भारत और अमेरिका समेत दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि इसके खिलाफ टीकाकरण अभियान भी चल रहे हैं और तरह-तरह की दवाओं की खोज भी की जा रही है जो कोरोना के खिलाफ कारगर हो सकें। इसी क्रम में मशहूर दवा कंपनी जायडस कैडिला ने भारतीय औषधि महानियंत्रक यानी डीसीजीआई से हेपेटाइटिस की एक दवा का इस्तेमाल कोरोना वायरस के इलाज में करने के लिए अनुमति मांगी है। इस दवा का नाम पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा-2बी है।
जायडस कैडिला ने सोमवार को जारी एक बयान में कहा कि पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा 2बी के तीसरे चरण के क्लीनिकल ट्रायल में इस दवा से कोरोना के इलाज को लेकर उत्साहजनक नतीजे मिले हैं। दरअसल, कंपनी इस दवा को 'पेगीहेप' ब्रांड नाम से बेचती है।
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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जायडस कैडिला ने कहा कि जो शुरुआती नतीजे सामने आए हैं उनसे पता चलता है कि शुरुआत में इसके इस्तेमाल से कोरोना के मरीज संक्रमण से ज्यादा तेजी से उबरते हैं। इसके साथ ही इससे मरीजों को परेशानियां भी नहीं होती हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, कैडिला हेल्थकेयर हेपेटाइटिस बी और सी के उपचार के लिए इस ब्रांड के तहत पिछले कई सालों से पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा 2बी का वाणिज्यिक तौर पर उत्पादन करती आ रही है। पिछले साल चीन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के विश्वविद्यालयों के एक समूह द्वारा वुहान में कोरोना मरीजों पर विश्लेषण कर पाया था कि जिन लोगों को इंटरफेरॉन अल्फा- 2बी दवा दी गई थी, उनमें वायरस के फैलने की अवधि में काफी कमी आई थी।
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एक रिपोर्ट के मुताबिक, कैडिला हेल्थकेयर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने पिछले साल कहा था, 'दुनियाभर की कंपनियां कोविड-19 से निपटने के लिए सुरक्षित और प्रभावकारी उपचार की तलाश में जुटी हुई हैं। ऐसे में पेगीलेटेड इंटरफेरॉन अल्फा एक ऐसी संभावना के तौर पर उभरी है, जो शुरुआती चरण में उपचार किए जाने पर बेहतर परिणाम देता है।'