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प्रदूषण कथा-2: हे राजन.! डॉक्टर कहते हैं ये मास्क, एयर प्यूरीफायर किसी काम के नहीं हैं 

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air pollution - फोटो : PTI
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हे राजन.! यह प्रदूषण कथा का दूसरा भाग है। पहली कथा के उपसंहार का सार यही इंतजार है कि देश के राजनीतिक एजेंडे में आखिर पर्यावरण का मुद्दा कब शामिल होगा। अभी तो आलम यह है कि दिवाली के बाद प्रदूषण बढ़ने की वही कहानियां हवा में तैर रही हैं, जो हर साल तैरती हैं। समस्याएं भी वहीं हैं। हवा में मौजूद जहरीली गैस ना सिर्फ आंखों में जलन पैदा कर रही है और सेहत की दुश्मन बन गई है। सांस और एलर्जी से जुड़ी कई बीमारियां पहले से ही थीं, वह अब उफान मार रही है क्योंकि सीजन उन्हीं का है। कई रिसर्च केवल प्रदूषण पर हो रही हैं। नई रिसर्च कहती है कि अब तो प्रदूषण फर्टिलिटी पर भी काफी बुरा असर डाल रहा है। प्रदूषण मार रहा है और ऊपर से लोगों को इस दुनिया में नया जीवन भी रचने नहीं दे रहा। एक तो लाइफ-स्टाइल ऊपर से प्रदूषण लोगों से माता-पिता बनने का हक भी छीन रहा है। 

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क्या मास्क असरदार हैं? - फोटो : file photo
काम के नहीं हैं मास्क, ऐसा डॉक्टर कहते हैं 
खैर, कथाओं में कई उपकथाएं हैं लेकिन मुख्य कथा से दूर भटकती हुई हैं। इस समय बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए बाजारों में कई तरह के फैन्सी मास्क बेचे जा रहे हैं, जिनकी कीमत 90 रूपए से शुरु होकर 3500 रूपए तक बताई जा रही है। फिल्म पिंक में अमिताभ बच्चन भी खुद को प्रदूषित हवा से बचाने के लिए कुछ इसी तरह के मास्क का इस्तेमाल करते हुए दिखाई देते हैं।

फिल्म देखकर हम तो सोच रहे थे कि यह भी कोई फैशन होगा, लेकिन यह तो जहर हो रही हवा से बचने का उपाय था। पता ही नहीं चला कि मास्क का इतने बड़े स्तर पर प्रचार हो रहा था। मास्क के प्रचार-प्रसार के बावजूद एक सवाल हर किसी के मन में आता है कि क्या वाकई ये मास्क असरदार होते भी हैं या ये सिर्फ लोगों को मानसिक रूप से तैयार करते हैं कि वो इस जहरीली हवा से बाकी लोगों की तुलना में सुरक्षित हैं। अब जरा डॉक्टर की भी सुन लें। 
 

''मास्क या एयर फिल्टर का बहुत बड़ा बाजार खड़ा हो चुका है। लंबे वक्त में ये तरीका असरदार नहीं है। - फोटो : PTI
डॉक्टर उवाच..! 
बीबीसी की एक रिपोर्ट में सीएसई के एक्सपर्ट चन्द्रभूषण प्रदूषण पर दिए खास इंटरव्यू में बताते हैं-  ''मास्क या एयर फिल्टर का बहुत बड़ा बाजार खड़ा हो चुका है। लंबे वक्त में ये तरीका असरदार नहीं है। अभी जितने आंकड़े आ रहे हैं, वो बताते हैं कि घरों के भीतर भी प्रदूषण होता है। फिर आप चाहे एयर फिल्टर लगवा लीजिए या मास्क पहन लीजिए। हम प्रदूषण से नहीं बच सकते। इनसे आप थोड़ा बहुत बच सकते हैं, लेकिन पूरी तरह नहीं। कहा जाता है कि कितनी ही औरतें चूल्हे से निकले प्रदूषण की वजह से मरती हैं। किचन में बच्चों के बैठने का भी असर होता है।

डॉक्टर वली की मानें तो ''अभी N5 मास्क बाजार में काफी बिक रहा है। ये ज्यादा काम का नहीं है। - फोटो : अमर उजाला
डॉक्टर मोहसिन वली की भी सुन लीजिए। वे भारत के कई पूर्व राष्ट्रपतियों के भी डॉक्टर रह चुके हैं। फिलहाल वो गंगाराम अस्पताल में काम कर रहे हैं। डॉक्टर वली की मानें तो ''अभी N5 मास्क बाजार में काफी बिक रहा है। ये आमतौर पर बाजार में 200 से 800 रुपए में मिल रहा है, पर ये बहुत ज्यादा असरदार नहीं है। वो लोग जो मास्क नहीं खरीद सकते या एयर फिल्टर नहीं लगा सकते वो रुमाल या कपड़ा बांधकर कुछ हद तक ही बच सकते हैं।''

क्या कहा जाए राजन ये मास्क वाकर्इ काम के हैं? या ये केवल हमारा भ्रम है जो हमें इस जहरीले वातावरण में सुरक्षित रखने का भ्रम दिए रहता है।  

24 घंटे में हवा में PM 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए - फोटो : PTI
बहुत खतरनाक है हवा और यह प्रदूषण कथा
राजन अब जरा प्रदूषण का हिसाब-किताब भी वैज्ञानिक तरीके से समझ लें। प्रदूषण मापने का पैमाना एयर क्वालिटी इंडेक्स को मापने के कई पैमाने हैं। इनमें से जो सबसे ज्यादा प्रचलित है वो है हवा में PM 2.5 और PM 10 का पता लगाना। PM का मतलब है पार्टिकुलेट मैटर यानी हवा में मौजूद छोटे कण। PM 2.5 या PM 10 हवा में कण के साइज को बताता है।

आमतौर पर हमारे शरीर के बाल PM50 के साइज के होते हैं। इससे आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि PM 2.5 कितने बारीक होते होंगे। 24 घंटे में हवा में PM 2.5 की मात्रा 60 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर होनी चाहिए और PM 10 की मात्रा 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर। इससे ज्यादा होने पर स्थिति खतरनाक मानी जाती है और ये खतरनाक स्तर इन दिनों देश की राजधानी की हवा में बह रहा है। इन दिनों दोनों कणों की मात्रा हवा में कई गुना ज्यादा है। हवा में मौजूद यही कण हवा के साथ हमारे शरीर में प्रवेश कर खून में घुल जाते हैं। इससे शरीर में कई तरह की बीमारी जैसे अस्थमा और सांसों की दिक्कत हो सकती है। बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बूढ़ों के लिए ये स्थिति ज्यादा खतरनाक होती है। 
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air pollution - फोटो : file photo
किसे सुनाएं व्यथा की कथा 
हे राजन.! जिंदगी वैसे ही आसान नहीं है। महानगरों में रोजी-रोटी कमाने आए हैं। पानी हो तो साफ कर लें, जो हमने सीख लिया है। आर.ओ. लगा लें या फिल्टर लगा लें। लेकिन इस हवा का क्या करें? यहां तो बाजार भी फेल होगा चाहे कितने ही प्रोडक्ट बना लें और बेच लें। हमें तो मास्क किसी काम के शुरू से ही नहीं लग रहे थे। डॉक्टर का ठप्पा लगना जरूरी था, तो उनकी भी सुन लीजिए। हमने तो सुना दी। 

प्रभो.! 

आप नेता हैं, मंत्री हैं, सरकार हैं। नौकरी, शिक्षा, गरीबी, भुखमरी, दूषित जल, बीमारी, महामारी सबसे बचा जा सकता है प्रभो! लेकिन प्रदूषण के दूषण का वध करो राजन। ये हवा है, ना किसी मास्क से रुकेगी, ना किसी कमरे में बंद होकर थमेगी।

राजन रक्षा करो, कब सांस थम जाए पता नहीं.!
रक्षा करो राजन.! 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण) : यह लेखक के निजी विचार हैं. आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है. आप भी अपने विचार हमें blog@auw.co.in पर भेज सकते हैं. लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें.
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