फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अलग-अलग देशों में कोरोना संक्रमण के बढ़ने या घटने की क्या वजहें हैं?

Tue, 30 Jun 2020 03:23 PM IST
योगेश जोशी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 13
दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले एक करोड़ से अधिक हो जाने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वैश्विक महामारी के एक नए और भयावह चरण की चेतावनी दी है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : रोहित झा, अमर उजाला

दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण के मामले एक करोड़ से अधिक हो जाने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस वैश्विक महामारी के एक नए और भयावह चरण की चेतावनी दी है। जब पश्चिम यूरोप और एशिया के कई देशों में कोरोना संक्रमण काफी हद तक नियंत्रित दिखाई दे रहा है तब दुनिया के कुछ हिस्सों में यह महामारी काफी तेजी से फैलती दिख रही है।

संक्रमित हो चुके एक करोड़ लोगों में से पहले दस लाख लोगों तक इस वायरस को पहुंचने में तीन महीने का समय लगा था, लेकिन अंतिम दस लाख लोगों (90 लाख से एक करोड़ तक) को अपनी चपेट में लेने में कोरोना को सिर्फ आठ दिन लगे।

यह आंकड़ा सिर्फ उन लोगों पर आधारित है, जिनका कोविड-19 टेस्ट किया गया, इसे ध्यान में रखते हुए कुछ वरिष्ठ लैटिन अमरीकी स्वास्थ्य अधिकारी मानते हैं कि ‘यह संक्रमितों की असल संख्या का एक मामूली हिस्सा मात्र है।

विज्ञापन

2 of 13
अमेरीका कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
  • मामले तेजी से कहां बढ़ रहे हैं?

ग्राफ पर नजर डालें तो फिलहाल अमेरीका, दक्षिण एशिया और अफ्रीका का पैटर्न चिंताजनक है।

अमेरीका- जो कोरोना वायरस संक्रमण से सबसे अधिक प्रभावित है और कोविड-19 से सबसे अधिक मौत भी वहीं हुई है। वहां एक बार फिर मामलों में तेज उछाल देखा गया है। बीते कुछ दिनों में अमेरीका में कोरोना संक्रमण के मामलों में जो तेजी आई है। उसने एक नया रिकॉर्ड भी बनाया है जो एक दिन में 40 हजार से ज्यादा नए मामले सामने आने का है।

 

विज्ञापन

3 of 13
ब्राजील के सबसे बड़े शहर- साओ पाउलो और रियो दे जनेरो महामारी से बुरी तरह प्रभावित हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : पिक्साबे

अमेरीका में न्यूयॉर्क के बाद एरीजोना, टेक्सस और फेलोरिडा को महामारी का बड़ा केंद्र माना जा रहा है। विशेषज्ञों की राय है कि यह अमेरीका में महामारी की दूसरी लहर नहीं है, बल्कि महामारी अब उन राज्यों में तेजी से फैल रही है, जहां लॉकडाउन को बहुत मामूली मूल्यांकन के बाद, सही समय से पहले हटा लिया गया है।

ब्राजील जो कोरोना संक्रमण से दुनिया का दूसरा सबसे ज्यादा प्रभावित देश है और अमेरीका के बाद कोविड-19 के दस लाख से ज्यादा मामले दर्ज करने वाला दूसरा देश भी, वहां अब तक संक्रमण बढ़ने की दर काफी तेज है।

ब्राजील के सबसे बड़े शहर- साओ पाउलो और रियो दे जनेरो महामारी से बुरी तरह प्रभावित हैं, जबकि ब्राजील के अन्य राज्यों में कोरोना की टेस्टिंग ही कम की जा रही है, जिनके बारे में विशेषज्ञों की राय है कि वहां मामले अधिक हो सकते हैं।

4 of 13
भारत में अब तक पांच लाख 48 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

कुछ ऐसा ही भारत में भी देखने को मिलता है। हाल ही में भारत में कोरोना संक्रमण के मामलों में एक दिन में रिकॉर्ड वृद्धि देखी गई जब एक दिन में 19,900 से ज्यादा मामले सामने आए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, भारत में अब तक पांच लाख 48 हजार से अधिक मामले दर्ज किए जा चुके हैं, जिनमें 2 लाख 10 हजार से अधिक मरीज अब भी संक्रमित हैं यानी उनमें बीमारी के लक्षण हैं या उनकी रिपोर्ट अब तक निगेटिव नहीं आई है।

विज्ञापन

5 of 13
भारत सरकार के अनुसार, तीन लाख 21 हजार से ज्यादा मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

भारत सरकार के अनुसार इस महामारी की चपेट में आ चुके लोगों के ठीक होने की संख्या, मौजूदा समय में संक्रमित मरीजों से ज्यादा है। सरकार के अनुसार, तीन लाख 21 हजार से ज्यादा मरीज पूरी तरह ठीक हो चुके हैं।

लेकिन भारत में भी टेस्टिंग कम की जा रही है, खासतौर पर उन राज्यों में जहां आबादी का घनत्व बहुत अधिक है। ऐसे में संक्रमितों की असल संख्या सरकारी डेटा से अनिवार्य रूप से अधिक होगी।

पर ऐसा हो क्यों रहा है? विकासशील देशों में भीड़भाड़ वाले इलाकों में रहने को मजबूर, वंचित समुदायों के लिए इस महामारी को सर्वाधिक खतरनाक समझा गया है। कोविड-19 के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के विशेष प्रतिनिधि डेविड नोबार्रो के अनुसार, कोरोना वायरस संक्रमण ‘गरीबों की बीमारी’ बन गया है।

विज्ञापन

6 of 13
जिन देशों का बजट छोटा है, उन देशों में हेल्थ केयर वर्करों और मेडिकल स्टाफ के लिए पीपीई किट जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की भी किल्लत है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : social media

जब एक पूरा परिवार एक कमरे के मकान में रहता है तो सोशल डिस्टेंसिंग जैसी हिदायतों का पालन करना असंभव होता है। जिन इलाकों में पानी की व्यवस्थित सप्लाई नहीं होती, वहां बार-बार हाथ धोना भी संभव नहीं होता और जब लोगों को खाने के लिए रोज दिहाड़ी करने जाना होता है, तो सड़क किनारे, बाजारों और गलियों में खड़े होकर बात ना करना भी संभव नहीं रह जाता।

पर ऐसे इलाकों में संक्रमण की दर बहुत अधिक होती है। मेक्सिको के ऐसे ही इलाकों में टेस्टिंग के दौरान पता चला कि वहां रहने वाला हर दूसरा शख्स कोरोना संक्रमित है। ये कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट रहे न्यूयॉर्क और उत्तरी इटली जैसे अन्य शहरों की तुलना में काफी ज्यादा है।

जिन देशों का बजट छोटा है, उन देशों में हेल्थ केयर वर्करों और मेडिकल स्टाफ के लिए पीपीई किट जैसी जरूरी सुरक्षा सुविधाओं की भी किल्लत है।

विज्ञापन

7 of 13
संक्रमण को फैलने से रोकने का एक तरीका ये है कि जहां संक्रमण ज्यादा है, उन देशों को अंतरराष्ट्रीय सहायता दी जाए- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

इक्वाडोर में, एक वक्त बाद स्थिति ये आ गई कि शवों को गलियों के कूड़ेदान में ही छोड़ना पड़ा क्योंकि प्रशासन इतने शवों को मैनेज नहीं कर सकता था। साथ ही वहां की सबसे बड़ी प्रयोगशाला में वो कैमिकल खत्म हो गया जिसकी कोविड-19 टेस्ट में जरूरत होती है।

और जहां आर्थिक स्थिति पहले से ही विकट हो, वहां संक्रमण की रोकथाम के लिए सख्त लॉकडाउन लगाना विकसित देशों की तुलना में बहुत ज्यादा चुनौतीपूर्ण है।

डॉक्टर डेविड नोबार्रो कहते हैं, “संक्रमण को फैलने से रोकने का एक तरीका ये है कि जहां संक्रमण ज्यादा है, उन देशों को अंतरराष्ट्रीय सहायता दी जाए। हम कोई निराशाजनक संदेश नहीं देना चाहते, पर हम चिंतित हैं कि जिन्हें मेडिकल सप्लाई और वित्तीय सहायता की जरूरत है, वो उन तक पहुचे।”

8 of 13
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले तो महामारी को मामूली मानते रहे- फाइल फोटो - फोटो : social media
  • राजनीतिक एंगल

अब तक जिन कारणों की बात हुई, कोरोना वायरस संक्रमण की दर बढ़ने के पीछे वही कारण नहीं हैं। दरअसल, कुछ बड़े राजनेताओं ने यह चुना कि वे अपने यहां के स्वास्थ्य विशेषज्ञों की बात नहीं सुनेंगे।

तंजानिया के राष्ट्रपति ने एक बड़ा निर्णय लेते हुए यह घोषणा की कि ‘उनके देश ने महामारी को परास्त कर दिया है।’ मई के शुरुआती सप्ताह से उन्होंने कोविड-19 से संबंधित डेटा जारी करना बंद कर दिया, लेकिन ऐसे संकेत मिलते हैं कि कोविड-19 अब भी वहां के नागरिकों के लिए खतरा है।

अमेरीका में, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पहले तो महामारी को मामूली मानते रहे, फिर उन्होंने चीन और उसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन को महामारी फैलने का दोषी ठहराया, और अमेरीकी अर्थव्यवस्था को फिर से पूरी तरह खोल देने के पक्षधर बने रहे।

9 of 13
राष्ट्रपति ट्रंप ने भी एक कार्यक्रम में मास्क पहनने से इनकार किया है- फाइल फोटो - फोटो : social media

ट्रंप ने खुले तौर पर रिपब्लिकन पार्टी के नेता और टेक्सास के गवर्नर ग्रेग अबॉट की तारीफ की जिन्होंने सबसे पहले अपने राज्य से लॉकडाउन हटाने का निर्णय लिया था, लेकिन टेक्सास के गवर्नर के उस निर्णय को अब वहां तेजी से बढ़ते संक्रमण के मामलों से जोड़कर देखा जा रहा है।

सार्वजनिक जगहों पर मास्क पहनने की जो हिदायत अप्रैल में अमेरीकी सरकार ने आधिकारिक रूप से दी थी, उसे भी राजनीतिक मतभेद का प्रतीक बना दिया गया है।

गवर्नर ग्रेग अबॉट ने हाल ही में अपने राज्य के मेयर्स से कहा कि ‘वे लोगों का मास्क पहनना अनिवार्य नहीं कर सकते।’ जबकि कैलिफोर्निया के गवर्नर और डेमोक्रेट नेता ने कहा है कि “विज्ञान कहता है कि मुंह ढकना और मास्क पहनना संक्रमण को बढ़ने से रोकता है।”

इस बीच राष्ट्रपति ट्रंप ने भी एक कार्यक्रम में मास्क पहनने से इनकार किया है।

10 of 13
ब्राजील के राष्ट्रपति कोविड-19 महामारी को ‘मामूली ज़ुकाम-बुखार’ कहकर खारिज कर चुके हैं- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

ब्राजील के राष्ट्रपति जायर बोलसेनारो को भी इस किस्म के वाद-विवाद में फंसते देखा गया है। वे कोविड-19 महामारी को ‘मामूली ज़ुकाम-बुखार’ कहकर खारिज कर चुके हैं। वे उन अधिकारियों की खिंचाई करते रहे जिन्होंने कोविड-19 महामारी की रोकथाम के लिए किसी भी आर्थिक गतिविधि को रोकने का प्रयास किया।

वे लगातार किसी भी रैली या बैठक में मास्क नहीं पहन रहे थे, जिसके बाद ब्राजील की एक अदालत को उनसे मास्क पहनने के लिए कहना पड़ा। राजनेताओं के इसी रवैये को देखते हुए विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रमुख टेड्रोस एदनहोम गेब्रेयासिस को कहना पड़ा है कि “हमारे लिए ज्यादा बड़ी चुनौती कोरोना वायरस नहीं, बल्कि वैश्विक नेतृत्व और वैश्विक समन्वय का ना होना है।”

11 of 13
न्यूजीलैंड में कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI
  • संक्रमण कहां नियंत्रण में है?

प्रशांत महासागर में स्थित कुछ द्वीपों के अलावा न्यूजीलैंड में कोरोना संक्रमण नियंत्रण में है और इसके लिए प्रधानमंत्री जैसिंडा अर्डर्न की सरकार की काफी तारीफ हुई है। न्यूजालैंड सरकार ने जिस आक्रामक तरीके से इस महामारी का सामना किया, उसकी वजह से बीते 24 दिन से वहां कोई नया केस सामने नहीं आया है।

इसी तरह दक्षिण कोरिया ने भी तकनीक के इस्तेमाल और कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की मदद से संक्रमण दर को बहुत कम करने में सफलता हासिल की है। वहां भी बीते तीन दिन से कोई नया मामले सामने नहीं आया है।

12 of 13
सबसे गौरवशाली है वियतनाम जिसका दावा है कि उनके यहां कोविड-19 से एक भी मौत नहीं हुई- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : pixabay

कुछ सप्ताह पहले सोल के एक नाइट क्लब में गए कई लोगों को कोरोना संक्रमित पाया गया था। इसके बाद सोल के मेयर ने चेतावनी जारी की और कहा कि ‘अगर तीन दिन तक, रोजाना तीस से ज्यादा मामले सामने आए तो सोशल डिस्टेंसिंग के नियम फिर से लागू कर दिए जाएंगे।’

इस मामले में सबसे गौरवशाली है वियतनाम जिसका दावा है कि उनके यहां कोविड-19 से एक भी मौत नहीं हुई। महामारी की सूचना मिलने पर तुरंत लॉकडाउन करने के निर्णय और देश की सीमाओं पर सख्त पहरेदारी ने वियतनाम को संक्रमण दर नियंत्रित रखने में मदद की।

विज्ञापन

13 of 13
जिन देशों ने कोरोना वायरस महामारी को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है, उनके सामने अब चुनौती ये है कि वो सामान्य जीवन में लौटते हुए बहुत सावधान रहें- सांकेतिक तस्वीर - फोटो : PTI

पर आगे क्या? ये फिलहाल एक बड़ा सवाल है कि ज्यादातर अफ्रीकी देशों में संक्रमण की सही स्थिति क्या है। एक नजरिया तो ये कहता है कि अधिकांश अफ्रीकी देशों में संसाधनों की कमी है, जिसकी वजह से वहां ज्यादा टेस्टिंग संभव नहीं और यही वजह है कि वहां महामारी की स्थिति का सही जायजा लगा पाना मुश्किल है।

दूसरा नजरिया ये है कि अफ्रीकी देशों में तुलनात्मक रूप से युवा आबादी ज्यादा है, इसलिए महामारी से प्रभावित होने वाले लोगों की संख्या कम है।

तीसरा नजरिया है कि बाहरी दुनिया से सीमित संपर्क रखने वाले समुदायों पर महामारी का प्रभाव सबसे अंत में या फिर कभी नहीं होगा।

मगर जिन देशों ने कोरोना वायरस महामारी को सफलतापूर्वक नियंत्रित किया है, उनके सामने अब चुनौती ये है कि वो सामान्य जीवन में लौटते हुए बहुत सावधान रहें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें