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आखिर देशभर में हो रहे सीरो सर्वे का क्या फायदा है, कोरोना से कैसे जुड़ा है ये?

Fri, 21 Aug 2020 06:26 AM IST
सोनू शर्मा लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
दिल्ली में हुए दूसरे सीरो सर्वे की रिपोर्ट जारी कर दी गई है। इसके मुताबिक, दूसरे सीरो सर्वे के दौरान 15 हजार से ज्यादा लोगों का टेस्ट किया गया, जिसमें से 28 फीसदी के करीब लोगों में कोरोना एंटीबॅाडीज पाई गई हैं। इसमें 18 साल से कम उम्र के बच्चों और महिलाओं में कोरोना से लड़ने के लिए एंटीबॅाडी अधिक पाई गई हैं। आइए जानते हैं आखिर सीरो सर्वे का फायदा क्या है... 

सीरो सर्वे का क्या फायदा है? 

जीबी पंत अस्पताल के प्रोफेसर डॉ. संजय पांडेय के मुताबिक, 'इस सर्वे में पता चलता है कि कितने लोग संक्रमित हो चुके हैं, क्योंकि 80 फीसदी लोग एसिम्प्टोमेटिक हैं, 10-15 फीसदी हल्के लक्षण वाले और 5-10 फीसदी गंभीर लक्षण वाले हैं। इन 80 फीसदी लोगों को संक्रमण हुआ, लेकिन उन्हें पता नहीं चला। ऐसे लोगों की पहचान करने के लिए सीरो सर्वे करते हैं। इससे पता चलता है कि किसी क्षेत्र में कोरोना का प्रकोप कितना था और वहां कितने प्रतिशत लोगों में एंटीबॉडीज बन चुके हैं यानी कितने प्रतिशत संक्रमित हो चुके हैं। इससे आगे की प्लानिंग में मदद मिलती है। कल को वैक्सीन आती है तो जहां लोगों में एंटीबॉडी कम हैं, वहां वैक्सीन पहले दे सकते हैं।' 
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कोरोना वायरस के बारे में जानकारी - फोटो : Twitter/Air
कोरोना सबसे ज्यादा किस उम्र के लोगों को प्रभावित करता है? 
  • डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'अक्सर देखने में आया है कि 65 वर्ष से ऊपर के जो लोग हैं या जिन्हें पहले से कोई बीमारी है और कोई दवा चल रही है या कोई महिला प्रेग्नेंट है, उनमें संक्रमण का खतरा बना रहता है। इसके अलावा एक शोध के अनुसार डायलिसिस वाले मरीजों की इम्यूनिटी कम होने की वजह से उनमें मृत्यु दर ज्यादा देखा गया है। ऐसे सभी लोगों को बचाना जरूरी है।' 
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कोरोना वायरस के बारे में जानकारी - फोटो : Twitter/Air
क्या देश के किसी क्षेत्र में हर्ड इम्यूनिटी बनी है? 
  • डॉ. संजय पांडेय बताते हैं, 'विश्व स्वास्थ्य संगठन ने कहा है कि अभी कहीं भी हर्ड इम्यूनिटी नहीं बनी है, क्योंकि अभी यह पता नहीं है कि कितने प्रतिशत लोगों के संक्रमित होने पर हर्ड इम्यूनिटी विकसित होगी। जैसे धारावी (मुंबई) में एक सर्वे में 50 फीसदी लोगों में एंटीबॉडीज पाए गए हैं, तो ये नहीं कह सकते हैं कि वहां हर्ड इम्यूनिटी बन गई है। अभी यह भी पक्का नहीं है कि 70 फीसदी लोगों में पाए जाने पर हर्ड इम्यूनिटी मानेंगे या 80 फीसदी पर।' 

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कोरोना वायरस के बारे में जानकारी - फोटो : Twitter/Air
हम वैक्सीन की मंजिल से कितनी दूर हैं?

डॉ. संजय पांडेय बताते हैं, 'देश में तीन वैक्सीन्स पर ट्रायल चल रहा है। जैसा कि प्रधानमंत्री ने कहा है कि उम्मीद है साल खत्म होते-होते वैक्सीन मिलने लगेगी। जहां तक ट्रायल के चरणों का सवाल है तो फेज 1 और 2 में पता चल चुका होता है कि ये वैक्सीन सुरक्षित हैं और इनके कोई साइड-इफेक्ट नहीं होंगे। फेज 3 ट्रायल ज्यादा लोगों पर किया जाता है और पता किया जाता है कि एंटीबॉडीज कितने दिन तक शरीर में मौजूद रहते हैं। इसलिए देश में जब भी वैक्सीन आएगी, वो सुरक्षित और असरकारी वैक्सीन होगी।' 
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कोरोना वायरस के बारे में जानकारी - फोटो : Twitter/Air
ट्रेस, टेस्ट एंड ट्रीट से कोरोना पर कितना नियंत्रण कर पा रहे हैं? 
  • डॉ. संजय पांडेय के मुताबिक, 'यह प्रयास अब तक काफी सफल रहा है। दिल्ली में आप देख सकते हैं कि जून के महीने में केस बहुत ज्यादा आ रहे थे। तब टेस्टिंग को तीन गुना बढ़ाया गया और जुलाई आते-आते मामले काफी कम हो गए। अभी भी मामले कम आ रहे हैं और ठीक होने वाले मरीजों का आंकड़ा भी बढ़ा है, तो एक्टिव केसेज कम हो गए हैं। कोरोना पर नियंत्रण के लिए टेस्टिंग बहुत जरूरी है।' 
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कोरोना वायरस के बारे में जानकारी - फोटो : Twitter/Air
क्या बारिश के मौसम में ज्यादा सतर्क रहना है? 

डॉ. संजय पांडेय कहते हैं, 'हमेशा से बरसात के मौसम में कई तरह की बीमारियां बढ़ जाती हैं। इस वक्त कोरोना वायरस फैला हुआ है और चूंकि यह नया वायरस है इसलिए यह कहना मुश्किल है कि इस वक्त संक्रमण ज्यादा होगा या नहीं, लिहाजा सभी को सतर्क रहना है। दूसरी बात, इस मौसम में ह्यूमिडिटी बढ़ जाती है, इसलिए वायरस के फैलने की संभावना ज्यादा रहती है।' 
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