किस प्रकार की डायबिटीज का इलाज सबसे जल्दी?
शोध में शामिल एक प्रोफेसर लीफ ग्रूफ ने बीबीसी को बताया, ''यह शोध बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि इसके जरिए हम मधुमेह की सटीक दवाइयों की तरफ कदम बढ़ा सकते हैं। आदर्श स्थिति में तो इस इलाज को मधुमेह की पहचान होने के बाद ही शुरू कर देना चाहिए।''प्रोफेसर लीफ कहते हैं कि अंतिम दो तरह के मधुमेह के मुकाबले शुरुआती तीन तरह के मधुमेह का इलाज जल्दी शुरू होना चाहिए।
क्लस्टर 2 के मरीजों को अभी टाइप 2 प्रकार के मधुमेह की श्रेणी में रखा जाता है क्योंकि वे ऑटोइम्यून से पीड़ित नहीं होते।हालांकि स्टडी यह भी बताती है कि उन्होंने जिन मरीजों को इस शोध में शामिल किया उनमें से अधिकतर मरीज टाइप 1 मधुमेह से पीड़ित थे।क्लस्टर 2 के मरीजों में अंधेपन का खतरा ज्यादा होता है जबकि क्लस्टर 3 में किडनी फेल होने का खतरा ज्यादा रहता है।
लंदन के इम्पीरियल कॉलेज में सलाहकार और क्लीनिकल साइंटिस्ट डॉक्टर विक्टोरिया सलेम कहती हैं कि अधिकतर विशेषज्ञ पहले से ही मानते थे कि टाइप 1 और टाइप 2 तरीकों से मधुमेह का महज दो श्रेणियों में बांटना उचित नहीं था।यह शोध वैसे तो सिर्फ नॉर्वे, स्वीडन, डेनमार्क, फिनलैंड और आइसलैंड (स्कैनडिनेविया के लोगों पर ही किया गया है और दुनियाभर में इसके नतीजे बदल सकते हैं।
डॉक्टर सलेम कहती हैं, ''दुनिया भर में मधुमेह से पीड़ित लोगों की कई श्रेणियां बनाई जा सकती हैं, विश्वभर में आनुवांशिक और स्थानीय पर्यावरण के आधार पर लगभग 500 उपसमूह बनाए जा सकते हैं। इस स्टडी में तो पांच क्लस्टर बनाए गए हैं लेकिन ये ज्यादा भी हो सकते हैं।''
वॉरविक मेडिकल स्कूल में मेडिसन के प्रोफेसर सुदेश कुमार कहते हैं, ''हमें यह जानने की जरूरत भी है कि क्या इन तमाम क्लस्टर का अलग-अलग इलाज करने से क्या इलाज के नतीजों में कुछ बदलाव आएगा।''