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Covid-19: कोरोना से ठीक होने के बाद भी पूरी तरह से सेहत में नहीं होता सुधार, चिंता बढ़ा रही है ये रिपोर्ट

Mon, 16 Jun 2025 06:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कोरोनावायरस शरीर को किस प्रकार से प्रभावित करता है, इसको लेकर तमाम अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते रहे हैं। महामारी की शुरुआत से ही लॉन्ग कोविड की भी चर्चा होती रही है।
  • एक हालिया रिपोर्ट में पता चला है कि पांच में से एक व्यक्ति को एक साल बाद तक भी क्वालिटी ऑफ लाइफ में समस्या बनी हुई है।
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कोरोना संक्रमण और इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
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विस्तार
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Long Covid Effects: कोरोनावायरस संक्रमण के मामले पिछले करीब एक महीने से भारत सहित तमाम देशों के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। 21 मई 2025 से लगातार संक्रमण के मामलों में वृद्धि देखी जा रही है। देश में फिलहाल एक्टिव केसों की संख्या 7264 है। कोविड डैशबोर्ड पर साझा की गई जानकारियों के मुताबिक बीते 24 घंटे में 119 नए मामले सामने आए जबकि 11 लोगों की कोरोना से मौत हो गई है। इस साल अब तक कोरोना से मरने वालों की संख्या बढ़कर 108 हो गई है।

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NB.1.8.1 वैरिएंट के मामले इस बार देश में सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जा रहे हैं। इसकी प्रकृति तो ज्यादा गंभीर रोगकारक नहीं है पर इसके कारण संक्रमण के बढ़ने का खतरा काफी अधिक देखा जा रहा है।

देश में कोरोना की तेज रफ्तार को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को लगातार संक्रमण से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी है। विशेषकर बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों में इस रोग का खतरा अधिक रहता है, इन लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहना जरूरी है।
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(कोरोना के बाद अब एक नया वायरस बढ़ा रहा है चिंता, इंसानों में फैला तो एक और महामारी ज्यादा दूर नहीं)

कोरोना संक्रमण और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
कोरोनावायरस और इसका शरीर पर होने वाला असर

कोरोनावायरस का संक्रमण शरीर को किस प्रकार से प्रभावित करता है, इसके क्या-क्या दुष्प्रभाव हो सकते हैं, इसको लेकर तमाम अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ अलर्ट करते रहे हैं।




महामारी की शुरुआत से ही लॉन्ग कोविड (संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक बनी रहने वाली दिक्कतों) की भी चर्चा होती रही है। इसी को लेकर एक हालिया शोध में वैज्ञानिकों ने फिर से बताया है कि अब भी बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो कोरोना से ठीक होने के बाद भी पूरी तरह से स्वस्थ नहीं हो पाए हैं।

(ये भी पढ़िए- आपको जरूर जाननी चाहिए वैक्सीनेशन को लेकर सामने आई ये जानकारी)

लॉन्ग कोविड का असर - फोटो : Freepik.com
साल भर से अधिक समय तक रह सकता है लॉन्ग कोविड का असर

ओपन फोरम इन्फेक्शियस डिजीज जर्नल में हाल ही में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि कोविड-19 से ठीक होने के बाद भी, पांच में से एक व्यक्ति को एक साल बाद तक क्वालिटी ऑफ लाइफ में समस्या बनी हुई है।

इस अध्ययन के लिए 1,450 से अधिक रोगियों के डेटा का विश्लेषण किया गया है। करीब 12 महीने तक किए गए अध्ययन में पाया गया है कि कोविड से ठीक होने के बाद भी करीब 25 फीसदी लोगों की सेहत पर लंबे समय तक इसका असर देखा जा रहा है। उन्हें लंबे समय तक किसी न किसी प्रकार की स्वास्थ्य समस्याएं बनी हुई हैं। 

इतना ही नहीं कोविड टेस्ट में पॉजिटिव न आने पर भी, कुछ लक्षण महीनों तक बने रह सकते हैं। 
 

कोरोना के बाद भी बनी रहने वाली थकान-कमजोरी - फोटो : Freepik.com
शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर असर

पिछले शोध के अनुमान बताते रहे हैं कि कोविड से ठीक हो चुके करीब 36% लोग किसी न किसी रूप में लॉन्ग कोविड का अनुभव करते हैं, जो सार्वजनिक स्वास्थ्य बोझ को उजागर करता है। शोधकर्ताओं ने बताया कि संक्रमण से ठीक होने के बाद एक साल या उससे अधिक समय तक कई लोगों में शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य संबंधित दिक्कतें बनी हुई हैं। 

अध्ययन में चिंता जताई गई है कि लॉन्ग कोविड के लक्षणों पर लोग ज्यादा ध्यान नहीं देते हैं, पर ये स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव भी बढ़ाने वाला हो सकता है। लोगों में सांस की समस्या, गंभीर थकान-कमजोरी, सिरदर्द, तनाव-चिंता जैसे लॉन्ग कोविड लक्षणों की दिक्कत बनी हुई रह सकती है।
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लॉन्ग कोविड की समस्याएं - फोटो : Adobe stock
लंबे समय तक हृदय स्वास्थ्य पर भी देखा जा रहा है असर

कोविड-19 किस तरह से शरीर के तमाम अंगों की सेहत पर दीर्घकालिक असर डालता है इसको लेकर सामने आई एक अन्य रिपोर्ट में वैज्ञानिकों ने बताया कि संक्रमण के कारण हृदय संबंधी मौतों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। साल 2020 में महामारी शुरू होने के बाद से हृदय संबंधी मौतों में बढ़ोतरी देखी जा रही है।

पहले तो वायरस ने हृदय रोगों का खतरा बढ़ाया, वहीं दूसरी तरफ महामारी के कारण दुनियाभर में स्वास्थ्य सेवा प्रणालियों को भी काफी झटका लगा। हमारे निष्कर्ष बताते हैं कि 2020 से घर पर होने वाली हृदय संबंधी मौतों में वृद्धि हुई है, जो महामारी के दौरान हृदय रोगियों की देखभाल में संभावित अंतर को दर्शाता है। यहां पढ़िए पूरी रिपोर्ट



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स्रोत
Association of SARS-CoV-2 With Health-related Quality of Life 1 Year After Illness Using Latent Transition Analysis 


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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