इससे भी बड़ी चिंता की वजह है कि यहां रहने वाले पढ़े-लिखे युवा अवसाद की वजह से सिगरेट पी रहे हैं। ये लोग धूम्रपान की शरण में अपने अवसाद को कम करने के लिए जा रहे हैं। हालांकि दिल्ली-एनसीआर ही नहीं बल्कि पूरा भारत ही तंबाकू की चपेट में है। विभिन्न रिपोर्ट इस बात की तस्दीक करते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी कहना है कि भारत उन देशों की सूची में शामिल है जहां तंबाकू की वजह से सबसे ज्यादा मौतें होती हैं और लोग बीमार पड़ते हैं।
'अंडरस्टेंडिंग स्मोकिंग अटीट्यूड इन यूथ' सर्वे का कहना है कि काम के अवसाद की वजह से दिल्ली-एनसीआर में रहने वाले युवा ज्यादा सिगरेट पी रहे हैं। इस सर्वे को गुड़गाव स्थित एक हेल्थ फाउंडेशन ने कराया है। इस सर्वे की शोध प्रमुख डॉक्टर निकिता का कहना है कि नीति-नियंताओं को चाहिए कि वह धूम्रपान के बढ़ते लत पर रोक लगाए। इसके लिए पुख्ता संरचना होनी चाहिए जो कि आंकड़ों में हो। उनका कहना है कि उच्च शिक्षा की ही तरह नौकरियों में भी स्ट्रेस मैनेजमेंट को जरूरी हिस्सा बनाना चाहिए ताकि सिगरेट के दुष्परिणामों को नई नौकरी ज्वॉइन करने वाले लोगों को बताया जा सके।
अभिभावकों का सिगरेट पीना बच्चों के लिए नुकसानदायक
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