एक स्वास्थ्य समस्या अपने साथ जुड़ी कई बीमारियों लेकर आती है। 6 अगस्त 2019 को देश की पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का निधन हो गया। उन्हें किडनी और डायबीटीज की समस्या थी। 2016 में उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था। खराब स्वास्थ्य की वजह से कुछ दिनों से अपने प्रोफेशनल काम से दूर थीं। आपकी जानकारी के लिए बता दें की डायबिटीज के मरीजों में किडनी की बीमारी का खतरा ही नहीं बल्कि कई तरह की बीमारियों की संभावना अधिक हो जाती है।
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बढ़े हुए ब्लड शुगर का शरीर पर काफी बुरा असर होता है। यह हार्ट, किडनी, आंख समेत कई अंगों के लिए खतरनाक होता है। चिकित्सकों के अनुसार लंबे समय से डायबीटीज से पीड़ित करीब 40 प्रतिशत मरीजों को डायबीटिक नेफरोपथी हो जाती है और समय पर पता न चलने से यह गंभीर रूप ले सकती है।
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नेफरोपथी किडनी की एक गंभीर बीमारी है जो डायबीटीज के 40 प्रतिशत मरीजों में आगे चलकर हो जाती है। टाइप 1 और टाइप 2 दोनों प्रकार के डायबीटीज के मरीजों को इस नेफरोपथी का खतरा बना रहता है।डायबीटिक नेफरोपथी में किडनी के काम करने की क्षमता कम हो जाती है। बढ़े हुए शुगर लेवल का किडनी पर बुरा असर पड़ता है। यह खतरनाक इसलिए हो जाता है क्योंकि किडनी की बीमारी में शुरुआत में दर्द नहीं होता है इसलिए डायबीटीज के मरीजों को किडनी की जांच कराते रहना चाहिए।
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डायबीटीज के मरीजों को हार्ट की बीमारियों का खतरा ज्यादा होता है।अगर बीपी और कलेस्ट्रॉल भी बढ़ा हुआ हो तो हार्ट स्ट्रोक का खतरा ज्यादा हो जाता है। जरूरी है कि वे हर 6 महीने पर वे अपने बीपी की जांच कराएं। अगर आपको हाई बीपी है और इसकी दवा लेते हैं तो आपको समय-समय पर बीपी चेक कराते रहना चाहिए।