हैं कि ज्यादा चीनी खाने की आदत क्रॉनिक बीमारियों की मुख्य वजह है। डायबिटीज हो या हृदय रोग, कोलेस्ट्रॉल हो या मोटापा इन सभी के पीछे चीनी के अधिक सेवन को जिम्मेदार बताया जाता रहा है। तो क्या इससे कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है?

रायपर, छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ कैंसर सर्जन डॉ जयेश शर्मा ने इस सवाल का जवाब दिया है।
  • डॉ जयेश कहते हैं, सीधे तौर पर चीनी को कैंसर का कारण नहीं कहा जा सकता।
  • चीनी को डायबिटीज और हृदय रोग जैसी कई बीमारियों के लिए जिम्मेदार माना जाता रहा है, पर सिर्फ चीनी खाना बंद कर देने से कैंसर से बचाव होगा, ये कहना भी ठीक नहीं है।
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चीनी खाने के नुकसान - फोटो : Freepik.com
तो क्या चीनी खाने से कोई दिक्कत नहीं होती?

डॉ जयेश कहते हैं, असल में ज्यादा चीनी खाना नुकसानदायक है, कैंसर का खतरा भी यहीं से शुरू होता है। ज्यादा चीनी खाने से इंसुलिन लेवल बढ़ता है। 
 
  • पहला- इंसुलिन को ग्रोथ और सेल डिवीजन वाला हार्मोन माना जाता है जो कैंसर की कोशिकाओं को भी बढ़ा सकता है।
  • दूसरा- हमारे पेट पर जमी चर्बी या मोटापे के कारण शरीर में इंफ्लेमेशन का खतरा बढ़ता है। ये कई बीमारियों की जड़ है।
  • तीसरा- लिक्विड शुगर जैसे कोल्ड ड्रिंक या फिर पैक्ड जूस का अधिक सेवन लिवर में ऐसे फैट को बढ़ाने वाला पाया गया जो कैंसर की कोशिकाओं को भी बढ़ाने वाला हो सकता है।
 
 

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क्या चीनी खाना बंद कर देना चाहिए? - फोटो : Freepik.com
तो फिर चीनी खाएं या नहीं?

डॉ जयेश कहते हैं, चीनी खाना बुरी बात नहीं है, पर कुछ चीजों का ध्यान रखना जरूरी है।
  • चीनी की मात्रा का ध्यान रखें। आपको दिनभर में जितनी कैलोरी चाहिए उसके 10% से कम मात्रा चीनी वाली चीजों से होनी चाहिए।
  • स्वस्थ व्यक्ति के लिए 7-8 चम्मच चीनी खाना सुरक्षित माना जा सकता है।  
  • इसके साथ आहार में फाइबर वाली चीजें बढ़ाएं। ये शरीर में शुगर के अवशोषण, इंसुलिन स्पाइक और कैंसर का खतरा भी कम करता है।
  • लिक्विड शुगर वाली चीजें कम से कम लें। चाय में चीनी की मात्रा कम रखें, बिना चीनी वाली चाय ज्यादा फायदेमंद है।
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पैक्ड जूस है नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com
पैक्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक्स सबसे खतरनाक

अधिकतर शोध पैक्ड जूस, कोल्ड ड्रिंक्स जैसी चीनी वाली चीजों के अधिक सेवन को लेकर लोगों को सावधान करते हैं। हाल ही में अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से पैक्ड जूस और एनर्जी ड्रिंक्स हमारे लिवर के लिए दुश्मन साबित हो रहे हैं। इतना ही नहीं ज्यादा चीनी वाली चीजें दिल की बीमारियों को भी बढाने वाली हो सकती हैं, इसलिए इनका सीमित मात्रा में ही सेवन किया जाना चाहिए।

डाइट में चीनी की मात्रा जितनी कम होगी आप बीमारियों से उतना ही सुरक्षित रह सकेंगे।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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