फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Coronavirus: वैज्ञानिकों को मिली बड़ी सफलता, तैयार किया ऐसा इनहेलर, जो कोरोना वायरस को नाक में ही रोक लेता है

Mon, 17 Aug 2020 01:45 PM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए पूरी दुनिया में वैक्सीन पर काम चल रहा है। इसके अलावा दवाओं या अन्य तरीकों की भी लगातार खोज की जा रही हैं, जो वायरस के खात्मे में मददगार हो सकें। इस क्रम में अमेरिका ने एक ऐसा एंटी-कोरोना स्प्रे तैयार किया है, जिसके बारे में दावा किया जा रहा है कि इनहेलर के जरिए उस स्प्रे का इस्तेमाल करने पर वह कोरोना वायरस को नाक में ही रोक लेता है। वह वायरस को शरीर में प्रवेश नहीं करने देता। इसे विकसित करने वाले वैज्ञानिकों की मानें तो यह इनहेलर पीपीई किट से भी अधिक कारगर और प्रभावी है। आइए जानते हैं वैज्ञानिकों ने इस इनहेलर को कैसे तैयार किया है और यह कैसे वायरस को नाक में ही रोक लेता है। 
विज्ञापन

2 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस एंटी-कोरोना स्प्रे का निर्माण अमेरिका के कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने किया है। उनका कहना है कि इसे बनाने में कोरोना एंटीबॉडीज का इस्तेमाल किया गया है। इसे बनाने के लिए सबसे पहले लैब में एंटीबॉडीज से नैनोबॉडीज का निर्माण किया गया और इसे जेनेटिकली मॉडिफाई किया गया, ताकि यह कोरोना वायरस को आगे बढ़ने से रोक दे। 
विज्ञापन

3 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं का कहना है कि लामा और ऊंट जैसे जानवरों में पाई जानेवाली एंटीबॉडीज से नैनोबॉडीज को विकसित किया गया है और इसी नैनोबॉडीज का इस्तेमाल कोरोना को रोकने वाला इनहेलर बनाने में किया गया है। आपको बता दें कि ये एंटीबॉडीज शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को कई गुना तक बढ़ा देती है।   

4 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
वैज्ञानिकों के मुताबिक, मुख्य रूप से इस एंटी-कोरोना स्प्रे का प्रभाव प्रोटीन से निर्मित कोरोना वायरस की बाहरी परत पर होता है। दरअसल, यह वायरस की ऊपरी प्रोटीन परत को नाक में ही ब्लॉक कर देता है, जिससे यह वायरस इंसान के गले से होते हुए शरीर में नहीं पहुंच पाता। 
विज्ञापन

5 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
अब शोधकर्ता इस एंटी-कोरोना स्प्रे का बड़े पैमाने पर ह्यूमन ट्रायल की तैयारी करने पर विचार कर रहे हैं। उनका कहना है कि अगर यह ट्रायल में सफल रहता है तो यह कोरोना महामारी को रोकने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका साबित हो सकता है। 
विज्ञापन

6 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इससे पहले ब्रिटेन की साउथैम्प्टन यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने भी एक इनहेलर तैयार किया था। उनका कहना था कि इस इनहेलर में ऐसे ड्रग का इस्तेमाल किया गया है, जो कोरोना संक्रमण के बाद फेफड़ों पर वायरस के दुष्प्रभाव को कम करता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
शोधकर्ताओं का कहना था कि इनहेलर में मौजूद ड्रग में एक खास तरह का प्रोटीन है, जिसे इंटरफेरान बीटा कहा जाता है। जब शरीर में वायरस पहुंचता है, तब यह प्राकृतिक रूप से शरीर में ही तैयार होता है। उनका कहना था कि रिसर्च के दौरान जब हांगकांग में अन्य दवाओं के साथ इस ड्रग का इस्तेमाल कोरोना मरीजों पर किया गया था तो उनमें कोरोना के लक्षणों में कमी आई थी। 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें