येल यूनिवर्सिटी के मनोरोग विशेषज्ञ प्रो. स्टीवन एम साउथविक का कहना है, तनाव हमेशा बुरा या खराब नहीं होता है। वे कहते हैं, जो चुनौतियों का सामना करते हैं, वही आगे बढ़ते हैं। दुनियाभर में हो रही हलचल के बीच आप खुद को संतुलित करते हैं, तो दूसरी तरफ आप खुद को हर परिस्थिति से निपटने के लिए मजबूत बना रहे हैं।
कोलंबिया यूनिवर्सिटी के डलॉस ट्रॉमा एंड इमोशन लैब के क्लीनिकल साइकोलॉजी विभाग के डॉ. जॉर्ज बोनानो का कहना है कि हर व्यक्ति के जीवन में कठिन समय आता है, जिसे वो खुद अपने निर्णय से पार करता है।
वे एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताते हैं, अलग हादसों और घटनाओं की वजह से 67 लोग मानसिक रूप से बीमार हुए और दो तिहाई लोग बहुत कम समय में सामान्य जीवन में लौट गए। ऐसे लोग खुद मानते हैं कि एक कोशिश की जाए और थोड़ा लचीलापन रखा जाए तो हर परिस्थिति से निपटा जा सकता है।
प्रो. कॉनेन कहती हैं, व्यक्ति की मानसिक स्थिति क्या है इस पर निर्भर करता है कि व्यक्ति कितने गुस्से वाला होगा? ये बिलकुल सच है कि कुछ लोग जन्म के साथ ही लचीले और सौम्य व्यवहार वाले होते हैं। व्यक्ति पर सकारात्मक और नकारात्मक असर हालात के आधार पर होता है, लेकिन इसमें संबंधित व्यक्ति के जीवन का गुजरा हुआ समय भी बहुत अधिक महत्वपूर्ण होता है।
बोस्टन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन के मनोविज्ञान विभाग की प्रो. बेसेलवैन डेर कॉल्क का कहना है, जन्म के बाद माता-पिता और दूसरे सदस्यों से मिलने वाला प्यार और अपनत्व भी बच्चे को हालात से निपटने के लिए तैयार करता है। वे बताती हैं, जीवन के शुरुआती बीस वर्ष बेहद गंभीर होते हैं।
हर उम्र में अलग-अलग तरह की परिस्थिति और ट्रॉमा से गुजरना पड़ता है। अपने फैसलों को लेकर मन में उधेड़-बुन चलती रहती है। हमारी सोच, इच्छाओं और उम्मीदों पर इसका प्रभाव देखने को मिलता है। मस्तिष्क इस कारण खुद को मजबूत बनाता है, क्योंकि शरीर का यही एक अंग है जिस पर पूरा जीवन निर्भर है।