एक नए अध्ययन में पाया गया है कि भावनाओं को प्रकट करने की बजाय उसे दबाना स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है। ऐसा करने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता भी कम होती है।
अमेरिका की 'यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया' में हुए इस अध्ययन में पाया गया कि जो युवा अपनी भावनाओं को दबाते हैं, उनकी प्रतिरक्षा कोशिकाओं के बैक्टीरिया के संपर्क में आने के कारण ज्यादा सूजन पैदा होने लगती है। इससे उनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता पर बुरा प्रभाव पड़ता है।
यह अध्ययन 'साइकोसोमैटिक मेडिसिन जर्नल' में प्रकाशित हुआ है। यूनिवर्सिटी की असिस्टेंट प्रोफेसर हैनाह स्चरीयर कहती हैं कि यह प्रभाव किसी के स्वास्थ्य पर एक या दो हफ्तों में नहीं पड़ता है, बल्कि कुछ सालों में इसका प्रभाव होता है।