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Coronavirus: क्या है लॉन्ग कोविड? जानिए आखिर क्यों कोरोना से कुछ लोग पूरी तरह ठीक नहीं हो रहे हैं

Sun, 11 Oct 2020 12:46 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ज्यादातर लोगों के लिए कोविड-19 एक खतरनाक बीमारी नहीं है, लेकिन कुछ लोगों को इससे पूरी तरह से ठीक होने में काफी दिक्कतें हो रही हैं औऱ वो कई महीनों से थकान, दर्द और सांस लेने में तकलीफ जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं। इस स्थिति को लॉन्ग कोविड कहते हैं, लोगों पर इसका बुरा प्रभाव पड़ रहा है। ऐसे लोग थोड़ी दूर चलने भर से थक जाते हैं। महामारी के दौरान अभी तक पूरा ध्यान लोगों की जान बचाने पर था, लेकिन अब कोविड के लंबे समय तक होने वाले असर के बारे में भी बात शुरू हो गई है। लेकिन कई बुनियादी सवाल हैं जिनके जवाब नहीं मिले हैं, जैसे कि लॉन्ग कोविड क्यों होता है और इसका शरीर पर क्या प्रभाव पड़ेगा? 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या है लॉन्ग कोविड?

लॉन्ग कोविड की कोई मेडिकल परिभाषा नहीं है ना ही सभी लोगों में एक जैसे लक्षण होते हैं। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे दो लोगों के लक्षण बिल्कुल अलग हो सकते हैं, लेकिन अत्याधिक थकान होना एक आम लक्षण जरूर है। सांस लेने में तकलीफ, लगातार रहने वाला कफ, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, सरदर्द, सुनने और देखने में तकलीफ, सूंघने की शक्ति खत्म होना और और स्वाद का चला जाना जैसे लक्षण लॉन्ग कोविड में पाए जा सकते हैं। इसके अलावा दिल, फेफड़ों और किडनी को भी नुकसान हो सकता है। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे कई लोगों ने डिप्रेशन और एंग्जाइटी की शिकायतें भी की हैं। ये लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी में बुरा असर डाल सकता है। बीमारी का सामना कर चुकीं जेड ग्रे क्रिस्टी बताती हैं, 'मुझे इस तरह की थकान पहले कभी महसूस नहीं हुई थी।'  

                     
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ऐसा नहीं है कि लॉन्ग कोविड से निपटने में सिर्फ उन लोगों को समय लगता है जो इन्टेंसिव केयर में हैं। मामूली लक्षण वाले लोगों को भी ऐसी समस्या का सामना करना पड़ सकता है। एक्सटर विश्विद्यालय के प्रोफेसर डेविड स्टर्न कहते हैं, 'इस बात में कोई शक नहीं हैं कि लॉन्ग कोविड मौजूद है।' 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कैसे होता है लॉन्ग कोविड?

रोम के एक बड़े अस्पताल से डिस्चार्ज किए गए 143 लोगों पर की गई एक स्टडी अमेरिकी मेडिकल एसोसिएशन के एक जर्नल में छपी है। इसके मुताबिक, 87 फीसदी लोगों में दो महीने बाद भी कम से कम एक लक्षण पाया गया। इनमें से आधे लोगों ने थकान की शिकायत की। हालांकि ऐसी स्टडी उन ही लोगों पर केंद्रित होती है जिन्हें अस्पताल में भर्ती किया जाता है। 

ब्रिटेन के कोविड सिप्टम ट्रैकर, जिसे 40 लाख लोग इस्तेमाल करते हैं, उसके आंकड़ों के मुताबिक 30 दिनों के बाद भी 12 फीसदी लोगों में लक्षण पाए गए। इसके अभी पब्लिश नहीं हुए डेटा के मुताबिक, दो फीसदी लोगों में 90 दिनों के बाद भी लॉन्ग कोविड के लक्षण दिखे। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
क्या गंभीर कोविड होने पर ही लॉन्ग कोविड होता है?

ऐसा जरूरी नहीं है। डबलिन में 50 फीसदी लोगों में 10 हफ्तों के बाद भी कोविड के लक्षण देखे गए। एक-तिहाई लोग अपने काम पर वापस लौट पाने में सक्षम नहीं थे। हालांकि बहुत अधिक थकान लॉन्ग कोविड का सिर्फ एक लक्षण है। लीसेस्टर विश्वविद्यालय के क्रिस ब्राइटलिंग्स कोविड से पीड़ित लोगों को ट्रैक करने से जुड़े एक प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं। उनका मामना है कि जिन लोगों को निमोनिया हो चुका है, उन्हें आगे कई तकलीफों का सामना कर पड़ सकता है, क्योंकि उनके फेफड़ों पर बुरा असर पड़ा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
लॉन्ग कोविड क्यों हो रहा है?

इसे लेकर कई धारणाएं हैं, लेकिन कोई सटीक उत्तर अभी तक नहीं मिला है। हो सकता है कि वायरस शरीर के ज्यादातर हिस्सों से बाहर निकल चुका हो, लेकिन कुछ छोटे जगहों पर मौजूद हो सकता है। किंग्स कॉलेज लंदन के प्रोफेसर टिम स्पेक्टर के मुताबिक, 'अगर लंबे समय तक दस्त हो तो आपको आंते में वायरस मिल जाए, अगर सूंघने की शक्ति बहुत दिनों के लिए चली जाए, तो हो सकता है, ये नसों में हैं, इसलिए दिक्कत हो रही है।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस शरीर में कई प्रकार की कोशिकाओं को सीधे संक्रमित कर एक अति सक्रिय इम्यून प्रतिक्रिया को ट्रिगर कर सकता है जिससे नुकसान हो सकता है। एक तर्क यह भी है कि कोविड के बाद प्रतिरक्षा प्रणाली सामान्य नहीं होती है जिसका स्वास्थ्य पर असर पड़ सकता है। संक्रमण अंगों के काम करने के तरीके को भी बदल सकता है। ऐसा फेफड़ों के साथ सार्स या मेर्स बीमारियों के बाद देखा गया है। दोनों ही बीमारियां एक तरीक के कोरोना वायरस के कारण ही होती हैं। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोविड लोगों के मेटाबॉलिस्म में भी बदलाव ला सकता है। ऐसे केस सामने आए हैं, जहां मधुमेह के रोगियों को कोविड के बाद शुगर कंट्रोल करने में मुश्किलें बढ़ गईं। सार्स ने कई मामलों में शरीर में वसा को प्रोसेस करने के तरीके करीब 12 सालों के लिए बदल दिए। दिमाग में भी बदलाव के कुछ शुरुआती संकेत मिले हैं। कोविड खून में भी बदलाव ला सकता है। 
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क्या ये असामान्य है?

वायरल जुकाम या खांसी के कारण भी थकान जैसी समस्याओं का होना आम है, कई तरह के इंफेक्शन के असर से उबरने में काफी समय लग जाता है। कुछ तरह के बुखार का असर भी शरीर पर महीनों तक रहता है। प्रोफेसर ब्राइटलिंग के मुताबिक, 'ऐस लग रहा है कोविड के लंबे समय के कई लक्षण दिख रहे हैं, और ऐसे लोगों की संख्या बढ़ रही है।' हालांकि यह सब अभी अनुमान हैं और जब तक पूरी तस्वीर साफ न हो जाए, निश्चित तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता। 
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