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मां-बाप से मिल सकता है औलाद को कैंसर

Sun, 07 Aug 2016 02:24 PM IST
बीबीसी
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- फोटो : bbc
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वैज्ञानिकों का दावा है कि वो इस बात का पता लगाने में कामयाब रहे हैं कि क्यों कुछ परिवारों में तरह-तरह के कैंसर की बीमारियां पनपती हैं। ये बात उनके मुताबिक आनुवांशिक परीक्षणों या जनेटिक टेस्टिंग में सामने आई।
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कैंसर में दुर्लभ और आसाधारण मानी जाने वाली किस्म सारकोमा से ग्रसित 1100 मरीजों पर किए गए परीक्षणों में पाया गया कि इनमें से आधे से ज्यादा मरीज कैंसर के जोखिम को बढ़ाने वाले जीन म्यूटेशन के साथ पैदा हुए थे।

शोध में पाया गया कि स्तन, गर्भाशय और आंतों के कैंसर वाले मरीज अधिकतर जीन म्यूटेशन का शिकार होते हैं। लैंसेट ऑनकालाजी पत्रिका में छपे एक अध्ययन के मुताबिक जीनों में म्यूटेशन पर हुआ शोध कैंसर के इलाज में मददगार साबित हो सकते हैं।
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युवाओं और बच्चों में 'सारकोमा' कैंसर होने की ज्यादा संभावना

- फोटो : bbc
प्रमुख शोधकर्ता प्रो. इयान जुडसन के अनुसार, 'विरासत के संबंध में हमें नए तरीके से सोचना होगा।' सारकोमा एक गैरमामूली किस्म का कैंसर है जो हड्डियों, मांसपेशियों और महीन ऊतकों में विकसित होता है।

इस कैंसर की चपेट में अधिकतर बच्चे और युवा आते हैं। इससे ग्रसित मरीज के बचने की बेहद कम संभावना होती है इसलिए शोधकर्ताओं ने तय किया है वो इससे जुड़े आनुवांशिक कारणों के बारे में अधिक से अधिक जानकारी हासिल करेंगे। शोधकर्ताओं ने जिन 1162 मरीजों के जीनों की डीएनए संरचना का अध्ययन किया उनमें से 72 को सारकोमा का जोखिम बढ़ाने वाला पाया गया।

इस शोध में यह भी पता चला कि हर पांच में एक मरीजों में एक से अधिक बार जीन म्यूटेशन होने पर कैंसर का जोखिम बढ़ जाता है।
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