एच1एन1 के खतरे को लेकर क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
अमर उजाला से बातचीत में इंटेसिव केयर के डॉक्टर विक्रमजीत कहते हैं, स्वाइन फ्लू वैसे तो हल्की समस्याओं का कारण बनता है, पर इस बार इसकी रफ्तार थोड़ी ज्यादा देखी जा रही है। स्वाइन फ्लू भी कोरोना की तरह श्वसन संक्रमण है। इसके ज्यादातर लक्षण भी कोरोना के जैसे ही है तो संक्रमण की चेन तोड़ने और बचाव के लिए भी हमें कोरोना काल वाले उपाय अपनाने की जरूरत है।
- डॉक्टर कहते हैं, कोरोना से तुलना का मतलब ये बिल्कुल नहीं है कि स्वाइन फ्लू को लेकर कोरोना की तरह परेशान होने की जरूरत है, बल्कि कोरोना के दौरान हमने संक्रमण से बचाव के लिए जो उपाय किए थे, उसे एक बार फिर से शुरू करने चाहिए ताकि इसके जोखिमों से बचा जा सके।
कोरोना महामारी के दौरान शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति रहा होगा जिसने मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग और हाथों को सैनिटाइज करने की आदत न अपनाई हो। उस समय ये सावधानियां हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई थीं। अब जब इन्फ्लुएंजा से बचाव की बात हो रही है तो भी इससे लाभ पाया जा सकता है।
फ्लू के मामलों को लेकर अलर्ट
- फोटो : Freepik.com
बढ़ते संक्रमण का जोखिम
डॉक्टर बताते हैं, एच1एन1 सहित इन्फ्लुएंजा वायरस मुख्य रूप से श्वसन तंत्र को प्रभावित करता है और संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने से निकलने वाले संक्रमित कणों के जरिए दूसरे व्यक्ति तक पहुंच सकते हैं। इसलिए संक्रमण की चेन तब बनती है जब संक्रमित व्यक्ति से वायरस निकलता है, वह दूसरे व्यक्ति के संपर्क में आता है और शरीर में पहुंच जाता है।
- इस चेन को तोड़ने का सबसे सीधा तरीका है संक्रमित व्यक्ति और दूसरों के बीच संपर्क कम करना।
- फ्लू में यह खास तौर पर जरूरी है क्योंकि कोई लोग लक्षण आने से पहले भी संक्रमण फैला सकते है
- यानी सिर्फ बीमार व्यक्ति का इलाज जरूरी नहीं, बल्कि उसके आसपास के लोगों तक वायरस पहुंचने से रोकना भी उतना ही महत्वपूर्ण है।
संक्रमण से बचाव के लिए मास्क जरूरी
- फोटो : Adobe Stock
मास्क की आदत और सोशल डिस्टेंसिंग
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना की तरह स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए एहतियातन मास्क लगाना फायदेमंद हो सकता है। मास्क संक्रमित व्यक्ति की नाक-मुंह से निकलने वाले ड्रॉपलेट्स को दूसरों तक पहुंचने से बचाता है और आसपास मौजूद वायरस को सांस के साथ शरीर के भीतर पहुंचने के के खतरे को कम करता है।
- इसका मतलब यह नहीं कि हर व्यक्ति को हर समय मास्क पहनना ही होगा। लेकिन खांसी-जुकाम या फ्लू जैसे लक्षण होने पर, संक्रमित व्यक्ति के आसपास रहते समय और भीड़भाड़ वाली या खराब वेंटिलेशन वाली जगहों में मास्क उपयोगी हो सकता है।
- इसी तरह अगर आप किसी संक्रमित व्यक्ति के लगातार करीब रहते हैं, तो आपके भी संक्रमित होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए संक्रमितों से सोशल डिस्टेंसिंग भी जरूरी है।
- स्कूल, ऑफिस या भीड़भाड़ वाली जगहों पर ये संक्रमण से बचाने में मददगार तरीका हो सकता है।
हाथों की साफ-सफाई जरूरी
- फोटो : AmarUjala.com/AI
इन बातों का भी रखें ध्यान
- एच1एन1 से बचाव में केवल हवा से फैलने वाले संक्रमण पर ध्यान देना काफी नहीं है। अच्छी हाइजीन यानी स्वच्छता भी जरूरी है। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से धोना संक्रमण के प्रसार से बचाव का प्रभावी तरीका माना जाता है। हैंड सैनिटाइजर का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
- खांसने या छींकने के बाद और सार्वजनिक जगहों से लौटने पर हाथ साफ करना खास तौर पर जरूरी है।
- आंख, नाक और मुंह को बिना साफ हाथों से छूने से भी बचना चाहिए, क्योंकि हाथ दूषित सतह या संक्रमित स्राव के संपर्क में आ सकते हैं।
- छोटे बच्चों, बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं वाले लोगों में फ्लू की जटिलताओं का जोखिम अधिक हो सकता है। ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना जरूरी है।
--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।