मरीजों की हालत बिगड़ने पर वेंटिलेटर सपोर्ट देना चुनौती बन गया है। अमेरिका के शिकागो स्थित रू श यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर के इंटर्नल मेडिसिन विभाग के डॉ. जॉसेन रेजर का कहना है कि रक्त में एक प्रोटीन होता है जिससे पता चल सकता है कि मरीज की स्थिति क्या है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ेगी या नहीं।
रक्त में मिलने वाला 'एसयूपीएआर' प्रोटीन बीमारी की गंभीरता और शरीर को होने वाले खतरे के बारे में बताता है। ये शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को भी वायरस से लड़ने के लिए सक्रिय करता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि रक्त में एसयूपीएआर प्रोटीन की मात्रा अधिक है तो ऐसे मरीजों को सांस लेने के लिए मशीन की आवश्यक्ता जल्दी पड़ सकती है।
खास बात ये है कि अगर ऐसा पता पहले ही चल जाएगा तो डॉक्टर इलाज के तरीके में बदलाव कर मरीज को राहत पहुंचा सकते हैं और उसे गंभीर स्थिति में जाने से बचा सकते हैं। 15 कोरोना मरीजों पर हुआ अध्ययन हाल ही क्रिटिकल केयर जर्नल में प्रकाशित हुआ है।